अमेरिकी पाबंदी के बाद भारत क्या अपना AI मॉडल बना पाएगा?
दुनिया की सबसे शक्तिशाली एआई तकनीकों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने की संभावना अब स्पष्ट हो गई है. अमेरिकी सरकार के एक आदेश के बाद एंथ्रोपिक को अपने सबसे उन्नत एआई मॉडल, फेबल 5 और माइथोस 5, की पहुंच अचानक बंद करनी पड़ी. राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस फैसले ने न केवल टेक जगत को चौंका दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि क्या भविष्य में अत्याधुनिक एआई मॉडल्स पर देशों की सीमाएं और सरकारी नियम सबसे बड़ा प्रभाव डालेंगे.
अमेरिका का मानना है कि इन शक्तिशाली उपकरणों का बाहरी देशों या कंपनियों के हाथ में लगना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है, जिससे वे इनका दुरुपयोग कर सकते हैं. अमेरिका एआई में अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखना चाहता है. इस घटना ने भारत में संप्रभु एआई (Sovereign AI) की मांग को जन्म दिया है. भारत, जो अब तक अमेरिकी एआई मॉडलों पर बहुत अधिक निर्भर रहा है, अब अपनी स्वयं की एआई क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता महसूस कर रहा है. टीसीएस जैसी भारतीय कंपनियों के एंथ्रोपिक के साथ हुए बड़े सौदे भी इससे प्रभावित हुए हैं. भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, जीपीयू और पूंजी की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसके लिए रिचर्ड शर्मा जैसे विशेषज्ञों ने आगाह किया है. यह घटना भारत को अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है.
