रुपये में उतार-चढ़ाव पर सरकार की नजर, लेकिन नहीं होगा सीधा दखल; पीयूष गोयल का बड़ा बयान

Piyush Goyal ने कहा है कि सरकार रुपये की एक्सचेंज रेट में हस्तक्षेप नहीं करती और यह पूरी तरह बाजार की ताकतों तथा वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करती है. हाल के दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है, लेकिन इस साल यह एशिया की कमजोर उभरती मुद्राओं में शामिल रहा.

Piyush Goyal ने कहा है कि सरकार रुपये की एक्सचेंज रेट में हस्तक्षेप नहीं करती है. Image Credit: tv9 bharatvarsh

Piyush Goyal Statement: भारतीय रुपये में लगातार उतार- चढ़ाव के बीच सेंट्रल कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने शनिवार को बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि सरकार एक्सचेंज रेट में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करती है. रुपये की कीमत बाजार की ताकतों और वैश्विक परिस्थितियों से तय होती है. हालांकि सरकार निर्यात बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने और भारत में निवेश बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रही है. हाल के दिनों में रुपये में आई कमजोरी को लेकर निवेशकों और कारोबार जगत में चिंता बनी हुई है.

सरकार एक्सचेंज रेट में नहीं करती दखल

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, Piyush Goyal ने कहा कि सरकार रुपये की एक्सचेंज को कंट्रोल नहीं करती. यह पूरी तरह बाजार की स्थिति और वैश्विक कारकों पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि पिछले दो तीन दिनों में रुपया फिर मजबूत हुआ है. ऐसे उतार- चढ़ाव बाजार का हिस्सा हैं. सरकार केवल आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने और निवेश बढ़ाने पर ध्यान दे रही है. उनका बयान ऐसे समय आया है जब रुपये में लगातार कमजोरी को लेकर बहस तेज है.

दो दिन लगातार मजबूत हुआ रुपया

शुक्रवार को रुपया लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूत होकर बंद हुआ. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.60 के स्तर पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप को इसकी बड़ी वजह माना गया. बाजार जानकारों का कहना है कि डॉलर में नरमी आने पर रुपये को कुछ राहत मिली है. हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बाजार में दबाव अभी भी बना हुआ है.

यह भी पढ़ें- देश में बनेंगे 100 प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आधारित इंडस्ट्रियल पार्क, केंद्र ने लॉन्च की BHAVYA स्कीम; ₹33660 करोड़ होंगे खर्च

रुपये की गिरावट बनी चिंता

इस साल रुपया एशिया की कमजोर उभरती मुद्राओं में शामिल हो गया है. महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेश निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और मजबूत डॉलर ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है. कारोबारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है. लगातार गिरते रुपये का असर आयात लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है.

सरकार निर्यात बढ़ाने पर कर रही फोकस

सरकार का कहना है कि वह निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है. Piyush Goyal ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते पूरे किए हैं. इसके अलावा सरकार आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी काम कर रही है. सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए कई उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है.