IDBI बैंक के कर्मचारियों का क्या होगा? सरकार ने बेच दी अपनी हिस्सेदारी, बैकिंग सेक्टर पर कैसा पड़ेगा प्रभाव
सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेच रहे हैं और प्रबंधन का नियंत्रण (मैनेजमेंट कंट्रोल) भी सौंप रहे हैं. इस घोषणा के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर सरकार से कर्मचारियों के कल्याण और नौकरी की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे.
Highlights
- सरकार की हिस्सेदारी 45.5 फीसदी से घटकर 15 फीसदी रह जाएगी.
- कर्मचारियों के कल्याण और नौकरी की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछा गया.
- IDBI बैंक लगातार कई वर्षों से खराब वित्तीय स्थिति से जूझ रहा था.
बुधवार, 14 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद, कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स, आर्थिक संकट से जूझ रहे IDBI बैंक में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदने जा रही है. यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये में तय हुआ है. IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री पर 2022 से काम चल रहा था. इसके तहत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेच रहे हैं और प्रबंधन का नियंत्रण (मैनेजमेंट कंट्रोल) भी सौंप रहे हैं.
कितनी बचेगी सरकार की हिस्सेदारी?
इस डील के बाद, बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 45.5 फीसदी से घटकर 15 फीसदी रह जाएगी, जबकि LIC की हिस्सेदारी 49.2 फीसदी से घटकर 19 फीसदी रह जाएगी. आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों ही संस्थाएं बोर्ड से अपने नॉमिनी (प्रतिनिधि) वापस ले लेंगी और केवल पब्लिक शेयरधारक बनकर रह जाएंगी.
IDBI बैंक के कर्मचारियों का क्या होगा?
इस घोषणा के सार्वजनिक होने के बाद, लोगों ने सोशल मीडिया पर सरकार से कर्मचारियों के कल्याण और नौकरी की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे. खासकर उन कर्मचारियों को लेकर, जो पब्लिक सेक्टर बैंक की परीक्षा के जरिए IDBI बैंक में शामिल हुए थे और अब उन्हें मालिकाना हक और प्रबंधन नियंत्रण में बदलाव का सामना करना पड़ रहा है.
ऐसे ही एक सवाल का जवाब देते हुए, वित्त मंत्रालय ने कहा कि IDBI बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री एक पारदर्शी और निष्पक्ष बोली प्रक्रिया के जरिए हुई है. इसमें कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है. सरकार ने X (पहले ट्विटर) पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘इस प्रक्रिया में कार्यरत और रिटायर्ड कर्मचारियों के हितों की भी रक्षा की गई है.’
डिटेल्स का इंतजार
मंत्रालय ने इस डील के बारे में और जानकारी देने के लिए कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) भी साझा किए. हालांकि, इन दस्तावेजों में कर्मचारियों या सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बारे में कोई जिक्र नहीं था. इस विषय पर अभी और जानकारी का इंतजार है.
IDBI कर्मचारी मंच ने किया था विरोध
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जुलाई में ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज’ ने बैंक में अपनी नियंत्रण हिस्सेदारी फेयरफैक्स को बेचने के सरकार के कदम पर गहरी चिंता जताई थी. साथ ही, उन्होंने इस बिक्री की संसदीय समीक्षा की मांग की थी. फोरम ने सरकार से आग्रह किया था कि वह इस सौदे के पूरे प्रस्ताव को सार्वजनिक करे.
वित्तीय क्षेत्र में सबसे बड़ा FDI
IDBI बैंक, जो कई वर्षों से खराब वित्तीय स्थिति से जूझ रहा था, उसे 2017 में ‘प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन’ (PCA) फ्रेमवर्क के तहत रखा गया था. दो साल बाद, LIC ने बैंक में 21,624 करोड़ रुपये का निवेश किया और इसके बदले में प्रेफरेंशियल शेयर लिए, जिससे बैंक में LIC की नियंत्रण हिस्सेदारी हो गई.
फेयरफैक्स को अभी भी RBI के सामने अपनी योग्यता साबित करनी होगी. इसके लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) चरण में किए गए ‘फिट एंड प्रॉपर’ मूल्यांकन के आधार पर प्रक्रिया पूरी करनी होगी और तय की गई नियामक शर्तों को मानने के लिए अपना रोडमैप जमा करना होगा.
सरकार ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर, यह हमारी अर्थव्यवस्था के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) होगा.
बैंकिंग सेक्टर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
सरकार के अनुसार, इसका भारत की अर्थव्यवस्था के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. निजीकरण के बाद, IDBI बैंक को फंड जुटाने के लिए सरकार की मदद पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जैसा कि पहले होता रहा है.
उम्मीद है कि रणनीतिक खरीदार इसमें निजी पूंजी लगाएगा, नई तकनीक लाएगा और बेहतर मैनेजमेंट सिस्टम अपनाएगा. इससे बैंक की व्यावसायिक क्षमता बढ़ेगी और यह क्रेडिट तथा जमा राशि (डिपॉजिट) में वृद्धि के मामले में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा.
Latest Stories
चीनी की कीमतों में उछाल से बढ़ेगा ग्राहकों का खर्च, त्योहारी सीजन में जश्न मनाना और गिफ्ट देना होगा महंगा
टाटा ग्रुप विवाद: नोएल टाटा अपने बेटे के साथ पहुंचे कोर्ट, ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन के खिलाफ याचिका दायर
13 साल की उम्र में शुरू किया कारोबार, अब कंपनी 2000 करोड़ के पार, ऐसे अमित मजीठिया बना रहे ग्लोबल पहचान
