गोल्ड में महिलाओं का बढ़ा भरोसा, एक साल में तीन गुना हुआ ETF निवेश
महिला निवेशकों का म्यूचुअल फंड में भरोसा बढ़ रहा है. मार्च 2026 तक 1.61 करोड़ महिलाएं निवेशक थीं. खास बात यह है कि गोल्ड ETF में महिलाओं का निवेश एक साल में करीब तीन गुना बढ़ा है.
Highlights
- महिलाओं का गोल्ड ETF निवेश एक साल में करीब तीन गुना बढ़ा
- मार्च 2026 तक 1.61 करोड़ महिलाएं म्यूचुअल फंड निवेशक बनीं
- महिलाओं की कुल म्यूचुअल फंड संपत्ति ₹15.88 लाख करोड़ पहुंची
भारत में महिलाओं की निवेश आदतों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. अब महिलाएं सिर्फ बचत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि म्यूचुअल फंड और दूसरे बाजार आधारित निवेश विकल्पों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं. खास तौर पर गोल्ड ETF महिलाओं की पसंद बनकर उभरा है. मार्च 2026 तक गोल्ड ETF का हिस्सा महिलाओं के पैसिव फंड पोर्टफोलियो में बढ़कर 16.4 प्रतिशत हो गया, जो मार्च 2025 में 6.4 प्रतिशत था.
म्यूचुअल फंड में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
AMFI-Crisil Factbook 2026 के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत में करीब 1.61 करोड़ महिलाएं म्यूचुअल फंड निवेशक थीं. कुल निवेशकों की संख्या करीब 6.09 करोड़ रही. आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय जागरूकता और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म की आसान पहुंच के साथ महिलाओं की बाजार में भागीदारी लगातार बढ़ रही है.
महिलाओं के म्यूचुअल फंड निवेश का कुल AUM भी पिछले पांच वर्षों में काफी बढ़ा है. मार्च 2021 में यह करीब ₹5.84 लाख करोड़ था, जो मार्च 2026 में बढ़कर ₹15.88 लाख करोड़ हो गया. यानी पांच साल में इसमें करीब ₹10.04 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई.
गोल्ड ETF में क्यों बढ़ा निवेश?
सोने में लगातार बेहतर प्रदर्शन और बाजार में अनिश्चितता के बीच महिलाओं का गोल्ड ETF की तरफ रुझान बढ़ा है. गोल्ड ETF महिलाओं के लिए सोने में निवेश करने का एक आसान तरीका है, जिसमें भौतिक सोना खरीदने और रखने की जरूरत नहीं होती.
मार्च 2026 तक महिलाओं के पैसिव फंड पोर्टफोलियो में गोल्ड ETF की हिस्सेदारी 16.4 प्रतिशत हो गई. एक साल पहले यह सिर्फ 6.4 प्रतिशत थी. यानी हिस्सेदारी में करीब ढाई गुना बढ़ोतरी हुई है.
पूरे रिटेल निवेशक वर्ग में भी गोल्ड ETF की हिस्सेदारी बढ़ी है. वित्त वर्ष 2026 में रिटेल निवेशकों के गोल्ड ETF एसेट में हिस्सा बढ़कर 14.9 प्रतिशत हो गया, जो वित्त वर्ष 2021 में 4.6 प्रतिशत था.
वित्त वर्ष 2026 में गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश
गोल्ड ETF में निवेश का बढ़ता रुझान सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है. वित्त वर्ष 2026 में गोल्ड ETF में कुल शुद्ध निवेश ₹69,000 करोड़ रहा. यह पिछले पांच वित्त वर्षों में आए कुल करीब ₹30,213 करोड़ के निवेश के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितता और सोने-चांदी की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया है. इन्हें पोर्टफोलियो में जोखिम कम करने और विविधता बढ़ाने के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है.
उम्र के साथ बदलती है निवेश की पसंद
महिला निवेशकों की पसंद उम्र के साथ बदलती दिखाई देती है. 25 साल से कम उम्र की महिलाओं के निवेश में इक्विटी फंड की हिस्सेदारी 88.3 प्रतिशत थी. 25-44 साल की महिलाओं के लिए यह 76.2 प्रतिशत रही. 45-58 साल की उम्र में इक्विटी की हिस्सेदारी घटकर 64.8 प्रतिशत और 58 साल से अधिक उम्र में 51.2 प्रतिशत रह गई.
वहीं, उम्र बढ़ने के साथ हाइब्रिड और डेट फंड में निवेश बढ़ता है. 58 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के पोर्टफोलियो में हाइब्रिड फंड की हिस्सेदारी 29.6 प्रतिशत रही, जबकि 25 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह सिर्फ 5.4 प्रतिशत थी.
निवेश में दिख रहा बदलाव
इन आंकड़ों से साफ है कि महिलाएं अब निवेश को सिर्फ बचत के तौर पर नहीं देख रही हैं. युवा महिलाएं ज्यादा जोखिम लेकर इक्विटी में निवेश कर रही हैं, जबकि उम्र बढ़ने के साथ वे हाइब्रिड, डेट और गोल्ड जैसे अपेक्षाकृत स्थिर विकल्पों की ओर बढ़ रही हैं. यह बदलाव भारत में महिलाओं की बढ़ती वित्तीय जागरूकता और निवेश क्षमता को दिखाता है.
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