Customs Duty पर सरकार का बड़ा प्लान, 2027-28 तक सिंगल डिजिट में आएंगे टैरिफ स्लैब

केंद्र सरकार वर्ष 2027-28 के बजट तक कस्टम्स टैरिफ रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कस्टम्स टैरिफ स्लैब्स की संख्या घटाकर सिंगल डिजिट में लाई जाएगी. सरकार कस्टम्स ड्यूटी व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने पर काम कर रही है.

Customs Duty Image Credit: tv9 bharatvarsh

Highlights

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि FTA और आर्थिक सुधारों के जरिए भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
  • केंद्र सरकार का लक्ष्य 2027-28 के बजट तक कस्टम्स टैरिफ स्लैब्स की संख्या घटाकर सिंगल डिजिट में लाना है.
  • सरकार कस्टम्स टैरिफ रेशनलाइजेशन के तहत टैरिफ स्लैब्स कम करने पर काम कर रही है.

Customs Duty: केंद्र सरकार अगले दो वर्षों में कस्टम्स ड्यूटी व्यवस्था को और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027-28 के बजट तक कस्टम्स टैरिफ रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी करना है. इसके तहत कस्टम्स टैरिफ स्लैब्स की संख्या घटाकर सिंगल डिजिट यानी 10 से कम कर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल करीब 13 टैरिफ स्लैब बचे हैं और इन्हें चरणबद्ध तरीके से और कम किया जा रहा है. निर्मला सीतारमण ने यह बात NCAER की ओर से आयोजित सी. डी. देशमुख मेमोरियल लेक्चर के बाद बातचीत के दौरान कही. उन्होंने कहा कि सरकार कस्टम्स ड्यूटी ढांचे को सरल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है.

लगातार कम हो रहे हैं टैरिफ स्लैब

पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने हजारों टैरिफ लाइनों पर लागू MFN टैरिफ में बदलाव किए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2023 में औसत टैरिफ करीब 17% तक पहुंच गया था, जो बाद में घटकर 2024 में 16% से थोड़ा अधिक रह गया. फिलहाल यह लगभग 15% के आसपास है. सरकार का उद्देश्य आयात शुल्क व्यवस्था को सरल बनाना और वैश्विक व्यापार के अनुरूप तैयार करना है.

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टैरिफ स्लैब घटाने से पूरी व्यवस्था आसान नहीं होगी. कई उत्पादों पर अभी भी स्पेसिफिक ड्यूटी यानी मात्रा आधारित शुल्क लागू है, जबकि कुछ वस्तुओं पर एड वैलोरम ड्यूटी और स्पेसिफिक ड्यूटी का मिश्रित ढांचा बना हुआ है. इसके अलावा एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी टैरिफ व्यवस्था को काफी जटिल बनाता है. कई उत्पाद समूहों में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को खत्म करने का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है.

FY27 बजट में भी हुए थे कई बदलाव

वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में भी सरकार ने कस्टम्स ड्यूटी ढांचे को सरल बनाने की दिशा में कई कदम उठाए थे. व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात होने वाले कई उत्पादों पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% किया गया. इसके अलावा कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 महत्वपूर्ण दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया. एक्सपोर्ट इनपुट्स के लिए ड्यूटी-फ्री सीमा भी बढ़ाई गई.

FTA से भी बदल रही है तस्वीर

भारत लगातार विभिन्न देशों के साथ FTA कर रहा है. ऐसे में भले ही सामान्य MFN टैरिफ में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा हो, लेकिन प्रेफरेंशियल ट्रेड रूट्स के जरिए आने वाले आयात का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है. वर्ष के अंत तक यूरोपियन यूनियन के साथ FTA लागू होने और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के आगे बढ़ने की स्थिति में अगले एक वर्ष में भारत के कुल आयात का 50% से अधिक हिस्सा प्रेफरेंशियल टैरिफ के तहत आ सकता है. इसका मतलब है कि भारतीय उद्योग और आयातकों के लिए शुल्क व्यवस्था पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी और सरल हो सकती है.

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दोहराया

अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य कोई नई महत्वाकांक्षा नहीं है, बल्कि देश की ऐतिहासिक आर्थिक स्थिति को फिर से हासिल करने का प्रयास है. उन्होंने आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एक समय भारत का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (PPP) में लगभग एक-तिहाई हिस्सा था, जो बाद में औपनिवेशिक शासन और अन्य कारणों से लगातार घटता गया. आज भारत की हिस्सेदारी फिर बढ़कर करीब 8.5% तक पहुंच चुकी है.

1991 और 2014 के सुधारों का किया जिक्र

निर्मला सीतारमण ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत को विभाजन, गरीबी, खाद्य संकट और कमजोर औद्योगिक आधार जैसी कई चुनौतियां विरासत में मिली थीं. उन्होंने ISRO, BARC, BHEL और IIT जैसे संस्थानों की स्थापना को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, लेकिन साथ ही लाइसेंस-कोटा-परमिट राज की आलोचना करते हुए कहा कि इस व्यवस्था ने उद्यमिता और निजी निवेश को सीमित कर दिया था.

उन्होंने 1991 के आर्थिक सुधारों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया और कहा कि वर्ष 2014 के बाद फाइनेंशियल इनक्लूजन, JAM Trinity, इन्फ्लेशन टारगेटिंग, IBC, GST और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दिया है. उनके अनुसार, इन सुधारों की वजह से भारत वैश्विक आर्थिक झटकों के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ने में सफल रहा है.

यह भी पढ़ें: Stock To Watch: आज LIC, Trent, AWL Agri, PNB Housing जैसे शेयरों पर रखें नजर, दिख सकती है हलचल