भारत को टैरिफ से बड़ा झटका नहीं दे सके ट्रंप, मजूबती के साथ आगे बढ़ रही ट्रेड डील; एक्सपोर्टर्स ने अपनाई ये रणनीति

India-US Trade Deal: अक्टूबर में US को एक्सपोर्ट साल-दर-साल 8.6 फीसदी घटकर 6.3 अरब डॉलर रह गया, जो सितंबर में 12 फीसदी की तेज गिरावट से कम है. दोनों महीने 50 फीसदी टैरिफ के असर को दिखाते हैं. लेकिन बड़े पैमाने पर आर्थिक असर सीमित है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील. Image Credit: Sergio Flores / Stringer

India-US Trade Deal: भारत की मजबूत घरेलू इकॉनमी और उम्मीद से कम एक्सपोर्ट में गिरावट, अमेरिका के साथ चल रही ट्रेड बातचीत में नई दिल्ली को फायदा दे रही है. भले ही US ने भारतीय इंपोर्ट पर 50 फीसदी तक का भारी टैरिफ लगा रखा है. अक्टूबर में US को एक्सपोर्ट साल-दर-साल 8.6 फीसदी घटकर 6.3 अरब डॉलर रह गया, जो सितंबर में 12 फीसदी की तेज गिरावट से कम है. दोनों महीने 50 फीसदी टैरिफ के असर को दिखाते हैं. इस मामूली गिरावट ने भारतीय बातचीत करने वालों को स्थिर रहने में मदद की है.

टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में गिरावट

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अभी के लिए हमने 50 फीसदी US टैरिफ के सबसे बुरे असर से बचा लिया है. अधिकारी ने कहा कि हालांकि टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के ऑर्डर में गिरावट आई है, लेकिन बड़े पैमाने पर आर्थिक असर सीमित है, जिससे बातचीत के लिए ज्यादा सोच-समझकर कदम उठाने की गुंजाइश बनती है. रिपोर्ट के मुताबिक, जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों ने US के साथ टैरिफ एग्रीमेंट किए हैं, फिर भी भारत ने जल्दबाजी में कोई डील करने से मना कर दिया है.

कम होगा टैरिफ

बातचीत से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि US आखिरकार रूस से तेल खरीदने पर लगे 25 फीसदी टैरिफ को कम कर देगा और कुल मिलाकर 15 फीसदी रेट की ओर बढ़ेगा. बदले में भारत 80 फीसदी से ज्यादा सामानों पर टैरिफ कम करने को तैयार है, जबकि खेती जैसे सेंसिटिव सेक्टर के लिए सुरक्षा बनाए रखेगा.

डायवर्सिफाई किया मार्केट

इस बीच एक्सपोर्टर भी खुद को ढाल रहे हैं. कंपनियों ने अफ्रीकी और यूरोपीय मार्केट में डायवर्सिफाई किया है और डिस्काउंट और डिलीवरी टाइमलाइन बढ़ाकर US क्लाइंट्स को बनाए रखा है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने रॉयटर्स को बताया कि कपड़े और जूते के बिजनेस कथित तौर पर 20 फीसदी तक का कॉस्ट बोझ उठा रहे हैं.

अमेरिका टॉप एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन

अप्रैल से अक्टूबर 2025 तक का ट्रेड डेटा लगातार ट्रेंड्स को कन्फर्म करता है. इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और जेम्स एंड ज्वेलरी की मजबूत डिमांड की वजह से अमेरिका 52.12 अरब डॉलर के साथ भारत का टॉप एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बना हुआ है. UAE, नीदरलैंड्स और चीन क्रमशः 22.14 अरब डॉलर, 11.98 अरब डॉलर और 10.03 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट के साथ दूसरे नंबर पर हैं. इस बीच, चीन भारत के लिए इंपोर्ट का सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है, जो देश की जरूरी ग्लोबल सप्लाई चेन पर लगातार निर्भरता को दिखाता है.

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