Wipro के ₹15000 करोड़ शेयर बायबैक के बीच समझें नया टैक्स नियम, कैसे बदलेगा आपका रिटर्न; ये है गणित
1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक पर टैक्स का तरीका बदल गया है. अब निवेशकों को डिविडेंड नहीं, बल्कि कैपिटल गेन के रूप में टैक्स देना होगा, जानें इससे आपकी कमाई पर क्या असर पड़ेगा. इससे इतर, नए और पुराने नियम में अंतर भी समझे.

Share Buyback Tax Rule: नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही आयकर नियमों में कई अहम बदलाव लागू हो गए, जिनका असर सीधे निवेशकों पर पड़ने वाला है. खासतौर पर शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए शेयर बायबैक से जुड़ा नियम पूरी तरह बदल गया है. अब निवेशकों को पहले से ज्यादा सतर्क रहना होगा, क्योंकि टैक्स का तरीका बदलने से उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ेगा.
क्या बदला है नए नियम में?
1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए नियम के तहत शेयर बायबैक से मिलने वाले लाभ को अब डिविडेंड की तरह नहीं, बल्कि कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) के रूप में टैक्स किया जाएगा. पहले यह जिम्मेदारी कंपनियों पर होती थी, लेकिन अब टैक्स का बोझ सीधे निवेशकों पर आ गया है.
पहले क्या था सिस्टम?
पहले कंपनियां शेयर बायबैक पर करीब 20 फीसदी टैक्स देती थीं और निवेशकों को मिलने वाली रकम टैक्स-फ्री होती थी. बाद में नियम बदला और 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के बीच बायबैक से मिली रकम को डिविडेंड माना गया, जिस पर निवेशकों को अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता था, बिना किसी लागत यानी कॉस्ट की कटौती के. यानी अगर आपने किसी शेयर को 100 रुपये में खरीदा और शेयर बायबैग के जरिये 150 रुपये में बेचा तो टैक्स पूरे 150 रुपये पर लगेगी. लेकिन नए नियम के मुताबिक, ये टैक्स केवल मुनाफे वाली रकम यानी 50 रुपये पर लगेगी. आसान भाषा में समझे तो लागत की कटौती के बाद वाली रकम पर टैक्स लगेगा.
अब कैसे लगेगा टैक्स?
नए नियम के तहत, बायबैक से मिलने वाले फायदे पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा. यानी अब आपको अपने शेयर खरीदने की कीमत यानी कॉस्ट ऑफ एक्वीजीशन घटाने का फायदा मिलेगा और सिर्फ मुनाफे पर टैक्स लगेगा. अगर आपने शेयर 1 साल के भीतर बेचा (या बायबैक में दिया) तब शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) लागू होगा, जिस पर टैक्स आपके इनकम स्लैब के अनुसार लगेगा. वहीं, अगर शेयर 1 साल से ज्यादा समय तक होल्ड किया तब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) लागू होगा. इसमें 1.25 लाख रुपये तक के मुनाफे पर छूट मिलेगी और उससे ऊपर 12.5 फीसदी टैक्स लगेगा.
लिस्टेड और अनलिस्टेड शेयर में अंतर
लिस्टेड शेयरों के लिए LTCG की सीमा 1 साल है. अनलिस्टेड शेयरों के लिए यह अवधि 24 महीने होती है और उस पर 20 फीसदी टैक्स लगता है, जिसमें इंडेक्सेशन का लाभ भी मिलता है. इससे इतर, अब सवाल है कि होल्डिंग पीरियड की कैलकुलेशन कैसी होगी. वह उस दिन से होगी जब आपने शेयर खरीदा था, से लेकर बायबैक की रिकॉर्ड डेट तक. इसी के आधार पर तय होगा कि STCG लगेगा या LTCG.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
अब शेयर बायबैक पहले जैसा सीधा फायदा नहीं देगा, क्योंकि टैक्स की जिम्मेदारी निवेशकों पर आ गई है. हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह है कि अब आप अपनी खरीद लागत घटाकर केवल वास्तविक मुनाफे पर टैक्स देंगे, जिससे कुछ मामलों में टैक्स बोझ कम भी हो सकता है. यानी, यह बदलाव निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता और गणना की सुविधा देता है, लेकिन साथ ही उन्हें अपने निवेश और टैक्स प्लानिंग को लेकर ज्यादा सजग रहने की जरूरत भी होगी. खासकर जिन कंपनियों में बायबैक की संभावना है, वहां निवेश से पहले इन नए नियमों को समझना बेहद जरूरी है.
Wipro बायबैक से फोकस में आया मुद्दा
शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स का मामला वापस से चर्चा में इसलिए आया है क्योंकि हाल ही में दिग्गज आईटी कंपनी Wipro ने अपने सबसे बड़े शेयर बायबैक की घोषणा की है. कंपनी ने कहा कि वह 15000 करोड़ रुपये के शेयर को वापस खरीदेगी. हालांकि, इस खबर के बाद कंपनी के शेयरों में गिरावट आई थी. कंपनी का कहना है कि वह 22 फीसदी के प्रीमियम यानी 250 रुपये पर शेयरों को बायबैक करेगी. स्टॉक के आज यानी सोमवार, 20 अप्रैल के प्रदर्शन की बात करें तो दोपहर (1 बजे तक), 0.75 फीसदी की गिरावट के साथ 202 रुपये पर ट्रेड कर रहा.