Mutual Fund और PMS निवेशकों के लिए नया प्लान; SEBI ला सकता है बड़ा बदलाव, जानें डिटेल

Securities and Exchange Board of India PMS फ्रेमवर्क की व्यापक समीक्षा कर रहा है और इसके लिए उद्योग संगठन Association of Portfolio Managers in India के साथ चर्चा जारी है. सेबी म्यूचुअल फंड में गिफ्टिंग, डोनेशन और थर्ड पार्टी पेमेंट नियमों को आसान बनाने पर भी विचार कर रहा है.

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SEBI PMS Review: शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. SEBI अब पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस यानी PMS फ्रेमवर्क की व्यापक समीक्षा कर रहा है. सेबी का मकसद इस सेक्टर में दोबारा तेजी लाना और निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाना है. इसके साथ ही म्यूचुअल फंड में गिफ्टिंग, डोनेशन और थर्ड पार्टी पेमेंट से जुड़े नियमों पर भी विचार किया जा रहा है. सेबी जल्द ही इस संबंध में नया कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा. बाजार रेगुलेटर निवेशकों की सुविधा और मनी लांड्रिंग रोकने के नियमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.

PMS फ्रेमवर्क की होगी समीक्षा

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI के सदस्य Amarjeet Singh ने कहा कि सेबी PMS सेक्टर की पूरी समीक्षा कर रहा है. इसके लिए Association of Portfolio Managers in India के साथ चर्चा चल रही है. उनका कहना है कि इस कदम का मकसद PMS कारोबार में नई तेजी लाना है. सेबी जल्द ही इस विषय पर कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा. इससे निवेशकों और पोर्टफोलियो मैनेजर्स को नए सुझाव देने का मौका मिलेगा.

म्यूचुअल फंड गिफ्टिंग पर चर्चा

सेबी इस समय म्यूचुअल फंड में गिफ्टिंग, डोनेशन और थर्ड पार्टी पेमेंट से जुड़े नियमों पर भी विचार कर रहा है. रेगुलेटर का कहना है कि निवेशकों को सुविधा देने के साथ साथ मनी लांड्रिंग जैसे रिस्क को भी रोकना जरूरी है. 20 मई को जारी कंसल्टेशन पेपर में कुछ नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. सेबी ने कहा कि केवल साफ और ऑडिट योग्य माध्यमों से थर्ड पार्टी पेमेंट की अनुमति दी जा सकती है. इससे निवेश प्रक्रिया अधिक आसान हो सकती है.

कर्मचारियों के वेतन से होगा निवेश

नए प्रस्ताव के तहत लिस्टेड कंपनियां और ईपीएफओ से जुड़ी कंपनियां कर्मचारियों के वेतन से निश्चित रकम काटकर म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगी. कर्मचारी अपनी पसंद की स्कीम चुन सकेंगे. इसके अलावा एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन म्यूचुअल फंड यूनिट के रूप में देने की अनुमति मिल सकती है. अभी तक यह भुगतान नकद में किया जाता है. सेबी का मानना है कि इससे निवेश प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और डिजिटल ट्रैकिंग आसान होगी.

निवेशकों की सुरक्षा पर रहेगा फोकस

सेबी ने प्रस्तावित नियमों में कई सुरक्षा उपाय भी शामिल किए हैं. रेगुलेटर के अनुसार रिडेम्पशन राशि और डिविडेंड केवल सत्यापित बैंक खाते में ही भेजे जाएंगे. इससे किसी भी प्रकार की थर्ड पार्टी कैश निकासी को रोका जा सकेगा. सेबी ने कहा कि निवेशकों और डिस्ट्रीब्यूटर दोनों के हितों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है. रेगुलेटर ने इस कंसल्टेशन पेपर पर 10 जून तक आम लोगों से सुझाव मांगे हैं.

म्यूचुअल फंड से हो सकेगा डोनेशन

सेबी म्यूचुअल फंड के जरिये चैरिटी डोनेशन की सुविधा पर भी काम कर रहा है. प्रस्ताव के अनुसार निवेशक अपनी निवेश राशि, डिविडेंड या रिडेम्पशन राशि का एक हिस्सा सीधे गैर लाभकारी संस्थाओं को दे सकेंगे. यह राशि सोशल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों तक पहुंचाई जा सकती है. इसके लिए अलग सामाजिक योजनाएं शुरू की जा सकती हैं या मौजूदा योजनाओं में डोनेशन फीचर जोड़ा जा सकता है.

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विदेशी निवेशकों के लिए आसान होंगे नियम

भारतीय बाजार से लगातार विदेशी निवेश निकासी के बीच सेबी नियमों को आसान बनाने पर भी काम कर रहा है. जनवरी से मई 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर मार्केट से 2.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है. सेबी का कहना है कि कई नियामक मिलकर विदेशी निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. इसके अलावा Association of Mutual Funds in India के साथ मिलकर एक साझा मंच तैयार करने पर भी चर्चा हो रही है, जहां निवेशक अपनी शिकायतें और सवाल सीधे उठा सकेंगे.