ईरान युद्ध ने पलट दिया ट्रेंड, टीवी-फोन-AC सब हो रहे महंगे, डबल हो सकती है ₹10000 वाले फोन की कीमत
स्मार्टफोन, टीवी और होम अप्लायंसेज की कीमतों में तेज उछाल से टेक प्रोडक्ट्स फिर महंगे हो रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा असर एंट्री-लेवल कंज्यूमर्स पर पड़ रहा है. 10000 रुपये से कम मिल जाने वाले स्मार्टफोन अब 13000 रुपये से 14000 रुपये तक पहुंच सकते हैं.
Iran War and Costlier TV-AC-Smartphone Price: देश में टेक प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे कई सालों से चली आ रही ‘सस्ती होती टेक्नोलॉजी’ की ट्रेंड अब उलटती नजर आ रही है. स्मार्टफोन, टीवी और दूसरे होम अप्लायंसेज के दाम 6-8 साल पुराने स्तर के करीब पहुंचने लगे हैं. कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत, कमजोर होता रुपया और ग्लोबल सप्लाई दबाव के चलते अब कीमतें कंट्रोल करना मुश्किल हो गया है. इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा है कि आने वाले महीनों में यह दबाव और बढ़ सकता है, जिससे एंट्री-लेवल कंज्यूमर पर सीधा असर पड़ने की आशंका है. हालांकि मनी9लाइव कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर स्वतंत्र रुप से पुष्टि नहीं करता है.
स्मार्टफोन और TV की कीमतों में तेज उछाल
एंट्री-लेवल 5G स्मार्टफोन, जो पिछले साल तक 10,000 रुपये से कम में मिल जाते थे, अब 13,000 से 14,000 रुपये तक पहुंच चुके हैं. अगले कुछ महीनों में इनकी कीमत 17,000-18,000 रुपये तक जाने की संभावना जताई जा रही है. कुछ कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि कीमतें 20,000 रुपये के आसपास भी पहुंच सकती हैं. इसी तरह, 32-इंच का स्मार्ट टीवी, जिसकी कीमत पिछले साल करीब 6,500 रुपये थी, अब 8,500 रुपये तक पहुंच गया है और मई तक 10,000 रुपये छू सकता है. यानी कीमतें फिर से 2017-18 के स्तर पर लौट रही हैं.
AC, फ्रिज और वॉशिंग मशीन भी महंगे
सिर्फ स्मार्टफोन और टीवी ही नहीं, बल्कि व्हाइट गुड्स कैटेगरी जैसे एयर कंडीशनर, फ्रिज और वाशिंग मशीन की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. 1.5 टन का 3-स्टार AC, जो पिछले साल 32,000-34,000 रुपये में मिलता था, अब 37,000-40,000 रुपये तक पहुंच सकता है. इंडस्ट्री का मानना है कि अगर गर्मी ज्यादा पड़ती है तो मांग बनी रह सकती है, लेकिन कीमतें बढ़ने से एंट्री-लेवल सेगमेंट में गिरावट का खतरा है.
क्यों महंगे हो रहे गैजेट्स?
कीमतों में उछाल के पीछे कई कारण हैं. पिछले कुछ महीनों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बना है. वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात लागत को और बढ़ा दिया है. पहले कंपनियां लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों को सीमित रखती थीं, लेकिन अब लगातार बढ़ते खर्च के कारण यह संभव नहीं रह गया है.
डिमांड पर दिख रहा असर
महंगे होते गैजेट्स का असर अब बाजार में दिखने लगा है. रिटेलर्स के मुताबिक, कई ग्राहक नए फोन खरीदने के बजाय सेकेंड-हैंड या रिफर्बिश्ड डिवाइस की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग खरीदारी टाल रहे हैं. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने बताया कि कई कंपनियां चुनिंदा स्मार्टफोन मॉडल्स पर 10 फीसदी तक कीमत बढ़ाने की तैयारी में हैं. कुछ नए मॉडल्स पुराने वर्जन के मुकाबले 30 फीसदी से ज्यादा महंगे लॉन्च हो रहे हैं.
सरकार से राहत की मांग
बढ़ती कीमतों के बीच रिटेलर्स ने सरकार से एंट्री-लेवल स्मार्टफोन (20,000 रुपये तक) पर GST 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की मांग की है, ताकि डिमांड को सपोर्ट मिल सके. फिलहाल हालात ऐसे हैं कि नवंबर-दिसंबर से लेकर अब तक हर 30-60 दिन में कीमतों में इजाफा हो रहा है. अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले समय में टेक प्रोडक्ट्स आम उपभोक्ता की पहुंच से और दूर हो सकते हैं.
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