2019 के बाद ईरान से पहली बार LPG खरीदेगा भारत, गैस संकट के बीच बड़ा कदम; यहां पहुंचने वाली है पहली खेप

भारत ने 2019 के बाद पहली बार ईरान से LPG की खेप खरीदकर एनर्जी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी ढील और जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच यह कदम भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने से पैदा हुए गैस संकट के बीच यह आयात राहत दे सकता है. यह खेप सरकारी तेल कंपनियों के बीच बांटी जाएगी.

एलपीजी सप्लाई Image Credit: AI/canva

India Iran LPG deal: भारत ने कई वर्षों के अंतराल के बाद ईरान से LPG की पहली खेप खरीदकर एनर्जी मार्केट में एक अहम कदम उठाया है. यह सौदा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने ईरान पर लगे तेल और रिफाइंड फ्यूल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है. वैश्विक स्तर पर जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन, खासकर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर साफ दिखाई दे रहा है. ऐसे हालात में भारत का यह फैसला एनर्जी सिक्योरिटी और सप्लाई बैलेंस की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

2019 के बाद ईरान से LPG आयात

रॉयटर्स ने तीन इंडस्ट्री सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत ने ईरान से एलपीजी की एक खेप खरीदी है, जो कई सालों बाद इस तरह का पहला आयात है. इससे पहले भारत ने 2019 में पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण ईरान से एनर्जी खरीद बंद कर दी थी. यह खेप “Aurora” नामक टैंकर के जरिए लाई जा रही है. यह टैंकर कर्नाटक के मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है.

गैस संकट के बीच राहत की कोशिश

भारत समेत दुनिया के कई देश इस समय पिछले कई दशकों के सबसे बड़े गैस संकट का सामना कर रहे हैं. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट से एनर्जी सप्लाई बाधित हुई है, जिससे एलपीजी की उपलब्धता पर असर पड़ा है. घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने औद्योगिक उपयोग के लिए गैस सप्लाई में कटौती भी की है. ऐसे में ईरान से आई यह खेप राहत देने वाली साबित हो सकती है.

तीन बड़ी कंपनियों में होगा वितरण

इस एलपीजी खेप को देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum Corporation (BPCL) और Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) के बीच बांटा जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील का भुगतान रुपये में किया जाएगा, जो भारत के लिए विदेशी मुद्रा दबाव को कम करने में मदद कर सकता है. साथ ही, भारत भविष्य में ईरान से और एलपीजी खरीदने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है.

आयात पर निर्भरता

भारत दुनिया के बड़े एलपीजी आयातक देशों में शामिल है. पिछले वर्ष देश में लगभग 33.15 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत हुई, जिसमें करीब 60 फीसदी मांग आयात से पूरी की गई. इनमें से लगभग 90 फीसदी आयात मध्य पूर्व देशों से आता है. मौजूदा संकट को देखते हुए भारत अब अपने एनर्जी सोर्स में विविधता लाने और सप्लाई को सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

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