8th Pay Commission में पेंशनर्स की बड़ी मांग! 15 साल नहीं, अब 11 साल में बहाल हो कम्यूटेड पेंशन; ₹6.72 लाख तक का फायदा?
8th पे कमीशन के सामने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स ने कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि घटाने की बड़ी मांग रखी है. संगठनों का कहना है कि मौजूदा 15 साल का नियम पुराने ब्याज दर और एक्ट्यूअरियल मानकों पर आधारित है. उनकी मांग है कि बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए पेंशन बहाली की अवधि 10 से 12 साल के बीच तय की जाए. अगर सरकार फ्यूचर में इस मांग को स्वीकार करती है तो कम्यूटेड पेंशन लेने वाले पेंशनर्स को पेंशन पहले बहाल होने का फायदा मिल सकता है.
Highlights
- केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन 15 साल की जगह कम्यूटेड पेंशन को 10 से 12 साल में बहाल करने की मांग कर रहे हैं.
- NC-JCM के उदाहरण के अनुसार, ₹9,833 की एकमुश्त रकम के बदले 10 साल में ₹12,000 और 15 साल में ₹18,000 की पेंशन कट जाती है.
- ₹35,000 की बेसिक पेंशन वाले एक पेंशनर को 15 साल की जगह 11 साल में पेंशन बहाल होने पर चार साल में ₹6.72 लाख तक का अतिरिक्त फायदा हो सकता है.
केंद्र सरकार के पेंशनर्स के लिए 8th पे कमीशन से जुड़ी एक अहम मांग सामने आई है. कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने सरकार से पेंशन के कम्यूटेशन यानी पेंशन के एक हिस्से की कटौती के बाद उसे बहाल करने की अवधि 15 साल से घटाकर 10 से 12 साल करने की मांग की है. संगठनों का कहना है कि मौजूदा 15 साल की अवधि करीब चार दशक पुराने वित्तीय और एक्ट्यूअरियल मानकों पर आधारित है, जिनमें अब बड़ा बदलाव आ चुका है.
केंद्र सरकार के पेंशनर्स रिटायरमेंट के समय अपनी बेसिक पेंशन का अधिकतम 40 फीसदी हिस्सा एकमुश्त रकम के रूप में ले सकते हैं. इसके बाद जितना हिस्सा कम्यूट किया जाता है, उतनी रकम हर महीने पेंशन से कटती रहती है. फिलहाल यह कम्यूटेड पेंशन 15 साल बाद बहाल होती है. अब कई संगठनों ने 8th Pay Commission के सामने इस अवधि को कम करने की मांग रखी है.
किस संगठन ने कितने साल की मांग की?
8th Pay Commission को दिए गए अलग-अलग ज्ञापनों में पेंशन बहाली की अवधि घटाने की मांग की गई है. National Council of the Joint Consultative Machinery यानी NC-JCM ने इसे 11 साल करने की मांग की है. All India Defence Employees’ Federation यानी AIDEF और Federation of National Postal Organisations यानी FNPO ने भी 11 साल की अवधि का सुझाव दिया है.
वहीं All India New Pension Scheme Employees Federation यानी AINPSEF ने कम्यूटेड पेंशन को 10 साल में बहाल करने की मांग की है.
15 साल की अवधि पर क्यों उठ रहे सवाल?
NC-JCM का कहना है कि कम्यूटेड पेंशन को 15 साल बाद बहाल करने का नियम करीब 39 साल पहले तय किया गया था. उस समय ब्याज दरें, औसत जीवन प्रत्याशा, मृत्यु दर और एक्ट्यूअरियल जोखिम जैसे मानक अलग थे. संगठन का तर्क है कि इतने वर्षों में इन सभी मानकों में बड़ा बदलाव हो चुका है. इसलिए पेंशन बहाली की अवधि को भी मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से नए सिरे से तय किया जाना चाहिए.
₹9,833 लेकर 15 साल में गंवाने पड़ते हैं ₹18,000?
NC-JCM ने 61 साल की उम्र वाले एक पेंशनर का उदाहरण देकर अपनी मांग को समझाया है. इस उदाहरण में कम्यूटेशन फैक्टर 8.194 है और पेंशनर हर महीने ₹100 की पेंशन कम्यूट करता है. ऐसे में उसे शुरुआत में एकमुश्त 9833 रुपये मिलते हैं.
लेकिन हर महीने 100 रुपये की कटौती के हिसाब से 10 साल में कुल 12000 रुपये की पेंशन कट जाती है. यानी पेंशनर को मिली एकमुश्त रकम से अधिक राशि 10 साल में ही वसूल हो जाती है. अगर कटौती 15 साल तक जारी रहती है तो कुल 18000 रुपये की रकम कट जाती है.
NC-JCM का कहना है कि इस उदाहरण के हिसाब से कम्यूट की गई रकम की वसूली करीब 10 साल में ही हो जाती है. इसलिए कम्यूटेड पेंशन को 11 साल में बहाल करना उचित होगा.
1986 से अब तक क्या-क्या बदला?
Bharat Pensioner Samaj यानी BPS ने भी 8th Pay Commission के सामने पेंशन कम्यूटेशन की अवधि में बदलाव की मांग रखी है. संगठन का कहना है कि 1986 के बाद ब्याज दरों, जीवन प्रत्याशा और मृत्यु दर में बड़ा बदलाव हुआ है. BPS के आंकड़ों के अनुसार, 1986 में सांकेतिक ब्याज दर 12% थी, जो 2008 में 8% और 2023 में 7.10% रह गई. वहीं औसत जीवन प्रत्याशा 57.7 साल से बढ़कर 70.42 साल हो गई.
संगठन के मुताबिक मृत्यु दर और जोखिम से जुड़े मानकों में भी बदलाव आया है. BPS के अनुमान के अनुसार, मौजूदा मानकों के आधार पर कुल वसूली की अवधि करीब 11.25 साल बैठती है, जबकि 15 साल की अवधि पुराने नियमों पर बनी हुई है.
₹35,000 पेंशन वाले को 4 साल में ₹6.72 लाख का फायदा?
BPS ने एक ऐसे पेंशनर का उदाहरण दिया है जिसकी बेसिक पेंशन 35000 रुपये प्रति माह है. अगर पेंशनर अपनी 40% यानी ₹14,000 मासिक पेंशन कम्यूट करता है, तो यही 14000 रुपये हर महीने उसकी पेंशन से कटते हैं. 11 साल की बहाली अवधि में 14000 रुपये की मासिक कटौती 132 महीने तक होगी. इस दौरान कुल 18.48 लाख रुपये की रकम कटेगी. जबकि 15 साल की अवधि में यही कटौती 180 महीने तक चलेगी और कुल 25.20 लाख रुपये की रकम कटेगी.
दोनों मामलों में पेंशनर को शुरुआत में मिलने वाली एकमुश्त रकम 13.77 लाख रुपये बताई गई है. लेकिन अगर पेंशन बहाली 15 साल की जगह 11 साल में हो जाती है तो चार साल यानी 48 महीने पहले पेंशन बहाल हो जाएगी. इस हिसाब से पेंशनर को चार साल तक 14000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त पेंशन मिलने लगेगी. BPS के अनुसार, इससे पेंशनर को इन चार वर्षों में कुल 6.72 लाख रुपये का अतिरिक्त फायदा हो सकता है.
8th Pay Commission से क्या है बड़ी मांग?
कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने 8th Pay Commission से Central Civil Services (Commutation of Pension) Rules, 1981 के Rule 10A की समीक्षा करने की मांग की है. संगठनों का कहना है कि पेंशन कम्यूटेशन टेबल को मौजूदा एक्ट्यूअरियल, जनसांख्यिकीय और वित्तीय आंकड़ों के आधार पर संशोधित किया जाना चाहिए.
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हालांकि, फिलहाल यह केवल कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों की मांग और 8th Pay Commission को दिया गया सुझाव है. कम्यूटेड पेंशन को 15 साल की जगह 10, 11 या 12 साल में बहाल करने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
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