पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा बजट! हर साल जेब से जाएंगे ₹3000; समझ लीजिए पूरा गणित
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों के घरेलू बजट पर दिखने लगा है. 15 मई से अब तक ईंधन करीब 5 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है, जिससे सालाना खर्च में लगभग 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है. कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन, फूड डिलीवरी, कैब सर्विस और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजें भी महंगी हो सकती हैं.

Petrol Diesel Price Hike: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी अब आम लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगी है. पिछले 10 दिनों के भीतर तीसरी बार ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया है. 15 मई से अब तक पेट्रोल और डीजल करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं. भले ही एक बार में बढ़ोतरी ज्यादा बड़ी न लगे, लेकिन इसका कुल असर अब घरेलू बजट पर साफ दिखाई देने लगा है. ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी सिर्फ गाड़ी चलाने की लागत नहीं बढ़ाती, बल्कि इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी लगभग हर चीज पर पड़ता है. ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स महंगे होने से खाने-पीने का सामान, कैब सर्विस, फूड डिलीवरी और दूसरी जरूरी सर्विसेज भी धीरे-धीरे महंगी होने लगती हैं.
हर महीने बढ़ेगा खर्च
अगर कोई शहरी परिवार हर महीने औसतन 50 लीटर पेट्रोल का इस्तेमाल करता है, तो 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद उसे हर महीने लगभग 250 रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे. यही अतिरिक्त खर्च सालभर में करीब 3000 रुपये तक पहुंच सकता है. मिडिल क्लास और सैलरीड परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी चिंता बन सकती है, क्योंकि पहले से ही EMI, स्कूल फीस, बिजली बिल और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में ईंधन की कीमतों में इजाफा सीधे तौर पर बचत को प्रभावित कर सकता है.
बचत और निवेश पर भी असर
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सालाना 3000 रुपये का अतिरिक्त खर्च छोटा नहीं माना जा सकता. यह रकम कई लोगों के लिए 2 से 3 महीने की SIP इन्वेस्टमेंट के बराबर हो सकती है. वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह एक महीने के ब्रॉडबैंड और OTT सब्सक्रिप्शन खर्च जितनी भी हो सकती है. ऐसे में लगातार बढ़ती फ्यूल प्राइस लोगों की मासिक कैश फ्लो और फाइनेंशियल प्लानिंग पर असर डाल सकती हैं.
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें
सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों का असर अब धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और जियो पॉलिटिकल संकट की वजह से ग्लोबल एनर्जी प्राइस में तेजी बनी हुई है. इसी कारण 15 मई को सबसे पहले 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद 19 मई को करीब 90 पैसे और अब फिर से 87 से 91 पैसे प्रति लीटर तक कीमतें बढ़ा दी गई हैं.
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