KVP और NSC पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल है या नहीं? ITR में कैसे करें रिपोर्ट, समझें पूरा नियम

Kisan Vikas Patra (KVP) और National Savings Certificate (NSC) दोनों सरकार की बचत योजनाएं हैं. इन पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है, लेकिन दोनों के टैक्स नियम अलग-अलग हैं. ITR भरते समय ब्याज को 'Income from Other Sources' के तहत दिखाना होता है. जानिए NSC और KVP पर टैक्स और रिपोर्टिंग के पूरे नियम.

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ITR Filing: Kisan Vikas Patra (KVP) और National Savings Certificate (NSC) सरकार की सबसे पॉपुलर स्मॉल सेविंग्स स्कीमों में शामिल हैं. दोनों योजनाएं करीब-करीब तय रिटर्न देती हैं, लेकिन इनसे मिलने वाले ब्याज पर टैक्स के नियम अलग-अलग हैं. ऐसे में इन योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए यह जानना जरूरी है कि ब्याज पर टैक्स कैसे लगेगा और आयकर रिटर्न (ITR) में इसे किस तरह दिखाना होगा.

किन योजनाओं पर मिलता है Section 80C का फायदा?

पुरानी टैक्स व्यवस्था में कुछ स्मॉल सेविंग्स स्कीमों में निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिल सकती है. इसमें Public Provident Fund (PPF), Sukanya Samriddhi Yojana (SSY), National Savings Certificate (NSC), Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS) और 5 साल की Post Office Time Deposit शामिल हैं. हालांकि, इन सभी योजनाओं का टैक्स ट्रीटमेंट एक जैसा नहीं है.

PPF और SSY में सबसे ज्यादा टैक्स लाभ

PPF और SSY में निवेश पर धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है. इसके अलावा इन योजनाओं से मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की रकम भी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है. वहीं, NSC, SCSS और 5 साल की पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट में निवेश पर धारा 80C के तहत छूट तो मिलती है, लेकिन इनसे मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है.

KVP पर Section 80C का फायदा नहीं

Kisan Vikas Patra (KVP), Post Office Monthly Income Scheme (POMIS), Post Office Recurring Deposit (RD) और 1, 2 या 3 साल की Post Office Time Deposit में निवेश पर धारा 80C के तहत कोई टैक्स छूट नहीं मिलती.

ITR में NSC और KVP का ब्याज कैसे दिखाएं?

NSC और KVP दोनों से मिलने वाले ब्याज को आयकर रिटर्न में Income from Other Sources’ के तहत दिखाना होता है. टैक्सपेयर्स ब्याज को हर साल अर्जित होने के आधार पर या ब्याज मिलने के समय पर दिखा सकते हैं. हालांकि, एक बार जो तरीका चुना जाए, उसे हर साल लगातार अपनाना जरूरी है.

KVP और NSC दोनों के ब्याज पर टैक्स लगता है. टैक्सपेयर्स ब्याज को Accrual Basis या Receipt Basis में से किसी भी तरीके से दिखा सकते हैं, लेकिन चुनी गई पद्धति को हर साल एक समान रखना होगा.

NSC और KVP के टैक्स नियमों में क्या अंतर है?

NSC पर हर साल मिलने वाला ब्याज (मैच्योरिटी वाले साल को छोड़कर) दोबारा निवेश माना जाता है. इसलिए इसे धारा 80C के तहत, कुल 1.5 लाख रुपये की सीमा के भीतर, टैक्स छूट के लिए भी दावा किया जा सकता है. हालांकि, मैच्योरिटी वाले अंतिम साल का ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है और उस पर धारा 80C का लाभ नहीं मिलता.

वहीं, Kisan Vikas Patra (KVP) के मामले में हर साल मिलने वाला पूरा ब्याज टैक्सेबल होता है और इस पर धारा 80C के तहत कोई अतिरिक्त छूट नहीं मिलती.

AIS से जरूर मिलान करें

ITR दाखिल करने से पहले टैक्सपेयर को अपने Annual Information Statement (AIS) में दर्ज ब्याज की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. यह सुनिश्चित करें कि AIS में दर्ज ब्याज और आपके रिकॉर्ड में कोई अंतर न हो, ताकि रिटर्न दाखिल करते समय किसी तरह का मिसमैच न हो.

जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए ब्याज दरें

सरकार हर तिमाही स्मॉल सेविंग्स स्कीमों की ब्याज दरों की समीक्षा करती है. जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए 30 जून 2026 को ब्याज दरों की घोषणा की गई थी और इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया. इसके तहत Kisan Vikas Patra पर 7.5 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है और निवेश 115 महीने में मैच्योर होता है. वहीं, National Savings Certificate (NSC) पर 7.7 फीसदी सालाना ब्याज मिलता रहेगा.

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