CDSCO की टेस्टिंग में पैरासिटामोल सहित 135 दवाओं के सैंपल फेल, कई गंभीर बिमारियों के टैबलेट है शामिल

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) द्वारा दिसंबर में लिए गए दवाओं के सैंपल में से 135 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई हैं. इनकी टेस्टिंग अलग-अलग लेबोरेटरी में की गई थी. इसके अलावा, 6.60 करोड़ रुपये की नकली कैंसर और मधुमेह रोधी दवाएं भी जब्त की गई हैं. जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें हार्ट, शुगर, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयां शामिल हैं.

135 दवाएं सैंपल टेस्ट में फेल Image Credit: money9live.com

CDSCO drug testing report: सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने दिसंबर में लिए गए दवाओं के सैंपल टेस्ट का रिजल्ट जारी किया है. इस रिजल्ट के मुताबिक, 135 दवाएं और फॉर्मूले मानक के अनुरूप नहीं पाए गए हैं. इसमें कई कंपनियों के पैरासिटामोल और पैंटोप्राजोल शामिल हैं. देशभर में केंद्रीय और राज्य, दोनों लैब टेस्टिंग के जरिए इन सैंपल्स की पहचान की गई है. जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें हार्ट, शुगर, किडनी, बी.पी. और एंटीबायोटिक सहित कई महत्वपूर्ण दवाइयां शामिल हैं. अब इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

सेंट्रल और राज्य लेबोरेट्री में हुई टेस्टिंग

CDSCO द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए 135 सैंपल्स में से 84 की पहचान विभिन्न राज्य ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्रीज द्वारा की गई, जबकि सेंट्रल ड्रग लेबोरेट्री ने 51 सैंपल्स की पहचान की है. रेगुलेटरी ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि दिसंबर की एनएसक्यू रिपोर्टिंग ने केंद्रीय डेटाबेस में एनएसक्यू की रिपोर्टिंग में राज्यों की भागीदारी को बढ़ाया है.

इससे पहले, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया राजीव सिंह रघुवंशी ने एक बयान में कहा था कि CDSCO कम प्रभावकारी दवाओं के प्रतिशत को कम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है. उन्होंने बताया कि हाल के सर्वे में सैंपल के तौर पर ली गई कुल दवाओं में से केवल 1.5 फीसदी ही कम प्रभावकारी पाई गईं.

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6.60 करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त

पिछले महीने, CDSCO के पूर्वी क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के ड्रग कंट्रोलर डायरेक्टर ने कोलकाता में एक थोक परिसर में संयुक्त जांच की. इस जांच में 6.60 करोड़ रुपये की नकली कैंसर और मधुमेह रोधी दवाएं जब्त की गईं. CDSCO के बयान में कहा गया है, “एनएसक्यू और नकली दवाओं की पहचान की यह कार्रवाई राज्य रेगुलेटरी के सहयोग से नियमित रूप से की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन दवाओं की पहचान कर उन्हें बाजार से हटाया जाए.”

इन बीमारियों की मिली नकली दवाएं

नकली पाई गई दवाओं में एसिड रिफ्लक्स के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पैंटोप्राजोल गैस्ट्रो-रेसिस्टेंट गोलियां, एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलैनेट, सेफिक्सिम जैसे एंटीबायोटिक्स, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के लिए उपयोग की जाने वाली रोसुवास्टेटिन, प्रोस्टेट से संबंधित समस्याओं के लिए टैमसुलोसिन और ड्यूटैस्टराइड गोलियां, डिफ्लैजाकोर्ट, और कुछ कैल्शियम व विटामिन डी3 की गोलियां शामिल हैं.

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