ITR-3 और ITR-4 की डेडलाइन नजदीक, चूके तो लगेगी ₹5,000 तक लेट फीस, जानें पूरे नियम
ITR-3 और ITR- 4 फाइल करने वाले पात्र नॉन ऑडिट टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त 2026 अहम डेडलाइन है. इस तारीख तक रिटर्न नहीं भरने पर 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न फाइल किया जा सकता है. देर से रिटर्न दाखिल करने पर 1000 से 5000 रुपये तक लेट फीस और बकाया टैक्स पर ब्याज लग सकता है. साथ ही कुछ बिजनेस और कैपिटल लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ भी नहीं मिल सकता है.

बिजनेस, प्रोफेशन और फ्रीलांसिंग से कमाई करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए ITR 3 और ITR- 4 दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक है. FY 2025-26 और AY 2026-27 के लिए पात्र नॉन ऑडिट टैक्सपेयर्स 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं. डेडलाइन चूकने पर टैक्सपेयर्स को लेट फीस और ब्याज का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा कुछ तरह के नुकसान को आगे के वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी नहीं मिल सकता है. आइए जानते हैं ITR-3 और ITR- 4 किसे भरना है और 31 अगस्त की डेडलाइन चूकने पर क्या होगा.
ITR 4 में AY2026-27 के लिए क्या बदला
AY 2026-27 के लिए ITR 4 में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. पात्र टैक्सपेयर्स अब दो हाउस प्रॉपर्टी तक की इनकम की जानकारी दे सकते हैं. फॉर्म में अनरियलाइज्ड रेंट की जानकारी देने के लिए अलग फील्ड भी जोड़ी गई है. पात्र टैक्सपेयर्स सेक्शन 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की जानकारी भी दे सकते हैं. कुछ मामलों में फॉरेन रिटायरमेंट बेनिफिट से जुड़ी डिस्क्लोजर की जरूरत को भी हटाया गया है. हालांकि ITR 4 भरने से पहले सभी पात्रता शर्तों को ध्यान से जांचना जरूरी है.
डेडलाइन चूकने पर कितनी फीस लगेगी
अगर पात्र नॉन ऑडिट टैक्सपेयर्स 31 अगस्त 2026 तक ITR 3 या ITR 4 फाइल नहीं कर पाते हैं, तो वे बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं. AY 2026-27 के लिए बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 है या असेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो. सेक्शन 234F के तहत टोटल इनकम 5 लाख रुपये तक होने पर 1000 रुपये की लेट फीस लग सकती है. टोटल इनकम 5 लाख रुपये से अधिक होने पर 5000 रुपये की फीस लग सकती है. इसके अलावा टैक्स बकाया होने पर सेक्शन 234A के तहत 1 फीसदी प्रति माह या उसके हिस्से के हिसाब से ब्याज भी लग सकता है.
देरी से ITR भरने के दूसरे नुकसान
रिटर्न देर से फाइल करने पर केवल लेट फीस और ब्याज ही नहीं लगता है. जिन टैक्सपेयर्स को रिफंड मिलना है, उनके रिफंड की प्रोसेसिंग में भी देरी हो सकती है. डेडलाइन के बाद रिटर्न भरने पर कुछ बिजनेस और कैपिटल लॉस को आगे के वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा नहीं मिल सकता है. हालांकि कुछ नुकसान इसके अपवाद हो सकते हैं. इसलिए जिन लोगों को कैरी फॉरवर्ड का फायदा लेना है, उनके लिए तय समय के भीतर रिटर्न फाइल करना खास तौर पर जरूरी है.
ITR U का विकल्प
अगर ITR 3 या ITR 4 फाइल करने के बाद कोई गलती या जानकारी छूट जाती है, तो शर्तों के तहत रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकता है. AY 2026-27 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न की अंतिम तारीख 31 मार्च 2027 है. 1 जनवरी 2027 से रिवाइज्ड रिटर्न से जुडे कुछ मामलों में नए सेक्शन 234I के तहत फीस के प्रावधान लागू हो सकते हैं. अगर कोई टैक्सपेयर ओरिजिनल और बिलेटेड दोनों डेडलाइन चूक जाता है, तो पात्रता के आधार पर ITR U का विकल्प मिल सकता है. AY 2026 27 के लिए अपडेटेड रिटर्न आमतौर पर 31 मार्च 2031 तक फाइल किया जा सकता है, लेकिन इसमें अतिरिक्त टैक्स देनदारी हो सकती है.
टैक्स रिजीम पर भी देना होगा ध्यान
FY 2025-26 के लिए नई टैक्स रिजीम डिफॉल्ट व्यवस्था है. बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम वाले जो टैक्सपेयर पुरानी टैक्स रिजीम चुनना चाहते हैं, उन्हें तय नियमों के अनुसार Form 10 IEA के जरिए विकल्प चुनना होगा. इसलिए ITR फाइल करने से पहले अपनी टैक्स रिजीम तय करना जरूरी है. टैक्सपेयर्स को PAN, Aadhaar, बैंक स्टेटमेंट, AIS, TIS, TDS सर्टिफिकेट और बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम की जानकारी तैयार रखनी चाहिए. समय पर सही जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करने से लेट फीस और अन्य परेशानी से बचा जा सकता है.