एक महीने में सोना 15 फीसदी उछला, क्या है इस रैली के पीछे की वजह; अपने पोर्टफोलियो कर सकते हैं शामिल?

इस साल की शुरुआत में छुए गए 5,500 डॉलर के नए उच्चतम स्तर तक फिर से पहुंच सकता है. यह मेटल अभी भी उस स्तर से लगभग 16 फीसदी नीचे है. हाल के वर्षों में सोने के लिए साल की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है.

गोल्ड में निवेश

Highlights

  • US इंटरेस्ट रेट्स को लेकर उम्मीदें भी सोने की तेजी को सपोर्ट कर रही हैं.
  • आमतौर पर सोने को महंगाई से बचाव का जरिया माना जाता है.
  • सोने की ऊंची कीमतों का असर गहनों की मांग पर जारी रहने की संभावना है.

सोने की कीमतों में भारी गिरावट के बाद इस कीमती मेटल्स की कीमत में सिर्फ एक महीने में 15 फीसदी की तेजी आई है. यह जबरदस्त उछाल चार महीने से ज्यादा समय में इसकी सबसे बड़ी रैली है. गोल्ड ने एक बार फिर इस बात पर चर्चा छेड़ दी है कि क्या सोना 2025 जैसा कमाल दोहरा सकता है. इस साल की शुरुआत में छुए गए 5,500 डॉलर के नए उच्चतम स्तर तक फिर से पहुंच सकता है. यह मेटल अभी भी उस स्तर से लगभग 16 फीसदी नीचे है.

गोल्ड के लिए उतार-चढ़ाव भरा साल

हाल के वर्षों में सोने के लिए साल की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है. जनवरी में यह कीमती मेटल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई और 5,500 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई, लेकिन अगस्त तक गिरकर 4,600 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. कीमतों में यह बड़ी गिरावट ईरान युद्ध को लेकर फिर से बढ़े तनाव के कारण आई, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और ऐसी उम्मीदें जगीं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है.

मजबूती की वजह क्या है?

ईटी के अनुसार, ETF में जबरदस्त निवेश- गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) की मांग फिर से बढ़ रही है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा के मुताबिक, ग्लोबल ETF होल्डिंग्स में लगभग 23 टन सोना जोड़ा गया. अगस्त में यह निवेश तेजी से बढ़ा है, और महीने की शुरुआत से अब तक ग्लोबल ETF में 45 टन सोना जोड़ा गया है.

सेंट्रल बैंक की खरीदारी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सेंट्रल बैंकों ने दूसरी तिमाही में 288.9 टन सोना खरीदा, जो एक साल पहले की तुलना में 62 फीसदी ज्यादा है. दक्षिण कोरिया भी अब इस लिस्ट में शामिल हो गया है. उसका सेंट्रल बैंक 13 साल बाद गोल्ड मार्केट में लौटा है, जिससे सरकारी सेक्टर की लगातार मांग का ट्रेंड और मजबूत हुआ है.

सेंट्रल बैंक नेट खरीदारी के मामले में एक और मजबूत साल की ओर बढ़ रहे हैं. सोने के लिए स्ट्रक्चरल आधार – जैसे कि डाइवर्सिफिकेशन (विविधता), संकट के समय बेहतर प्रदर्शन और जियो-पॉलिटिकल व फाइनेंशियल रिस्क से सुरक्षा – अभी भी मजबूती से कायम है.

क्या ग्लोबल रिजर्व बढ़ेंगे?

काउंसिल के ‘सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे’ में पाया गया कि 89 फीसदी लोगों को उम्मीद है कि अगले साल ग्लोबल रिजर्व बढ़ेंगे, जबकि रिकॉर्ड 45 फीसदी लोगों को उम्मीद है कि वे इसी दौरान अपनी होल्डिंग्स बढ़ाएंगे. सेंट्रल बैंक की मांग के अपने लंबे समय के औसत से ऊपर बने रहने की उम्मीद है.

मजबूत बना हुआ है स्ट्रैटेजिक आधार

सर्वे यह भी दिखाता है कि सोने के लिए स्ट्रैटेजिक आधार मजबूती से बना हुआ है. रिजर्व में डायवर्सिफिकेशन, जियो-पॉलिटिकल और फाइनेंशियल मार्केट की अनिश्चितता से सुरक्षा, और लंबे समय तक वैल्यू बनाए रखने वाले एसेट के तौर पर सोने की भूमिका सेंट्रल बैंकों की सोच में अहम बनी हुई है.

रिजर्व मैनेजर सोने को सरकारी रिजर्व का एक अहम हिस्सा मानते हैं, भले ही ऊंची कीमतें और किसी देश की खास लिक्विडिटी जरूरतें अलग-अलग ट्रांजैक्शन के समय और पैमाने पर असर डालती हों.

US फेड द्वारा रेट्स स्थिर रखने की उम्मीद

US इंटरेस्ट रेट्स को लेकर उम्मीदें भी सोने की तेजी को सपोर्ट कर रही हैं. CME फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स अब मान रहे हैं कि अगले महीने फेड के रेट्स को बिना बदले रखने की संभावना 61 फीसदी है, जबकि रेट्स बढ़ने की संभावना 42 फीसदी है.

आमतौर पर सोने को महंगाई से बचाव का जरिया माना जाता है, लेकिन ब्याज दरें बढ़ने पर इसकी अहमियत कम हो जाती है क्योंकि सोना कोई रिटर्न देने वाला एसेट नहीं है.

US ट्रेजरी का बॉन्ड बायबैक का फैसला

US ट्रेजरी ने घोषणा की है कि वह अगले तिमाही में लंबी अवधि वाली ट्रेजरी सिक्योरिटीज़ के बायबैक का दायरा दोगुना करके हर ऑपरेशन में कम से कम 4 अरब डॉलर कर देगी. ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा है कि सरकार रीपरचेज़ (वापस खरीदने) की मात्रा और बढ़ा सकती है.

अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट

इस कदम का मकसद लंबी अवधि वाली ट्रेजरी यील्ड को कंट्रोल में रखना है. यह सोने के लिए फायदेमंद है, क्योंकि बॉन्ड यील्ड कम होने से बिना रिटर्न वाले एसेट को अपने पास रखने की ‘अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट’ (मौका लागत) कम हो जाती है. अगर इस कदम से US डॉलर पर दबाव पड़ता है, तो भी सोने को फायदा हो सकता है, क्योंकि डॉलर कमजोर होने से दूसरी करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है.

कमजोर डॉलर- US डॉलर के कमजोर होने और US ट्रेजरी डिपार्टमेंट की ओर से लंबी अवधि के यील्ड (yields) को कंट्रोल में रखने की कोशिशों ने भी सोने की कीमतों में तेजी को बढ़ावा दिया है. डॉलर में साप्ताहिक गिरावट देखी जा रही थी, जिससे दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए डॉलर में कीमत वाली कमोडिटीज सस्ती हो गईं.

क्या आपके पोर्टफोलियो में सोना होना चाहिए?

ईटी ने अपनी रिपोर्ट में एक्सपर्ट के हवाले से बताया कि हाल ही में आई गिरावट ने निवेशकों के लिए धीरे-धीरे सोना जमा करना शुरू करने का मौका दिया हो सकता है. दोनों का मानना ​​है कि यह कीमती मेटल एक लंबे समय तक चलने वाली तेज (Bull Run) की शुरुआत में हो सकती है. जैसे-जैसे लोगों का कागजी करेंसी से भरोसा कम हो रहा है, सोने की मांग एक विकल्प के तौर पर बढ़ती रहेगी.

एक्सपर्ट का तर्क है कि वित्तीय संकट के बाद फिस्कल और मॉनेटरी स्टिमुलस (सरकारी खर्च और ब्याज दरों में बदलाव) से आखिरकार अमेरिकी डॉलर कमजोर हो जाएगा. तब से सोने की कीमतें लगभग चार गुना बढ़ गई हैं और 5,000 डॉलर के स्तर को पार करने के बाद थोड़ी नीचे आई हैं.

गहनों पर दिखेगा कीमतों का असर?

उम्मीद है कि 2026 के बाकी समय में निवेश मांग में बढ़ोतरी का मुख्य स्रोत बना रहेगा, जिसमें ओवर-द-काउंटर (OTC) गतिविधि और एशियाई खरीद से बढ़ता समर्थन मिलेगा. केंद्रीय बैंकों के भी बड़े खरीदार बने रहने की उम्मीद है.

सोने की ऊंची कीमतों का असर गहनों की मांग पर पड़ना जारी रहने की संभावना है, जबकि खदान उत्पादन और रीसाइक्लिंग से सीमित प्रतिक्रिया ही मिलेगी. पश्चिमी गोल्ड ETF फ्लो वास्तविक यील्ड, मौद्रिक नीति की उम्मीदों और अमेरिकी डॉलर के प्रति संवेदनशील बने रह सकते हैं.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.