US-ईरान में हुई डील, होर्मुज खुलने की खबर के बाद 4% तक लुढ़के कच्चे तेल के दाम; क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
पश्चिम एशिया में लंबे समय से तनाव जारी है. अब जाकर इसको लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता होने का दावा किया गया है. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को टोल-मुक्त खोलने मंजूरी दे दी है. इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली.
Oil prices tumble: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर सहमति बन गई है. इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली. सोमवार को एशियाई कारोबार के दौरान तेल की कीमतें 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गईं. पिछले कुछ महीनों से वेस्ट एशिया में तनाव के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई थी. इसी वजह से तेल के दाम लगातार ऊंचे बने हुए थे. लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद से निवेशकों और बाजार को राहत मिली है.
तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.1 प्रतिशत गिरकर 83.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई.
- वहीं अमेरिकी WTI कच्चा तेल 4.55 प्रतिशत टूटकर 81.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.
- यह दोनों प्रमुख तेल सूचकांकों का मार्च के बाद सबसे निचला स्तर माना जा रहा है.

अमेरिका और ईरान में क्या हुआ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के अधिकारियों ने रविवार को एक समझौते का Structure declared किया. इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संघर्ष खत्म करना और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को सामान्य बनाना है. रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते पर इस सप्ताह शुक्रवार तक हस्ताक्षर हो सकते हैं.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल और ईंधन का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. संघर्ष के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी.
क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
पेट्रोल और डीजल के दाम सस्ते होने की संभावना जरूर बढ़ी है. हालांकि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर ही निर्भर नहीं करतीं. इनमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और तेल कंपनियों की रणनीति भी अहम भूमिका निभाती है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत दे सकती हैं
ईरान के तेल से बढ़ेगी सप्लाई
Investing.com के मुताबिक समझौते के मसौदे में ईरान पर कुछ प्रतिबंधों में राहत, परमाणु गतिविधियों पर सीमाएं और तेल निर्यात को सामान्य बनाने जैसे प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो ईरान का अधिक तेल वैश्विक बाजार में पहुंच सकता है. इससे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा.
फिर भी बनी हुई है चिंता
हालांकि बाजार ने इस खबर का स्वागत किया है, लेकिन विशेषज्ञ अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं. उनका कहना है कि समझौते को पूरी तरह लागू होना बाकी है और हो सकता है कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तुरंत पहले जैसी सामान्य न हो.
इसके अलावा निवेशकों की नजर इस सप्ताह दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठकों पर भी बनी हुई है. फिलहाल अमेरिका-ईरान समझौते की खबर ने तेल बाजार को बड़ी राहत दी है और इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली है.
यह भी पढ़ें- अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, शुक्रवार से खुलेगा होर्मुज, जानें किन शर्तो पर बनी बात
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