चुनाव खत्म होते ही, क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? सरकार ने दिया साफ जवाब, अफवाहों पर लगाया ब्रेक
चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की अफवाहों पर सरकार ने विराम लगा दिया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया कि कीमत बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पैनिक बाइंग ने बाजार में चिंता जरूर बढ़ा दी है.

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही क्या आम जनता की जेब पर महंगाई की मार पड़ने वाली है? इस सवाल पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह विराम लगा दिया है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने उन तमाम अटकलों और अफवाहों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि चुनाव बाद तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं.
अफवाहों से मचा हड़कंप, 400 पंप हुए ड्राई
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा का उछाल आया है. इसके बाद सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ी कि चुनाव निपटते ही पेट्रोल-डीजल के दाम 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं. इस डर का असर जमीन पर भी दिखा:
- आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पैनिक बाइंग शुरू हो गई.
- मांग में अचानक 30-33% की वृद्धि के कारण रविवार को करीब 400 पेट्रोल पंप खाली हो गए.
- सरकार ने साफ किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें.
तेल कंपनियों को भारी चपत, फिर भी कीमतें स्थिर
भले ही सरकार दाम नहीं बढ़ा रही, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) की वित्तीय स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू बिक्री रेट के बीच का अंतर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.
- सरकारी तेल कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं.
- पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल पर 20 रुपये और डीजल पर करीब 100 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है.
- पिछले साल जो क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल था, वह इस महीने औसतन 114 डॉलर के पार चला गया है.
क्यों नहीं बढ़ रहे दाम?
भारत में पिछले चार वर्षों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं. अप्रैल 2022 के बाद से कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. सरकारी दलील यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें कम थीं, तब कंपनियों ने अच्छा मुनाफा कमाया था, जिसका इस्तेमाल अब ऊंचे दामों के असर को कम करने (Cross-subsidize) के लिए किया जा रहा है.
दिल्ली में वर्तमान दरें:
- पेट्रोल: 94.77 रुपये प्रति लीटर
- डीजल: 87.67 रुपये प्रति लीटर
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पश्चिम एशिया का तनाव और सप्लाई चेन
फरवरी में ईरान पर हुए हमलों और उसके बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुए तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है. दुनिया का 20% तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है. इसके बावजूद, भारत सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एलपीजी (LPG), एटीएफ (ATF) और अन्य ईंधनों की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रहेगी और सप्लाई चेन में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी.