$53 bn की बिक्री के बाद अब डॉलर क्यों खरीद रहा RBI? क्या है बड़ा खेल?

कुछ समय पहले तक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये को गिरने से बचाने के लिए बाजार में डॉलर बेच रहा था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. आरबीआई, जिसने अरबों डॉलर बेचकर रुपये को सहारा दिया था, अब बड़े पैमाने पर डॉलर खरीद रहा है.

इस यू-टर्न के पीछे कई कारण हैं. हाल के हफ्तों में रुपया एशिया की सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक रहा है और इसमें काफी मजबूती आई है. वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता जैसे सकारात्मक कारकों ने आरबीआई को यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है.

इस खरीदारी का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) को फिर से भरना है, जो मार्च के शिखर 728.5 अरब डॉलर से घटकर 681.6 अरब डॉलर के आसपास आ गया था. पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार देश के आयात भुगतान और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है. डॉलर की पुनः खरीद करके, आरबीआई भविष्य की वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के लिए तैयार हो रहा है और रुपये पर संभावित दबाव से बचने के लिए एक मजबूत बफर बना रहा है.

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