Tata Sons में चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट पर विवाद, ट्रस्ट्स ने बताया इनवैलिड; 4:1 वोटिंग के बावजूद उठाया सवाल
Tata Sons में एन चंद्रशेखरन की तीसरी बार री-अपॉइंटमेंट को लेकर विवाद बढ़ गया है. Tata Trusts ने 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में पास हुए रेजोल्यूशन की वैधता पर सवाल उठाए हैं. ट्रस्ट्स के मुताबिक, AoA के तहत जरूरी नॉमिनी डायरेक्टर्स का अफर्मेटिव सपोर्ट नहीं मिला. नोएल टाटा ने री-अपॉइंटमेंट के खिलाफ वोट किया, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने समर्थन किया है.
Highlights
- Tata Trusts ने चंद्रशेखरन की तीसरी री-अपॉइंटमेंट के रेजोल्यूशन की वैधता पर सवाल उठाते हुए जरूरी अफर्मेटिव सपोर्ट नहीं मिलने का दावा किया है.
- नोएल टाटा ने री-अपॉइंटमेंट के खिलाफ वोट किया, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने समर्थन किया. इसके बावजूद बोर्ड में रेजोल्यूशन 4:1 वोटिंग से पास हुआ.
- Tata Trusts ने कास्टिंग वोट, साइरस मिस्त्री केस और टाटा सन्स की लिस्टिंग से जुड़े कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दों पर भी अपना रुख स्पष्ट किया है.
Tata Sons में एन चंद्रशेखरन की तीसरी बार री-अपॉइंटमेंट को लेकर विवाद बढ़ गया है. Tata Trusts ने दावा किया है कि 17 सितंबर को हुई Tata Sons की बोर्ड मीटिंग में चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने का रेजोल्यूशन वैध तरीके से पास नहीं हुआ है. Tata Trusts के मुताबिक, कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन यानी AoA के तहत Tata Trusts के नॉमिनी डायरेक्टर्स का जरूरी अफर्मेटिव सपोर्ट इस रेजोल्यूशन को नहीं मिला. ट्रस्ट्स ने इसे “वॉइड एब इनिशियो” बताया है.
2 नॉमिनी डायरेक्टर्स में नहीं बनी सहमति
फिलहाल Tata Sons के बोर्ड में Tata Trusts के 2 नॉमिनी डायरेक्टर्स हैं. इनमें Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा और टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन शामिल हैं. 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट के खिलाफ वोट किया, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने उनके पक्ष में वोट किया. Tata Trusts का तर्क है कि 2 नॉमिनी डायरेक्टर्स में मेजॉरिटी का मतलब दोनों डायरेक्टर्स का समर्थन है. ऐसे में 1:1 का स्प्लिट होने के कारण जरूरी अफर्मेटिव सपोर्ट हासिल नहीं हुआ. Tata Trusts ने यह भी कहा कि बोर्ड लेवल पर 4:1 का वोटिंग रिजल्ट होने से AoA में निर्धारित यह शर्त पूरी नहीं हो जाती.
कास्टिंग वोट को लेकर भी असहमति
Tata Trusts ने उस तर्क को भी खारिज किया है, जिसमें इस स्थिति को बोर्ड डेडलॉक मानकर चेयरमैन के कास्टिंग वोट से रेजोल्यूशन को आगे बढ़ाने की बात कही जा सकती है. ट्रस्ट्स का कहना है कि चेयरमैन का कास्टिंग वोट केवल उस स्थिति में लागू होता है, जब बोर्ड लेवल पर वोट्स बराबर हों. यह Tata Trusts के नॉमिनी डायरेक्टर्स से जुड़े अलग अफर्मेटिव सपोर्ट रिक्वायरमेंट पर लागू नहीं होता. Tata Trusts के अनुसार, यहां बोर्ड में कोई पैरालिसिस या डेडलॉक नहीं था, बल्कि कंपनी के AoA में मौजूद प्रोविजन के तहत जरूरी शर्त पूरी नहीं हुई.
मिस्त्री केस का भी दिया हवाला
Tata Trusts ने अपने ताजा बयान में साइरस मिस्त्री केस का भी हवाला दिया है. यह मामला 2016 में साइरस मिस्त्री को Tata Sons के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. Tata Trusts के मुताबिक, उस लिटिगेशन में भी आर्टिकल्स 104B और 121 के तहत नॉमिनी डायरेक्टर्स के अफर्मेटिव वोटिंग राइट्स का मुद्दा सामने आया था. नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी NCLAT ने इन प्रोविजंस को ऑप्रेसिव माना था और इन्हें हटाने या सीमित करने की मांग की गई थी.
Tata Trusts का कहना है कि उस समय Tata Sons ने इन प्रोविजंस का बचाव करते हुए इन्हें Tata Trusts के मेजॉरिटी शेयरहोल्डर होने के नाते हासिल लेजिटिमेट प्रोटेक्शन बताया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के उस निष्कर्ष को खारिज कर दिया था, जिसमें इन आर्टिकल्स को ऑप्रेसिव माना गया था. अब Tata Trusts का तर्क है कि Tata Sons उन प्रोटेक्शंस को नजरअंदाज नहीं कर सकता, जिनका उसने सुप्रीम कोर्ट में खुद बचाव किया था.
चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी में होगा खत्म
एन चंद्रशेखरन का मौजूदा दूसरा पांच साल का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है. इससे पहले अगस्त में उन्होंने Tata Sons बोर्ड को बताया था कि वह तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराएंगे. हालांकि, इसके बाद 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में उनके री-अपॉइंटमेंट के पक्ष में 4:1 से रेजोल्यूशन पास होने की जानकारी सामने आई. Tata Trusts के ताजा बयान के बाद अब चंद्रशेखरन की तीसरी बार री-अपॉइंटमेंट को लेकर Tata Sons और Tata Trusts के बीच विवाद और बढ़ गया है.
Tata Sons की लिस्टिंग पर भी ट्रस्ट्स का रुख
Tata Trusts ने Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर चल रही चर्चा पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है. ट्रस्ट्स ने उस तर्क को खारिज किया कि Tata Sons की लिस्टिंग से कॉरपोरेट गवर्नेंस बेहतर होगी. Tata Trusts के मुताबिक, Tata Sons पहले से ही पब्लिक कंपनियों पर लागू होने वाले कई गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स को वॉलंटेरिली अपना चुकी है. इसमें इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति, ऑडिट कमेटी, नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी, रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस से जुड़े नियम, डायरेक्टर्स की रिटायरमेंट बाय रोटेशन और इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने के लिए कोड ऑफ कंडक्ट शामिल हैं. Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा तब और महत्वपूर्ण हो गया है, जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने Tata Sons की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की एप्लिकेशन को खारिज कर दिया है.
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