टोक्यो की तर्ज पर बदलेगा दिल्ली-NCR, 2041 तक बसेंगे 8 नए स्मार्ट शहर; 30 मिनट में होगी कनेक्टिविटी

दिल्ली-एनसीआर के लिए तैयार क्षेत्रीय योजना 2041 के मसौदे में 5 से 8 नए स्मार्ट शहर बसाने का प्रस्ताव है. इन शहरों को यूपी, हरियाणा में विकसित किया जाएगा. योजना का लक्ष्य दिल्ली पर आबादी का दबाव कम करना और प्रमुख एनसीआर शहरों को 30 मिनट की सुपरफास्ट कनेक्टिविटी से जोड़ना है. इसके लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की जरूरत होगी.

दिल्ली एनसीआर Image Credit: AI

Delhi NCR Plan 2041: आने वाले सालों में दिल्ली-एनसीआर का नक्शा पूरी तरह बदल सकता है. क्षेत्रीय योजना 2041 (Regional Plan 2041) के मसौदे में दिल्ली-एनसीआर के भीतर 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही ऐसी परिवहन व्यवस्था विकसित करने की योजना है, जिससे दिल्ली से एनसीआर के प्रमुख शहरों तक करीब 30 मिनट में पहुंचा जा सके. इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य बढ़ती आबादी, आवास की मांग और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव से निपटना है.

2030 तक टोक्यो को पीछे छोड़ सकता है दिल्ली-NCR

योजना के मसौदे के मुताबिक, साल 2030 तक दिल्ली-एनसीआर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहरी समूह बन सकता है. इसी संभावना को देखते हुए विकास का दायरा दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय पूरे एनसीआर क्षेत्र में फैलाने की रणनीति तैयार की गई है. आने वाले सालों में आबादी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी से बढ़ोतरी होगी, जिसके लिए नए शहरी केंद्रों की जरूरत पड़ेगी.

यूपी, हरियाणा और राजस्थान में बसेंगे नए शहर

मसौदे में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है. इन शहरों को प्रमुख आर्थिक गतिविधियों और परिवहन कॉरिडोर के आसपास बसाया जाएगा ताकि लोगों को रोजगार, आवास और सुविधाएं एक ही क्षेत्र में मिल सकें.

इन नए शहरों में आधुनिक स्मार्ट नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. योजना के अनुसार, इन्हें महाराष्ट्र के औरंगाबाद इंडस्ट्रियल सिटी (Auric) की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जो दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत बनाया गया एक आधुनिक ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट है.

दिल्ली पर कम होगा आबादी का दबाव

योजना का मकसद केवल नए शहर बसाना नहीं है, बल्कि दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या और आवासीय दबाव को कम करना भी है. इसके लिए मौजूदा शहरों और बस्तियों के पुनर्विकास यानी ब्राउनफील्ड डेवलपमेंट को भी बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है.

30 मिनट में NCR के बड़े शहरों तक पहुंचने का लक्ष्य

इस योजना का सबसे आकर्षक हिस्सा “30 मिनट NCR” की अवधारणा है. इसके तहत दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख शहरों के बीच सुपरफास्ट और सीमित स्टॉप वाली सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की संभावनाओं पर काम किया जाएगा.

योजना में सुझाव दिया गया है कि दिल्ली से एनसीआर के प्रमुख शहरों तक सुपरफास्ट ट्रेनों के जरिए करीब 30 मिनट में पहुंच सुनिश्चित की जाए. इसके अलावा पारंपरिक रेल नेटवर्क के माध्यम से लगभग एक घंटे की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी विकसित करने की भी बात कही गई है.

परिवहन योजना में शामिल प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं.

  • सुपरफास्ट ट्रेनों के जरिए 30 मिनट की कनेक्टिविटी.
  • पारंपरिक रेल सेवाओं से लगभग एक घंटे की यात्रा.
  • सड़क मार्ग से 2 से 3 घंटे के भीतर क्षेत्रीय संपर्क.
  • क्षेत्रीय आवागमन के लिए हेली-टैक्सी सेवाओं की संभावनाओं का अध्ययन.

यमुना सिटी और पंचग्राम परियोजनाओं को मिल सकता है बढ़ावा

मसौदे में उत्तर प्रदेश सरकार की उस परियोजना का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र को लगभग 20 लाख लोगों की क्षमता वाले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है.

इसके अलावा हरियाणा सरकार की केएमपी एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित पंचग्राम परियोजना को भी भविष्य के टाउनशिप मॉडल के रूप में शामिल किया जा सकता है. ये दोनों परियोजनाएं आगे चलकर एनसीआर की व्यापक विकास योजना का हिस्सा बन सकती हैं.

काम और पढ़ाई के पास ही मिलेगा घर

लोगों की रोजाना लंबी दूरी की यात्रा कम करने के लिए योजना में संस्थानों के भीतर आवासीय सुविधाओं को बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया गया है. मसौदे के अनुसार, संस्थानों को आवंटित भूमि का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा वहां काम करने या पढ़ाई करने वाले लोगों के लिए आवासीय उपयोग में लाया जा सकता है.

इसके तहत अपार्टमेंट, छात्रावास और ट्रांजिट आवास जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे “वॉक टू वर्क” और “वॉक टू स्टडी” जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा मिलेगा.

20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की जरूरत

योजना के अनुसार, अगले 15 सालों में दिल्ली-एनसीआर को 3 करोड़ से अधिक एक्स्ट्रा आबादी के लिए आवास, परिवहन और नागरिक सुविधाओं का इंतजाम करना होगा. इसके लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है.

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