Nifty 50 क्यों नहीं पार कर पा रहा 25000 का लेवल? क्या IPO की बाढ़ ने रोक दी मार्केट की रफ्तार; यहां है पूरी डिटेल
Nifty 50 पिछले करीब 6 महीने से 25000 के नीचे बना हुआ है. इस साल अब तक 172 IPO के जरिए करीब 77400 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं. हालांकि, Nifty की कमजोरी के पीछे महंगा कच्चा तेल, वैश्विक तनाव, कमजोर कमाई और FII का रुख अब भी बड़े कारण हैं.
Highlights
- इस साल 5 जनवरी को 26,373 का रिकॉर्ड हाई बनाने के बाद इंडेक्स 7% से ज्यादा गिर चुका है.
- 25 अगस्त तक 59 Mainboard और 113 SME IPO बाजार में आए.
- निवेशक सेकेंडरी मार्केट के बजाय IPO में जल्दी रिटर्न की उम्मीद में पैसा लगा रहे हैं.
भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स Nifty 50 पिछले करीब 6 महीने से 25000 के स्तर के नीचे अटका हुआ है. कमजोर कॉरपोरेट कमाई, भू-राजनीतिक तनाव, महंगा कच्चा तेल, FII की बिकवाली और रुपये की कमजोरी के बीच अब एक नया सवाल उठ रहा है कि क्या इस साल आए IPO की बाढ़ भी शेयर बाजार की रफ्तार पर असर डाल रही है.
इस साल अब तक मुख्य बाजार और SME को मिलाकर 171 IPO आ चुके हैं. इन IPO के जरिए करीब 77400 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं. ऐसे में प्राइमरी मार्केट में इतनी बड़ी रकम जाने से सेकेंडरी मार्केट में उपलब्ध लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है.
2 साल में कमजोर रहा Nifty 50
Nifty 50 पिछले दो साल से कमजोर रुझान में बना हुआ है. पिछले 2 साल में इंडेक्स करीब 2 फीसदी गिरा है, जबकि पिछले एक साल में इसमें 2.5 फीसदी की गिरावट आई है. इस साल 5 जनवरी को Nifty 50 ने 26373 का रिकॉर्ड हाई बनाया था. इसके बाद इंडेक्स 7% से ज्यादा टूट चुका है. 27 फरवरी के बाद से Nifty 50 25000 का स्तर पार नहीं कर पाया है और करीब 6 महीने से 22,000 से 24,000 के दायरे में कारोबार कर रहा है.
इस साल 171 IPO ने जुटाए ₹77400 करोड़
ब्रोकरेज फर्म Swastika Investmart के आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त तक इस साल 59 Mainboard और 113 SME IPO बाजार में आ चुके हैं. यानी कुल 172 कंपनियों ने IPO के जरिए निवेशकों से पैसा जुटाया है. इन IPO के जरिए कुल करीब 77400 करोड़ जुटाए गए हैं. इसमें Mainboard IPO की हिस्सेदारी करीब 72000 करोड़ रुपये रही है.
इतने बड़े पैमाने पर IPO आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या निवेशकों का पैसा सेकेंडरी मार्केट के बजाय नए IPO में जा रहा है और इसका असर Nifty की तेजी पर पड़ रहा है.
क्या IPO बाजार की तेजी रोक रहे हैं?
Mint की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार आ रहे बड़े IPO सेकेंडरी मार्केट के लिए उपलब्ध लिक्विडिटी को सीमित कर रहे हैं. उनके मुताबिक, जब निवेशकों की बड़ी रकम नए IPO में जाती है तो उतनी रकम पहले से लिस्टेड शेयरों की खरीदारी के लिए उपलब्ध नहीं रहती. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों को अब भी बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम माना जा रहा है. महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल, रुपये और FII के निवेश पर पड़ सकता है.
अगर कच्चा तेल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाता है, तो विदेशी निवेशकों की हाल की खरीदारी पर भी असर पड़ने की आशंका है.
238 कंपनियां जुटा सकती हैं ₹4.72 लाख करोड़
रिपोर्ट के मुताबिक, आगे भी IPO की सप्लाई कम होने के संकेत नहीं हैं. करीब 238 कंपनियां मिलकर लगभग 4.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं. इसका मतलब है कि आने वाले समय में भी प्राइमरी मार्केट में बड़ी रकम जाएगी. बड़े IPO खासतौर पर संस्थागत निवेशकों की कैपिटल को अपनी ओर खींच सकते हैं, जिससे कुछ समय के लिए सेकेंडरी मार्केट पर दबाव बना रह सकता है.
लेकिन IPO की यह सप्लाई Nifty की कमजोरी की अकेली वजह नहीं है. बाजार में भारी भरकम शेयरों का कमजोर प्रदर्शन, वैश्विक अनिश्चितता और FII के निवेश का रुख भी अहम भूमिका निभा रहा है.
क्या रिटेल निवेशकों का पैसा IPO में फंस रहा है?
रिपोर्ट में ये भी दांवा किया गया है कि रिटेल निवेशकों की लिक्विडिटी खत्म होने वाली बात को आंकड़ों से पूरी तरह समर्थन नहीं मिलता. इस साल Mainboard IPO में रिटेल निवेशकों की भागीदारी अपेक्षाकृत सीमित रही है, जबकि संस्थागत निवेशक और HNI निवेशक इस IPO लहर में ज्यादा सक्रिय रहे हैं. 28 मेनबोर्ड IPO में औसत रिटेल सब्सक्रिप्शन 12.8 गुना रहा, जबकि QIB की हिस्सेदारी FY26 के कुल इश्यू साइज में करीब 61% रही.
दूसरी ओर, रिटेल निवेशकों का पैसा SIP के जरिए लगातार शेयर बाजार में आ रहा है. लगातार 5वें महीने SIP निवेश 31000 करोड़ रुपये से ऊपर बना रहा. इससे संकेत मिलता है कि रिटेल निवेशकों की लिक्विडिटी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
हालांकि IPO के कारण बाजार से पैसा बाहर नहीं गया है, बल्कि निवेशकों ने अपने पैसे का आवंटन बदल दिया है. जब बाजार में नए IPO बेहतर लिस्टिंग गेन देते हैं, तो कुछ निवेशक पहले से लिस्टेड शेयरों में लंबी अवधि के रिटर्न का इंतजार करने के बजाय IPO में जल्दी मुनाफे का मौका तलाशने लगते हैं. पिछले दो साल में बाजार की बढ़ी हुई अस्थिरता, युद्ध, टैरिफ, FII की बिकवाली, कमजोर कॉरपोरेट कमाई और वैश्विक अनिश्चितता ने भी निवेशकों को सतर्क बनाया है. ऐसे में कुछ निवेशक नए IPO की ओर ज्यादा आकर्षित हुए हैं.
Nifty के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या?
IPO की बाढ़ बाजार पर दबाव डाल सकती है, लेकिन इसे Nifty की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह नहीं माना जा रहा है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भारी भरकम शेयरों का कमजोर प्रदर्शन, वैश्विक तनाव, कॉरपोरेट कमाई और FII का रुख ज्यादा बड़े फैक्टर बने हुए हैं.
हालांकि, लगातार IPO आने से प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट के बीच निवेशकों के पैसे का बंटवारा जरूर बढ़ रहा है. अगर IPO की रफ्तार और तेज रहती है और तेल की कीमतों में भी राहत नहीं मिलती, तो आने वाले समय में सेकेंडरी मार्केट की तेजी पर कुछ दबाव बना रह सकता है.
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