ITR स्क्रूटनी की नई गाइडलाइन जारी, आपका इन 6 मामलों से है नाता तो होगी सीधी जांच, फाइल करने से पहले करें चेक
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ITR स्क्रूटनी से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी की हैं. इसके तहत सर्वे, सर्च, री-असेसमेंट, बड़े टैक्स विवाद और टैक्स चोरी की आशंका वाले मामलों को अनिवार्य जांच के लिए चुना जाएगा. ऐसे मामलों में आयकर विभाग विस्तृत पड़ताल करेगा.

Income Tax News: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करोड़ों करदाताओं के लिए अहम अपडेट सामने आया है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ITR की जांच यानी स्क्रूटनी से जुड़े नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इसके तहत 6 तरह के मामलों को आयकर विभाग अपने आप जांच के लिए चुनेगा यानी इन मामलों में रिटर्न की विस्तार से पड़ताल की जाएगी.
आयकर विभाग कुछ रिटर्न को जोखिम और डेटा एनालिसिस के आधार पर जांच के लिए चुनता है, लेकिन कुछ मामले ऐसे होते हैं जिन्हें तय नियमों के तहत सीधे स्क्रूटनी में लिया जाता है. इन्हें ही अनिवार्य स्क्रूटनी कहा जाता है.
क्या होती है अनिवार्य स्क्रूटनी?
इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 143(2) के तहत कुछ रिटर्न की विस्तार से जांच की जाती है. ऐसे मामलों में टैक्सपेयर को नोटिस भेजा जाता है और उससे संबंधित दस्तावेज, लेनदेन की जानकारी और जरूरी स्पष्टीकरण मांगा जाता है. फिलहाल यह प्रक्रिया ज्यादातर फेसलेस असेसमेंट सिस्टम के जरिए पूरी होती है.
इन 6 मामलों में होगी अनिवार्य जांच
1. धारा 133A के तहत सर्वे
अगर किसी टैक्सपेयर के यहां 1 अप्रैल 2024 या उसके बाद धारा 133A के तहत सर्वे हुआ है, तो उसका रिटर्न जांच के लिए चुना जाएगा. इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि रिटर्न में कोई गड़बड़ी मिली हो.
2. सर्च या रिक्विजिशन की कार्रवाई
जिन लोगों के खिलाफ 1 अप्रैल 2024 या उसके बाद धारा 132 के तहत सर्च या धारा 132A के तहत रिक्विजिशन की कार्रवाई हुई है, उनके रिटर्न भी अनिवार्य जांच के दायरे में आएंगे।
CBDT के मुताबिक 1 सितंबर 2024 या उसके बाद हुए सर्च मामलों में जांच केवल उस असेसमेंट वर्ष तक सीमित रहेगी, जो धारा 158BA(6) के तहत कवर होता है।
3. धारा 148 का नोटिस मिलने पर
अगर आयकर विभाग ने किसी करदाता को धारा 148 के तहत नोटिस भेजा है, तो उसका मामला भी स्क्रूटनी में जाएगा. यह नोटिस तब जारी किया जाता है जब विभाग को लगता है कि कुछ आय कर के दायरे में आने के बावजूद आकलन से छूट गई है.
4. अमान्य रजिस्ट्रेशन के बावजूद छूट का दावा
चैरिटेबल ट्रस्ट, धार्मिक संस्थाएं और ITR-7 दाखिल करने वाली अन्य संस्थाएं अगर रजिस्ट्रेशन रद्द या वापस होने के बावजूद टैक्स छूट का दावा करती हैं, तो उनके रिटर्न की भी जांच होगी.
यह नियम धारा 12A, 12AB, 10(23C) और धारा 35 के तहत मिलने वाली छूट और कटौती पर लागू होगा. हालांकि जिन मामलों में अपीलीय प्राधिकरण ने बाद में राहत दे दी है, वे इसमें शामिल नहीं होंगे.
5. बड़े और पुराने टैक्स विवाद
अगर किसी टैक्सपेयर के खिलाफ पिछले सालों में किसी मुद्दे पर बड़ा टैक्स एडिशन किया गया था और वह मामला आयकर विभाग के पक्ष में तय हो चुका है, तो ऐसे रिटर्न भी जांच के लिए चुने जा सकते हैं.
इसके लिए अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे जैसे मेट्रो शहरों में राशि 50 लाख रुपये से अधिक होनी चाहिए. दूसरे क्षेत्रों में यह सीमा 20 लाख रुपये से ज्यादा तय की गई है.
6. टैक्स चोरी की सूचना मिलने पर
अगर जांच एजेंसियों, खुफिया इकाइयों, नियामक संस्थाओं या किसी सरकारी विभाग से ऐसी जानकारी मिलती है जिससे टैक्स चोरी की आशंका बनती है, तो मामला स्क्रूटनी में जा सकता है.
इसमें अघोषित इनकम, संदिग्ध लेनदेन, फर्जी दावे, बेनामी संपत्ति, विदेशी परिसंपत्तियां या अन्य तरह की टैक्स गड़बड़ियां शामिल हो सकती हैं.
नोटिस कब तक भेजा जा सकता है?
CBDT के दिशानिर्देशों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में दाखिल किए गए रिटर्न के लिए धारा 143(2) के तहत नोटिस आमतौर पर 30 जून 2026 तक जारी किया जाना चाहिए. अगर तय समय सीमा के भीतर नोटिस नहीं भेजा जाता है, तो सामान्य स्थिति में उस रिटर्न को इन प्रावधानों के तहत स्क्रूटनी में नहीं लिया जा सकेगा.
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