ट्रेडिंग के शोर में वॉरेन बफे की सलाह: सफलता IQ से नहीं, टेम्परामेंट से मिलती है; जानें कैसे उनका 40 साल पुराना इंटरव्यू आज भी है फिट

चार दशक पहले 1985 में वॉरेन बफे ने एक टीवी इंटरव्यू में निवेश को लेकर जो बातें कही थीं, वे आज की तेज-रफ्तार ट्रेडिंग और सोशल मीडिया वाले दौर में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं. यह पुराना इंटरव्यू हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो रहा है. जिसमें उन्होंने कहा शेयर बाजार में सफलता के लिए IQ नहीं, 'टेम्परामेंट' है.

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लगभग चार दशक पहले, 1985 में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान वॉरेन बफे ने निवेश के जो सिद्धांत बताये थे, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं. यह इंटरव्यू हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिर से वायरल हुआ है. इसमें बफे ने जिन बातों पर जोर दिया था, वे आज के एल्गोरिदम ट्रेडिंग और तेज सट्टेबाजी के दौर में भी निवेशकों को दिशा देने का काम करती हैं. उनका साफ कहना था कि निवेश में सफलता IQ से नहीं, बल्कि आपके टेम्परामेंट से आती है.

क्या है इन्वेस्टमेंट का सबसे जरुरी नियम ?

इंटरव्यू में बफे ने अपने निवेश के नियम को बताते हुए कहा था कि “निवेश का पहला नियम है – पैसा मत गंवाओ. दूसरा नियम है – पहले नियम को कभी मत भूलो.” उन्होंने इस नियम को समझाते हुए बताया कि इसका सीधा मतलब यह है कि सिक्योरिटीज को उनकी असली कीमत से काफी कम कीमत पर खरीदना चाहिए. जब आप किसी चीज की वास्तविक वैल्यू से कम पेमेंट करते हैं, तो पूंजी के स्थायी नुकसान की संभावना अपने आप कम हो जाती है.” यह उनके गुरु बेंजामिन ग्राहम के ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ वाले सिद्धांत की ही झलक है.

भीड़ का अनुसरण नहीं, स्वतंत्र सोच है जरूरी

अपने इंटरव्यू में बफे बताते हैं कि निवेश में सफलता का राज IQ नहीं, बल्कि एक खास तरह का स्वभाव है. उन्होंने कहा, “यह एक स्वभाव संबंधी गुण है, बौद्धिक गुण नहीं आपके अंदर ऐसा स्वभाव होना चाहिए जो भीड़ के साथ चलने से या भीड़ के खिलाफ जाने से खुशी न ढूंढे. क्योंकि यह वह व्यवसाय नहीं है जहां आप जनमत संग्रह करते हैं. यह वह बिजनेस है जहां आप सोचते हैं.” ऐसे में आज जब सोशल मीडिया, सेंटीमेंट और खबरों का शोर बाजार को प्रभावित करता है, यह बात और भी ज्यादा सच लगती है.

बिजनेस के मालिक बनें, शेयर के ट्रेडर नहीं

बफे बताते हैं कि किसी बिजनेस के मालिक बनने और सिर्फ उसके टिकर सिंबल को ट्रेड करने में जमीन-आसमान का फर्क होता है. उनका कहना था कि ज्यादातर प्रोफेशनल्स इस बात पर ज्यादा ध्यान देते हैं कि अगले एक-दो साल में किसी शेयर का क्या हाल होगा, और इसके लिए वे कई तरह के जटिल तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन एक सच्चे वैल्यू इन्वेस्टर के लिए कसौटी यह होनी चाहिए कि “अगर आप किसी सिक्योरिटी में अच्छा निवेश कर रहे हैं, तो आपको इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि शेयर बाजार पांच साल के लिए बंद हो जाए.” उनके अनुसार, शेयर की कीमत सिर्फ एक संकेत है, जिसे कभी-कभी ही देखना चाहिए. उनका तरीका यह है कि पहले बिजनेस की वैल्यू आंकें और फिर देखें कि बाजार की कीमत उससे कितनी अलग है.

अपनी पिच का इंतजार करें

बफे ने शेयर बाजार को एक ऐसे बेसबॉल पिचर से तुलना की जो रोज हजारों गेंदें फेंकता है. उनका कहना था, “इस व्यवसाय में कोई ‘कॉल्ड स्ट्राइक’ नहीं है. आप वहां बैठकर हजारों गेंदें जाने दे सकते हैं और फिर जब वह एक गेंद आती है जो आपकी समझ में आती है और सही जगह पड़ती है, तब आप स्विंग करते हैं.”

आज भी क्यों प्रासंगिक है यह इंटरव्यू

इस पुराने इंटरव्यू के फिर वायरल होने की वजह यही है कि यह आज के समय में भी उतना ही जरूरी लगता है. आज की दुनिया नतीजों, एल्गोरिदम, ट्रेंड और तेज ट्रेडिंग के पीछे भागती है. ऐसे समय में बफे एक बेहद सरल लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से कठिन सिद्धांत याद दिलाते हैं जैसे कि जानो कि तुम क्या समझते हो, उसका सही मूल्यांकन करो, बाजार के शोर को नजरअंदाज करो, सही मौके का धैर्य से इंतजार करो और सबसे बढ़कर—पैसा मत गंवाओ.

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