Mutual Fund schemes: आपके पोर्टफोलियो में Small Cap की भरमार तो नहीं?
क्या आपका पोर्टफोलियो सिर्फ एक दिशा में झुका हुआ है और उसमें Small Cap फंड्स की जरूरत से ज्यादा हिस्सेदारी हो गई है? वीडियो में यह समझाने की कोशिश की गई है कि केवल ज्यादा रिटर्न के लालच में Small Cap स्कीम्स में जरूरत से ज्यादा निवेश करना लंबे समय में जोखिम भरा साबित हो सकता है. इसमें बताया गया है कि स्मार्ट निवेश का मतलब सिर्फ रिटर्न देखना नहीं, बल्कि सही एसेट एलोकेशन और डायवर्सिफिकेशन भी उतना ही जरूरी है. SIP के जरिए नियमित निवेश कैसे करें, उसमें Step-Up का इस्तेमाल कर अपनी इनकम के साथ निवेश कैसे बढ़ाया जाए, और अलग-अलग कैटेगरी जैसे Large Cap, Mid Cap, Small Cap, Flexi Cap और सेक्टोरल फंड्स के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, इन सभी पहलुओं पर फोकस किया गया है.
वीडियो यह भी समझाता है कि हर निवेशक का गोल, रिस्क प्रोफाइल और टाइम होराइजन अलग होता है, इसलिए एक जैसी स्ट्रैटेजी सब पर लागू नहीं हो सकती. सही स्कीम का चुनाव, पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा और जरूरत पड़ने पर री-बैलेंसिंग करना ही लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन की मजबूत नींव बनाता है.
