बिना PAN Card के ही मिल जाएगा 80 लाख तक का लोन, जानिए कैसे

बिना PAN Card के बड़े कैश लोन और कानूनी पारदर्शिता को लेकर एक अहम सवाल हालिया फैसले के बाद चर्चा में है. मद्रास हाईकोर्ट ने 7 जनवरी 2026 के अपने निर्णय में साफ किया कि अगर कोई व्यक्ति promissory note पर बड़ी रकम कैश में देता है, तो बाद में अदालत में PAN विवरण उजागर करने से इनकार करना अपने आप में कर जांच का आधार नहीं बनता. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि Income Tax Act की Section 269ST का उल्लंघन होने की आशंका अलग विषय है, और इसका मूल्यांकन टैक्स अथॉरिटीज का दायरा है.

कोर्ट ने संतुलन बनाते हुए कहा कि न्यायालय सीधे PAN खुलासा कराने के लिए बाध्य नहीं करेगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी टैक्स विभाग को सूचित कर सकता है. इस संदर्भ में पहले से मौजूद Supreme Court of India के मार्गदर्शन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया और कर प्रवर्तन के बीच सीमाएं रेखांकित की गई हैं. यह फैसला बताता है कि हर कैश ट्रांजैक्शन स्वतः कर जांच नहीं बनता, बल्कि प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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