Tata Sons की लिस्टिंग पर फिर आया नया मोड़, अब इन दो कंपनियों पर फंसा पेंच; आखिर कहां अटका है मामला?
Tata Trusts ने Tata Electronics Systems Solutions और Tata Consulting Engineers का टाटा सन्स में विलय करने का प्रस्ताव दिया है. प्रस्तावित विलय के बाद Tata Sons की आय 1,05,043 करोड़ रुपये और नेट एसेट्स 2,00,158 करोड़ रुपये हो जाएंगी. Tata Trusts का कहना है कि Group Companies में निवेश 90 फीसदी से नीचे आने से Tata Sons CIC के दायरे से बाहर हो सकती है.
Highlights
- Tata Trusts ने TESS और TCE के Tata Sons में विलय का प्रस्ताव रखा है.
- इसका मकसद Tata Sons को CIC की कैटेगरी से बाहर निकालना है.
- हालांकि Tata Trusts के इस प्रस्ताव को आगे बढ़ने के लिए दो बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा.
Tata Sons को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के RBI के आदेश के बीच Tata ट्रस्ट ने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. टाटा ट्रस्ट ने Tata Electronics Systems Solutions Pvt. Ltd (TESS) और Tata Consulting Engineers (TCE) का टाटा सन्स में विलय करने का प्रस्ताव दिया है. इस पुनर्गठन का मकसद Tata Sons को Core Investment Company (CIC) के दायरे से बाहर निकालना है, ताकि कंपनी पर CIC के तौर पर शेयर बाजार में लिस्ट होने की जरूरत न रहे.
Tata Trusts ने क्या प्रस्ताव दिया?
सोमवार को Tata Sons में 65.9 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले Tata Trusts ने TESS और TCE के Tata Sons में विलय का प्रस्ताव रखा. यह प्रस्ताव Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के साथ-साथ RBI को भी भेजा गया है. प्रस्तावित विलय के बाद Tata Sons की कुल आय 1,05,043 करोड़ रुपये हो जाएगी. वहीं कंपनी की कुल नेट एसेट्स 2,00,158 करोड़ रुपये होंगी. इसमें Group Companies में निवेश 1,77,120 करोड़ रुपये होगा.
Tata Trusts के मुताबिक, विलय के बाद समूह की कंपनियों में निवेश कुल नेट एसेट्स के 90 फीसदी से कम रहेगा. इसी वजह से Tata Sons को CIC यानी Core Investment Company के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए.
CIC क्या होता है?
RBI के नियमों के मुताबिक, Core Investment Company एक ऐसी NBFC होती है, जिसकी कम से कम 90 फीसदी एसेट्स Group Companies के शेयर, बॉन्ड या लोन में निवेश की गई हों. TESS और TCE के विलय के बाद Tata Sons की कुल नेट एसेट्स और Group Companies में निवेश का अनुपात 90 फीसदी से नीचे आने का अनुमान है. इसी आधार पर Tata Trusts का प्रस्ताव Tata Sons को CIC की कैटेगरी से बाहर निकालने की कोशिश है.
Tata Sons की मौजूदा वित्तीय स्थिति क्या है?
मार्च 2026 में खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए Tata Sons की स्टैंडअलोन आय 42,366.5 करोड़ रुपये और मुनाफा 31,961 करोड़ रुपये रहा था. Tata Trusts की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब RBI ने Tata Sons के CIC के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन खत्म करने के पिछले आवेदन को खारिज कर दिया है.
RBI ने क्या कहा था?
RBI ने 11 सितंबर को Tata Sons के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर सौरभ अग्रवाल को भेजे पत्र में कंपनी के CIC के तौर पर रजिस्ट्रेशन खत्म करने के अनुरोध को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था. RBI ने कहा था कि Tata Sons को NBFC-Upper Layer पर लागू सभी नियमों और निर्देशों का पूरी तरह पालन करने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे.
Tata Sons को RBI ने पहली बार सितंबर 2022 में Upper Layer NBFC के तौर पर वर्गीकृत किया था. इसके बाद कंपनी को सितंबर 2025 तक सार्वजनिक कंपनी बनने के लिए कहा गया था. हालांकि, RBI ने अभी यह तय नहीं किया है कि Tata Sons को इस आदेश का पालन कब तक करना होगा.
Tata Sons का बोर्ड क्या चाहता है?
यहां मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Tata Sons के बोर्ड ने पहले ही कंपनी को निजी बनाए रखने का रुख अपनाया था. 2024 की गर्मियों में Tata Sons के बोर्ड ने सर्वसम्मति से कंपनी को निजी रखने का प्रस्ताव पास किया था. Tata Group के वरिष्ठ अधिकारी रहे और अब Tata Trusts के सलाहकार Farokh Subedar ने कहा कि Tata Sons के बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट नहीं करने का प्रस्ताव वापस नहीं लिया है. उनके मुताबिक, RBI के निर्देशों का पालन करने के लिए यह पुनर्गठन एक तरीका है.
प्रस्ताव के सामने दो बड़ी चुनौतियां
Tata Trusts के इस प्रस्ताव को आगे बढ़ने के लिए दो बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा. पहली चुनौती यह है कि Tata Sons के बोर्ड को इस विलय प्रस्ताव को मंजूरी देनी होगी. 17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने Trusts के चेयरमैन Noel Tata के उस फैसले का विरोध किया था, जिसमें N. Chandrasekaran के तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाने से इनकार किया गया था. इसी बैठक में बोर्ड ने RBI के आदेश के अनुसार Tata Sons को सार्वजनिक कंपनी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने पर भी सहमति जताई थी.
दूसरी चुनौती RBI की मंजूरी से जुड़ी है. अगर Tata Sons का बोर्ड Tata Trusts के प्रस्ताव को मंजूरी भी दे देता है, तब भी यह साफ नहीं है कि RBI Tata Sons को Upper-Layer NBFC की श्रेणी से बाहर करने के प्रस्ताव को मंजूरी देगा या नहीं.
RBI और Tata Sons के बीच क्या है मामला?
RBI ने Tata Sons को Upper Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया है. ऐसे में कंपनी पर इससे जुड़े नियम लागू होते हैं. Tata Trusts का प्रस्ताव इसी नियामकीय स्थिति को बदलने की दिशा में है. Tata Trusts का कहना है कि प्रस्तावित पुनर्गठन पूरा होने के बाद Tata Sons CIC नहीं रहेगी और उसे अपना Certificate of Registration (CoR) सरेंडर करना होगा.
फिलहाल इस प्रस्ताव पर Tata Sons के बोर्ड और RBI का रुख अहम रहेगा. RBI ने अभी Tata Sons के लिए अपने आदेश का पालन करने की कोई नई अंतिम तारीख तय नहीं की है.
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