शेयर बाजार में हुआ नुकसान, क्या सैलरी से घटाकर बचा सकते हैं टैक्स? ITR भरने से पहले जानें नियम

नौकरी के साथ शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए ITR भरते समय नुकसान को सही तरीके से दिखाना जरूरी है. इंट्राडे ट्रेडिंग का नुकसान सिर्फ सट्टा कारोबार की आय के साथ एडजस्ट किया जा सकता है. F&O में हुआ नुकसान भी सैलरी की आय से एडजस्ट नहीं होगा. वहीं, निवेश के तौर पर शेयरों में हुआ नुकसान कैपिटल गेन से जुड़े नियमों के अनुसार ही एडजस्ट किया जा सकता है.

आईटीआर

Highlights

  • इंट्राडे ट्रेडिंग में हुआ नुकसान सैलरी की आय से एडजस्ट नहीं किया जा सकता.
  • F&O से हुआ नुकसान भी टैक्सेबल सैलरी की आय से सीधे एडजस्ट नहीं होगा.
  • निवेश के तौर पर शेयरों में हुआ नुकसान कैपिटल गेन से जुड़े नियमों के तहत ही एडजस्ट किया जा सकता है.

अगर आप नौकरी के साथ शेयर बाजार में F&O और इंट्राडे ट्रेडिंग भी करते हैं और इसमें नुकसान हुआ है, तो ITR भरते समय एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या इस नुकसान को सैलरी की कमाई से एडजस्ट किया जा सकता है. इसका जवाब सीधे तौर पर नहीं है. आयकर नियमों के तहत शेयर बाजार के अलग-अलग तरह के नुकसान के लिए अलग नियम हैं.

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर बाजार से होने वाली इनकम और नुकसान को लेनदेन की प्रकृति के आधार पर देखा जाता है. अगर लेनदेन निवेश के तौर पर किया गया है तो इसे कैपिटल गेन के दायरे में रखा जा सकता है, जबकि ट्रेडिंग या बिजनेस गतिविधि के तौर पर किए गए लेनदेन को बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली इनकम के तहत माना जा सकता है.

इंट्राडे ट्रेडिंग का नुकसान सैलरी से एडजस्ट नहीं होगा

रिपोर्ट के मुताबिक, इंट्राडे ट्रेडिंग में शेयरों की डिलीवरी नहीं ली जाती और सौदा उसी दिन काट दिया जाता है. ऐसे लेनदेन को सट्टा कारोबार यानी स्पेकुलेटिव बिजनेस ट्रांजैक्शन माना जाता है. इस तरह के कारोबार में हुआ नुकसान सिर्फ दूसरे सट्टा कारोबार से हुई कमाई के साथ एडजस्ट किया जा सकता है. यह नुकसान सामान्य बिजनेस से हुई इनकम के साथ भी एडजस्ट नहीं किया जा सकता. यानी अगर इंट्राडे ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है तो उसे आपकी सैलरी की टैक्सेबल इनकम से घटाकर टैक्स कम नहीं किया जा सकता.

F&O का नुकसान भी सैलरी से नहीं होगा एडजस्ट

F&O यानी फ्यूचर और ऑप्शन के लेनदेन को सट्टा कारोबार नहीं माना जाता. हालांकि, इसे बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के तहत टैक्स किया जाता है. F&O जैसे बिजनेस लेनदेन में हुआ नुकसान दूसरी आय के साथ एडजस्ट करने के नियमों के तहत देखा जाता है, लेकिन इसे सैलरी की आय से एडजस्ट नहीं किया जा सकता.

इसका मतलब है कि नौकरी करने वाले व्यक्ति को F&O ट्रेडिंग में नुकसान होने पर अपनी सैलरी से होने वाली टैक्सेबल आय में सीधे इसकी कटौती का फायदा नहीं मिलेगा.

निवेश में हुआ नुकसान अलग तरीके से होता है एडजस्ट

अगर शेयर बाजार में किया गया लेनदेन निवेश की प्रकृति का है तो उससे होने वाले नुकसान को कैपिटल गेन से जुड़े नियमों के तहत देखा जाएगा. ऐसे मामलों में नुकसान को सिर्फ कैपिटल गेन के साथ ही एडजस्ट किया जा सकता है. इसे सैलरी या किसी दूसरी इनक के साथ सीधे एडजस्ट नहीं किया जा सकता.

किसी लेनदेन को निवेश या बिजनेस माना जाएगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है. इनमें शेयरों को कितने समय तक रखा गया, निवेश के लिए पैसा कहां से आया, लेनदेन की संख्या और उसे खातों में किस तरह दिखाया गया है जैसी बातें शामिल हो सकती हैं.

ITR भरते समय रखें इन बातों का ध्यान

अगर आपने सैलरी के साथ F&O, इंट्राडे ट्रेडिंग या शेयरों में निवेश किया है तो सभी तरह की इनकम और नुकसान को एक ही तरह से नहीं देखा जाता. इंट्राडे में हुआ नुकसान सिर्फ सट्टा कारोबार से हुई आय के साथ एडजस्ट किया जा सकता है. F&O और दूसरे बिजनेस ट्रांजैक्शन से हुए नुकसान के नियम अलग हैं, लेकिन इसे सैलरी से एडजस्ट नहीं किया जा सकता. वहीं, निवेश के तौर पर किए गए शेयर लेनदेन में हुए नुकसान को कैपिटल गेन से जुड़े नियमों के तहत एडजस्ट किया जाता है.

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इसलिए ITR भरने से पहले अपने शेयर बाजार के लेनदेन की सही कैटेगरी समझना जरूरी है. गलत तरीके से नुकसान को सैलरी की आय से एडजस्ट करने पर ITR में गलती हो सकती है.