मात्र 20 हजार का करें निवेश, 8-4-3 के इस आसान गणित से बनें करोड़पति
Mutual Fund: 8-4-3 नियम पहले से ही आजमाया हुआ एक तरीका है, जो निवेशकों को उनके म्यूचुअल फंड निवेश की संभावित बढ़ोतरी को समझने में मदद करता है. यह नियम कंपाउंड इंट्रेस्ट के सिद्धांत पर काम करता है.
म्यूचुअल फंड में निवेश कर कुछ सालों में करोड़पति बनने का सपना देखने वालों को बस बेसिक नियमों की समझ होनी चाहिए. अगर उन्हें वह समझ मिल जाए तो करोड़पति बनने से कोई रोक सकता. अगर आपकी सैलेरी 50,000 रुपये भी है तो भी ऐसा करना संभव है. दरअसल कंपाउंडिंग है ही ऐसी चीज जो नामुमकिन को मुमकिन बना सकती है. आपको 15 सालों में का टारगेट लेकर चलना है और अनुशासन रखना है. ये नियम है 8-4-3 का नियम, चलिए आपको इसकी ताकत बताते हैं?
क्या है 8-4-3 नियम?
8-4-3 नियम पहले से ही आजमाया हुआ एक तरीका है, जो निवेशकों को उनके म्यूचुअल फंड निवेश की संभावित बढ़ोतरी को समझने में मदद करता है. यह नियम कंपाउंड इंट्रेस्ट के सिद्धांत पर काम करता है.
इस नियम के अनुसार:
- यदि आप ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं जो सालाना 12% रिटर्न देता है, तो आपका निवेश 8 साल में दोगुना हो जाएगा.
- अगले 4 साल में यह फिर से दोगुना होगा.
- इसके बाद अगले 3 साल में यह तीसरी बार फिर दोगुना होगा.
15 साल में आपका निवेश 4 गुना हो जाएगा और 21 साल में यह निवेश 8 गुना तक बढ़ सकता है. यह नियम दिखाता है कि समय के साथ कंपाउंड इंट्रेस्ट आपके पैसे को कितनी तेजी से बढ़ा सकता है.
कंपाउंडिंग की ताकत
कंपाउंड इंट्रेस्ट वह प्रक्रिया है, जिसमें आपके मूलधन और उस पर मिलने वाले ब्याज पर भी ब्याज मिलता है. यह आपके पैसे को तेजी से बढ़ने की ताकत देता है.
एक उदाहरण से समझाते हैं:
मान लीजिए किसी व्यक्ति की सैलरी 50,000 रुपये प्रति माह है. वह अपनी सैलरी का 40% यानी 20,000 रुपये हर महीने एक ऐसी योजना में निवेश करता है, जहां उसे 12% सालाना ब्याज मिल जाता है. तो,
- पहले 8 साल: निवेश की वैल्यू 32 लाख होगी.
- अगले 4 साल: निवेश की वैल्यू दोगुनी होकर 64 लाख हो जाएगी.
- अगले 3 साल: निवेश की कुल वैल्यू 1 करोड़ तक पहुंच सकती है.
निवेश जारी रखने और समय देने से आपका पैसा तेजी से बढ़ता है. लंबी अवधि में निवेश करने पर कंपाउंडिंग का जादू सबसे अधिक प्रभाव डालता है.
डिसक्लेमर: किसी भी प्रकार के निवेश (जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, एफडी, गोल्ड आदि) से पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह लें. निवेश का उद्देश्य और समय सीमा स्पष्ट रखें. सही स्कीम चुनने के लिए संभावित जोखिम और रिटर्न को समझें.
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