डाबर ने FSSAI को दी चुनौती, आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट लेकर पहुंची शिकायत
यह मामला FSSAI के उस रोक वाले आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि '100%' जैसे दावों का इस्तेमाल 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018' का उल्लंघन है. FSSAI ने भ्रामक विज्ञापन और लेबलिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.
Highlights
- डिवीजन बेंच के सामने इस याचिका को तुरंत लिस्ट करने की मांग रखी.
- FSSAI ने डाबर इंडिया के कई प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगाई है.
- रेगुलेटर ने कंपनी से 15 दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है.
कंज्यूमर गुड्स बनाने वाली बड़ी कंपनी डाबर ने दिल्ली हाई कोर्ट में ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) के आदेश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. दरअसल, बीते दिनों FSSAI ने कंपनी को ‘100% शुद्ध’, ‘100% नेचुरल’, ‘100% शुद्धता की गारंटी’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे करने वाले फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री को तुरंत रोकने का निर्देश दिया था.
सीनियर वकील संदीप सेठी ने चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच के सामने इस याचिका को तुरंत लिस्ट करने की मांग रखी. बेंच ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया और मामले की तुरंत सुनवाई करने पर सहमति जताई. इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला FSSAI के उस रोक वाले आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि ‘100%’ जैसे दावों का इस्तेमाल ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018’ का उल्लंघन है.
सोमवार शाम को FSSAI ने डाबर इंडिया के उन फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया, जिन पर ‘100 प्रतिशत’ होने का दावा किया गया था. इनमें शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी, नारियल का दूध और इसी तरह के दूसरे प्रोडक्ट्स शामिल हैं. रेगुलेटर ने कंपनी से 15 दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है.
8 अप्रैल को भी मिला था डाबर को नोटिस
डाबर इंडिया को 8 अप्रैल को FSSAI से एक नोटिस भी मिला था, जिसमें उसके एक प्रोडक्ट पर ‘100 फीसदी’ होने के कथित भ्रामक दावे पर सवाल उठाया गया था. रेगुलेटर ने अपने बयान में कहा कि फूड बिजनेस ऑपरेटर संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई करने में नाकाम रहा.
इसके जवाब में कंपनी ने मंगलवार को एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, ‘कंपनी ने उचित जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि जिस प्रोडक्ट लेबल पर आपत्ति जताई गई है, उस पर ‘100% शुद्ध’ जैसा कोई दावा नहीं किया जा रहा है.’
कंपनी ने अपने बयान में कहा, ‘एक अच्छे कॉरपोरेट नागरिक के तौर पर डाबर ने FSSAI के पत्र में बताए गए प्रोडक्ट लेबल्स को नए लेबल्स और विज्ञापनों में बदलने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी, जिनमें ‘100%’ का दावा नहीं है. उक्त आदेश में बताए गए ज्यादातर प्रोडक्ट लेबल्स, विज्ञापनों और वेबसाइट कंटेंट को या तो पहले ही बदला जा चुका है या बदलने की प्रक्रिया चल रही है.’
प्योरिटी और सेफ्टी
अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में तेजी से बिकने वाले कंज्यूमर गुड्स (FMCG) की इस बड़ी कंपनी ने कहा कि नोटिस का संबंध केवल प्रोडक्ट के विवरण की व्याख्या से है और यह कंपनी द्वारा बनाए और बेचे जाने वाले प्रोडक्ट्स की क्वालिटी, सुरक्षा, शुद्धता या मानकों पर कोई आरोप नहीं लगाता या सवाल नहीं उठाता.
कंपनी ने कहा कि उसके बिजनेस ऑपरेशन्स, वित्तीय स्थिति या परफॉर्मेंस पर असर केवल उन फूड प्रोडक्ट्स तक ही सीमित है जिन पर आपत्ति जताई गई है.
रेगुलेटर के अनुसार, ऐसे दावे अस्पष्ट और जिनकी पुष्टि नहीं की जा सकती, ऐसे होते हैं और इनसे फ़ूड प्रोडक्ट्स की क्वालिटी या बनावट के बारे में कंज्यूमर्स के गुमराह होने की संभावना रहती है.
एक्शन में नजर आ रहा रेगुलेटर
हाल के महीनों में रेगुलेटर ने फूड बिजनेस ऑपरेटर्स द्वारा भ्रामक विज्ञापन और लेबलिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है और मैन्युफैक्चरर्स व ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है. उसकी यह ताजा कार्रवाई उन दावों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिनसे FSSAI के अनुसार, किसी प्रोडक्ट की शुद्धता या क्वालिटी के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर बताने वाली धारणा बन सकती है.
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