विजय के पास टाइटन की 100000 करोड़ की चाबी, एक झटके में पूरे होंगे चुनावी वादे, थलापति दिखाएंगे हिम्मत !

TVK के घोषणापत्र में सबसे ज्यादा प्रचारित वादा 60 साल से कम उम्र की हर महिला मुखिया वाले परिवार को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देना है. पार्टी ने हर घर को सालाना छह मुफ्त LPG सिलेंडर और हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया है.

विजय के चुनावी वादे कैसे होंगे पूरे. Image Credit: Money9live

तमिलनाडु के 2026 के विधानसभा चुनावों में ‘तमिलगा वेट्री कझगम‘ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी. रविवार को विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु में सरकार गठन भी हो गया. अब सभी का ध्यान TVK प्रमुख विजय के चुनावी वादों पर टिक गया है. पार्टी ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं के कल्याण, रोजगार, खेती-बाड़ी, मछली पालन, शिक्षा और शासन-प्रशासन से जुड़े कई वादे किए.

TVK के घोषणापत्र में सबसे ज्यादा प्रचारित वादा 60 साल से कम उम्र की हर महिला मुखिया वाले परिवार को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देना है. पार्टी ने हर घर को सालाना छह मुफ्त LPG सिलेंडर और हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया है. शादियों के लिए TVK ने उन परिवारों की दुल्हनों को 8 ग्राम सोना और एक अच्छी क्वालिटी की सिल्क साड़ी देने का वादा किया है, जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये से कम है. विजय अपने वादे को जमीन पर उतारने के लिए कौन सा तरीका अपनाते हैं, इसपर नजरें टिकी हैं.

तमिलनाडु पर कर्ज

विजय के सामने अपने किए वादे को पूरा के करने के लिए राज्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटना होगा, क्योंकि तमिलनाडु पर पहले से ही भारी-भरकम कर्ज है. तमिलनाडु का बकाया कर्ज, यानी वह कुल रकम जो राज्य सरकार को किसी खास समय पर उधार देने वालों को चुकानी होती है- 2016-17 से 2026-27 (अप्रैल-मार्च) के बीच लगभग चार गुना बढ़कर 2.8 लाख करोड़ रुपये से 10.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इस दौरान कर्ज का कुल स्टॉक भी राज्य के ग्रॉस घरेलू उत्पाद (GDP) के 21.8% से बढ़कर 26.1% हो गया है.

विजय के पास टाइटन का ऑप्शन

विजय के सामने चुनावी वादे को पूरे करने के लिए कई सारे विकल्प मौजूद हो सकते हैं. लेकिन एक ऑप्शन जो निकलकर सामने आया है, उसका जिक्र अब तक बेहद ही कम हुआ है. दरअसल, तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (TIDCO), राज्य सरकार के मालिकाना हक वाली इस इंडस्ट्रियल प्रमोशन एजेंसी की Titan Company Ltd. में 27.88 फीसदी हिस्सेदारी है.

यह Tata Group की होल्डिंग कंपनी और उसकी अलग-अलग सब्सिडियरी कंपनियों की कुल 25.02 फीसदी हिस्सेदारी से भी अधिक है. इस वजह से TIDCO, Titan का मुख्य प्रमोटर बन जाता है. Titan की स्थापना 1984 में तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा पर होसुर में क्वार्ट्ज़ एनालॉग घड़ियों के निर्माण के लिए एक जॉइंट वेंचर के तौर पर की गई थी.

टाइटन कंपनी का बिजनेस

कंपनी, जिसका मूल नाम Titan Watches Ltd था, आज एक जानी-मानी लाइफस्टाइल एक्सेसरीज बनाने वाली कंपनी बन गई है. इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में घड़ियां और वियरेबल्स (Titan, Fastrack और Sonata ब्रांड), ज्वेलरी (Tanishq और CaratLane), आईकेयर, महिलाओं के बैग (IRTH) और एथनिक वियर (Taneira साड़ियां और टॉप) शामिल हैं. पूरे FY26 में, Titan ने 76,078 करोड़ रुपये की कुल आय दर्ज की, जो पिछले साल के मुकाबले 38 फीसदी ज्यादा है. प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 52 फीसदी बढ़कर 5,073 करोड़ रुपये हो गया.

तमिलनाडु के कर्ज से टाइटन का क्या लेना-देना?

अब, इसका तमिलनाडु के कर्ज की समस्याओं से क्या लेना-देना है, इसका जवाब भी समझ लेते हैं. इसका जवाब Titan Company के शेयरों की मार्केट वैल्यू में छिपी है. 6 मई को शेयर के बंद होने के समय के ट्रेडिंग प्राइस के हिसाब से, इसकी वैल्यू 3,86,919 करोड़ रुपये थी. इस हिसाब से Titan में TIDCO की 27.88 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू 1,07,873 करोड़ रुपये होगी.

1 लाख करोड़ की रकम

सीधे शब्दों में कहें तो, अगर TIDCO, Titan Company में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दे, तो तमिलनाडु सरकार 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटा पाएगी और अपने बकाया कर्ज को लगभग दसवें हिस्से तक कम कर पाएगी. इससे ब्याज चुकाने में होने वाली सालाना बचत, उस 272 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा होगी, जो TIDCO को 2024-25 के लिए Titan Company में अपनी 27.88 फीसदी हिस्सेदारी से डिविडेंड (Dividend) के तौर पर मिले थे.

Titan में TIDCO की हिस्सेदारी की बिक्री, आय का एक ऐसा ही नया जरिया साबित हो सकती है. इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल सरकारी कर्ज चुकाने के लिए किया जा सकता है, जिससे सरकार पर हर साल पड़ने वाले ब्याज का बोझ कम हो जाएगा. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि अनुसंधान और खेती के विस्तार, और खास कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए सरकार के पास ज्यादा पैसा उपलब्ध हो पाएगा.

27 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए नियम

शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी में 27 फीसदी की बड़ी हिस्सेदारी बेचने के लिए SEBI के नियमों का पालन करना होगा. नियमों के अनुसार अगर कोई 25 फीसदी या उससे अधिक की हिस्सेदारी किसी नए खरीदार को ट्रांसफर कर रहे हैं, तो खरीदार को आम जनता (Public Shareholders) के लिए एक ओपन ऑफर लाना होगा. यह ओपन ऑफर कम से कम 26 फीसदी अतिरिक्त शेयर खरीदने के लिए होना चाहिए. ओपन ऑफर के लिए सेबी द्वारा निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार कीमत तय करनी होगी.

इतनी बड़ी हिस्सेदारी की कैसे होती है सेलिंग?

ब्लॉक डील (Block Deal): स्टॉक एक्सचेंज की स्पेशल विंडो के माध्यम से एकमुश्त 27 फीसदी हिस्सा एक या अधिक खरीदारों को बेचा जा सकता है.

ऑफ-मार्केट ट्रांसफर (Off-Market Transfer): अगर यह शेयर किसी एक रणनीतिक खरीदार को बेचे जा रहे हैं, तो यह सीधे ट्रांसफर हो सकता है, लेकिन इसके लिए भी सेबी को पूर्व सूचना और SAST नियमों का पालन करना होगा.

ऑफर फॉर सेल (OFS): प्रमोटर्स स्टॉक एक्सचेंज के OFS मैकेनिज्म का उपयोग करके भी हिस्सेदारी बेच सकते हैं.

अगर प्रमोटर्स हैं तो इस तरह बिकती है हिस्सेदारी

अगर प्रमोटर हिस्सेदारी बेच रहे हैं, तो शेयर बेचने से पहले आपको ‘ट्रेडिंग विंडो’ बंद होने और ‘प्री-क्लीयरेंस’ जैसे नियमों का पालन करना होगा. अगर शेयर हाल ही में लिस्ट हुए हैं और उन पर कोई लॉक-इन है, तो उन्हें तब तक नहीं बेचा जा सकता जब तक वह अवधि समाप्त न हो जाए.

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