PF से घर खरीदना हुआ आसान, 75% तक निकाल सकेंगे पैसा, EPFO ने बदले नियम

EPFO ने PF से घर से जुडी जरूरतों के लिए निकासी के नियमों में बदलाव किया है. अब पात्र PF बैलेंस में कर्मचारी का कंट्रीब्यूशन, नियोक्ता का कंट्रीब्यूशन और दोनों पर मिला ब्याज शामिल होगा. सदस्य घर बनाने, घर या प्लाट खरीदने, होम लोन चुकाने और घर की मरम्मत के लिए PF निकाल सकते हैं. पात्र PF बैलेंस का अधिकतम 75 फीसदी तक निकाला जा सकता है.

EPFO ने PF से घर से जुड़ी जरूरतों के लिए निकासी के नियम बदले हैं.

Highlights

  • EPFO ने PF से घर से जुड़ी जरूरतों के लिए निकासी के नियम बदले हैं.
  • पात्र PF बैलेंस का 75 फीसदी तक घर खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के लिए निकाल सकते हैं.
  • PF निकासी के लिए 12 महीने की EPF सदस्यता जरूरी होगी और पूरी सदस्यता अवधि में अधिकतम 5 बार निकासी की जा सकेगी.

EPFO ने PF से घर से जुड़ी जरूरतों के लिए पैसा निकालने के नियमों में बदलाव किया है. नए नियम के तहत PF से निकासी के लिए पात्र रकम तय करने का तरीका बदला गया है. अब इसमें कर्मचारी के कंट्रीब्यूशन के साथ नियोक्ता का कंट्रीब्यूशन और दोनों पर मिला ब्याज भी शामिल होगा. पात्र सदस्य घर बनाने, घर या प्लाट खरीदने और होम लोन चुकाने के लिए PF का इस्तेमाल कर सकते हैं. घर की मरम्मत, बदलाव या विस्तार के लिए भी इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि PF निकासी की अधिकतम लिमिट और सदस्यता से जुड़ी शर्तों को समझना जरूरी है.

PF निकासी में अब दोनों का कंट्रीब्यूशन शामिल

नए EPFO नियमों में PF से घर के लिए निकासी की कैलकुलेशन में बदलाव किया गया है. पहले इस तरह की निकासी में कर्मचारी के अपने कंट्रीब्यूशन को आधार माना जाता था. अब पात्र रकम में कर्मचारी का कंट्रीब्यूशन और नियोक्ता का कंट्रीब्यूशन दोनों शामिल होंगे. इसके साथ ही दोनों कंट्रीब्यूशन पर मिला ब्याज भी पात्र रकम का हिस्सा होगा. इससे घर से जुड़ी जरूरत के लिए PF से उपलब्ध होने वाली रकम पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकती है.

घर खरीदने से लेकर मरम्मत तक PF का इस्तेमाल

EPFO की हाउसिंग निकासी सुविधा का इस्तेमाल कई तरह की जरूरतों के लिए किया जा सकता है. इसके तहत नया घर बनाने के लिए PF से रकम निकाली जा सकती है. घर, फ्लैट या जमीन का प्लाट खरीदने के लिए भी इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा मौजूदा होम लोन को चुकाने के लिए PF से पैसा निकाला जा सकता है. अपने घर या फ्लैट की मरम्मत, बदलाव या विस्तार के लिए भी PF निकासी की जा सकती है.

75 फीसदी रकम निकाल सकेंगे

नए नियम के तहत पात्र PF बैलेंस का अधिकतम 75 फीसदी तक निकाला जा सकता है. पात्र बैलेंस में कर्मचारी और नियोक्ता का कंट्रीब्यूशन तथा दोनों पर मिला ब्याज शामिल होगा. उदाहरण के तौर पर अगर पात्र PF बैलेंस 20 लाख रुपये है तो अधिकतम 15 लाख रुपये तक निकाले जा सकते हैं. बाकी 5 लाख रुपये PF खाते में रहेंगे. हालांकि 75 फीसदी केवल अधिकतम सीमा है और वास्तविक निकासी इससे कम भी हो सकती है.

12 महीने की EPF सदस्यता जरूरी

घर से जुड़ी इस PF निकासी सुविधा का फायदा लेने के लिए EPF सदस्यता कम से कम 12 महीने पूरी होना जरूरी है. पहले अलग-अलग हाउसिंग जरूरतों के लिए सदस्यता अवधि और निकासी की शर्तें अलग हो सकती थीं. साथ ही निकासी की रकम कुछ अन्य शर्तों से भी जुड़ी होती थी. नए नियमों में 12 महीने की सदस्यता को आधार बनाया गया है. हालांकि वास्तविक निकासी संबंधित उद्देश्य और लागू शर्तों के अनुसार तय होगी.

PF से पांच बार निकासी की सीमा

EPF सदस्य अपने पूरे सदस्यता काल में घर से जुड़ी जरूरतों के लिए अधिकतम पांच बार PF निकासी कर सकता है. इसमें घर खरीदना, होम लोन चुकाना और घर की मरम्मत जैसी जरूरतें शामिल हैं. इसलिए सदस्य को PF निकासी की संख्या का ध्यान रखना जरूरी है. हर बार रकम निकालने से खाते में बचा PF बैलेंस कम होगा. इससे भविष्य में घर से जुड़ी जरूरतों के लिए उपलब्ध रकम भी कम हो सकती है.

PF निकासी के लिए जरूरी दस्तावेज

घर से जुड़ी PF निकासी के लिए कुछ डॉक्यूमेंट भी जरूरी होंगे. इनमें UAN से जुड़ा आधार और PF कंट्रीब्यूशन प्रमाण पत्र शामिल है. प्रॉपर्टी खरीदने के लिए प्रॉपर्टी खरीद समझौता या अलॉटमेंट लेटर देना होगा. होम लोन की EMI के लिए EMI पेमेंट अथॉरिटी लेटर की जरूरत होगी. इसके अलावा कंपोजिट क्लेमम फॉर्म भी जरूरी डॉक्यूमेंट में शामिल है. आवेदन से पहले अपने मामले पर लागू ताजा EPFO निर्देशों की जांच करना जरूरी है.

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PF निकासी पर पांच बार की सीमा लागू नहीं

EPFO में घर के अलावा दूसरी जरूरतों के लिए भी PF निकासी की सुविधा है. इसमें खुद या परिवार के इलाज, बच्चों या खुद की शिक्षा और शादी जैसे खर्च शामिल हैं. इन सभी जरूरतों के लिए अलग नियम और निकासी की लिमिट होती है. घर के लिए तय पांच बार की निकासी सीमा इन दूसरी कैटेगरी पर लागू नहीं होती है. इसलिए अलग-अलग जरूरतों के लिए लागू नियमों को अलग से समझना जरूरी है.