Tata Sons: लंबी कहानी में एक नया मोड़, रीऑर्गनाइजेशन से क्या खत्म हो जाएगा लिस्टिंग का विवाद?

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस के साथ विलय करने का प्रस्ताव रखा गया है. 12 सितंबर को RBI ने टाटा संस की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया था और उसे 'अपर लेयर' में आने वाली NBFCs पर लागू नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था.

टाटा संस के भीतर विवाद. Image Credit: Money9live

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड को ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में दो ऑपरेटिंग कंपनियों को मर्ज करने का प्लान भेजा है. इसका मकसद कंपनी का रेगुलेटरी स्टेटस बदलना और इसे अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी बनाए रखना है. ट्रस्ट्स के बयान के मुताबिक, सोमवार को भेजे गए प्रस्ताव में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने की बात कही गई है.

ट्रस्ट्स ने इस प्लान की जानकारी देने के लिए एक मीडिया ब्रीफिंग भी की और टाटा संस की संभावित लिस्टिंग के विकल्प के तौर पर इसे सबके सामने रखा.

स्ट्रैटेजिक रीऑर्गनाइजेशन

टाटा संस के सबसे बड़े शेयरहोल्डर, टाटा ट्रस्ट्स की ओर से कंपनी के स्ट्रैटेजिक रीऑर्गनाइजेशन (रणनीतिक पुनर्गठन) के प्रस्ताव से कई संभावनाएं पैदा हुई हैं. इसके मूल में टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस को एक अनलिस्टेड कंपनी के तौर पर बनाए रखने का इरादा है.

टाटा संस का बोर्ड और उसके सबसे बड़े शेयरहोल्डर, टाटा ट्रस्ट्स (जिसकी हिस्सेदारी 66% है) इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, जहां एक तरफ बोर्ड लिस्टिंग के पक्ष में है, वहीं टाटा ट्रस्ट्स का बोर्ड इसका विरोध कर रहा है.

NBFC कैटेगरी से बाहर निकलने का प्लान

एक प्रेस बयान में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस के साथ विलय करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसमें बताया गया है कि इस रणनीतिक पुनर्गठन से यह सुनिश्चित होगा कि पुनर्गठित कंपनी न तो नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) होगी और न ही कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC).

RBI ने दिया है लिस्टिंग का आदेश

12 सितंबर को RBI ने टाटा संस की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया था और उसे ‘अपर लेयर’ में आने वाली NBFCs पर लागू नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था. 2024 में टाटा संस ने अपना बकाया कर्ज चुकाने के बाद रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए RBI में अर्जी दी थी. RBI के नियमों के मुताबिक, 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट्स वाली NBFC ‘अपर लेयर’ कैटेगरी में आती है.

इस घटनाक्रम पर नजर रखने वालों का मानना ​​है कि टाटा ट्रस्ट्स का यह कदम टाटा संस बोर्ड को यह बताने का एक तरीका है कि लिस्टिंग से बचना चाहिए.

रीऑर्गनाइजेशन से क्या होगा फायदा?

टाटा संस में 66% हिस्सेदारी रखने वाले ट्रस्ट्स ने कहा कि, इस रीऑर्गनाइजेशन से कंपनी के पास इतनी ऑपरेटिंग इनकम होगी कि वह नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) के मुख्य बिजनेस क्राइटेरिया से बाहर हो जाएगी. साथ ही, ग्रुप कंपनियों में निवेश का अनुपात कम होने से यह ‘कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी’ की परिभाषा से भी बाहर हो जाएगी.

बयान में कहा गया, ‘टाटा ट्रस्ट्स का मानना ​​है कि प्रस्तावित रीऑर्गनाइजेशन और नियमों के पालन के लिए एक्शन प्लान, टाटा ग्रुप और उसके स्टेकहोल्डर्स के हित में होगा.’

होल्डिंग कंपनी से ऑपरेटिंग कंपनी

अहम बात यह है कि नए स्ट्रक्चर से होल्डिंग कंपनी ‘टाटा संस’ अब एक ऑपरेटिंग कंपनी बन जाएगी. यह देखना दिलचस्प होगा कि टाटा संस अपने सबसे बड़े शेयरहोल्डर (टाटा ट्रस्ट्स) के इस प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देती है, खासकर ऐसे समय में जब उत्तराधिकार को लेकर तीखी लड़ाई चल रही है.

आखिरकार, इस प्रस्ताव को टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) में मंजूरी लेनी होगी. यह मामला पहले से ही विवादित है, क्योंकि बैठक में एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन दोबारा नियुक्त करने का मुद्दा भी उठेगा.

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