मुंबई से गुरुग्राम तक महंगे घरों की होड़, ₹271 करोड़ का पेंटहाउस
भारत में अल्ट्रा-लग्जरी घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है. ₹20 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री दोगुनी हुई है. मुंबई के साथ गुरुग्राम भी बड़े खरीदारों का नया ठिकाना बन रहा है, जहां करोड़ों के सौदे हो रहे हैं.
Highlights
- भारत में लग्जरी घरों की मांग बढ़ी
- गुरुग्राम में करोड़ों के घरों की बिक्री
- मुंबई अब भी सबसे महंगी प्रॉपर्टी का गढ़
भारत के रियल एस्टेट बाजार में अमीर और आम खरीदारों के बीच का अंतर लगातार बढ़ता दिख रहा है. एक तरफ बड़ी संख्या में लोग किफायती घर की तलाश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के बेहद अमीर लोग करोड़ों और सैकड़ों करोड़ रुपये की कीमत वाले लग्जरी घर खरीद रहे हैं. 2025 से अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी की खरीदारी में तेजी देखने को मिली है.
कारोबारी परिवारों, उद्यमियों और बड़े अधिकारियों ने देश के कुछ सबसे महंगे घरों पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं. हालिया सबसे चर्चित सौदों में उद्यमी मानव सरदाना की गुरुग्राम के DLF The Dahlias में करीब ₹271 करोड़ की पेंटहाउस खरीद शामिल है. खास बात यह है कि अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी का यह बाजार अब सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रह गया है.
₹20 करोड़ से ऊपर के घरों की बिक्री दोगुनी
Knight Frank के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में देश के प्रमुख शहरों में ₹20 करोड़ से ₹50 करोड़ कीमत वाले 371 घर बिके. एक साल पहले इसी अवधि में सिर्फ 181 घर बिके थे. यानी इस कैटेगरी में सालाना आधार पर 105% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. मुंबई इस बाजार में सबसे आगे रही. कुल 371 बिक्री में 214 सौदे अकेले मुंबई में हुए. इसके बाद ₹50 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले घरों का बाजार आता है. जनवरी से जून 2026 के दौरान देशभर में ऐसे 35 घर बिके, जिनमें 23 मुंबई और 12 NCR में थे.
₹100 करोड़ के घर अब इतने दुर्लभ नहीं
अब ₹100 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री भी पहले की तरह असामान्य नहीं रही. ANAROCK के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देशभर में ₹40 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले 59 घर बिके थे. इनकी कुल कीमत करीब ₹4,754 करोड़ रही. इनमें कम से कम 17 सौदे ₹100 करोड़ से ज्यादा के थे. इन 59 सौदों में 52 मुंबई में हुए थे. इससे पता चलता है कि देश के सबसे महंगे घरों का बाजार लंबे समय से मुंबई के आसपास ही केंद्रित रहा है.
गुरुग्राम में बढ़ी अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी की मांग
अब गुरुग्राम तेजी से इस बाजार में अपनी जगह बना रहा है. DLF The Dahlias में कई बड़े सौदे हो चुके हैं. निवेशक मधुसूदन केला ने यहां करीब ₹121 करोड़ का अपार्टमेंट खरीदा, जबकि Berkshire Hathaway के वाइस चेयरमैन अजीत जैन ने करीब ₹85 करोड़ का अपार्टमेंट खरीदा. मानव सरदाना की ₹271 करोड़ की खरीद ने गुरुग्राम के अल्ट्रा-लग्जरी बाजार को और चर्चा में ला दिया है.
India Sotheby’s International Realty और CRE Matrix के मुताबिक, 2025 में गुरुग्राम में ₹10 करोड़ या उससे ज्यादा कीमत वाले घरों के 1,494 सौदे हुए. इनकी कुल कीमत करीब ₹24,120 करोड़ रही. 2023 में यह आंकड़ा सिर्फ ₹4,004 करोड़ था. यानी दो साल में इस बाजार का ट्रांजैक्शन वैल्यू करीब छह गुना बढ़ गया.
मुंबई अब भी सबसे महंगे घरों का गढ़
गुरुग्राम भले ही तेजी से आगे बढ़ रहा हो, लेकिन देश के सबसे महंगे घरों के मामले में मुंबई अभी भी सबसे आगे है. ANAROCK और 360 ONE Wealth के आंकड़ों के अनुसार, 24 महीनों में वर्ली में ₹40 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले 30 से अधिक घर बिके और इनकी कुल कीमत ₹5,500 करोड़ से ज्यादा रही. USV की चेयरपर्सन लीना गांधी तेवारी ने 2025 में वर्ली के Naman Xana में दो डुप्लेक्स करीब ₹639 करोड़ में खरीदे. तान्या दुबाश ने भी इसी प्रोजेक्ट में करीब ₹226 करोड़ का डुप्लेक्स खरीदा.
वहीं राधी नवानी ने समुद्र के सामने वाला अपार्टमेंट करीब ₹162.2 करोड़ में खरीदा. उदय कोटक और उनके परिवार की वर्ली में कई महंगी खरीदारी की कुल कीमत ₹400 करोड़ से ज्यादा बताई गई है.
महंगे घरों की सप्लाई भी बढ़ रही
महंगे घरों की मांग बढ़ने के साथ डेवलपर्स भी इस बाजार में बड़े प्रोजेक्ट ला रहे हैं. Knight Frank के मुताबिक, ₹20-50 करोड़ कीमत वाले बिना बिके घरों की इन्वेंट्री एक साल में 52% बढ़ी है. Sunteck Realty ने ₹100 करोड़ से ₹500 करोड़ तक कीमत वाले अल्ट्रा-लग्जरी घरों वाले प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है. इनकी कुल ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू करीब ₹20,000 करोड़ है.
₹1 करोड़ से ऊपर के घरों की हिस्सेदारी बढ़ी
बदलाव सिर्फ अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट में नहीं है. Knight Frank के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में ₹1 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल आवासीय बिक्री में बढ़कर 54% हो गई, जो एक साल पहले 49% थी. ₹1-2 करोड़ कीमत वाले घर सबसे ज्यादा बिके और इस कैटेगरी में 50,488 यूनिट बिकीं. दूसरी तरफ ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 19% रह गई.
इससे साफ है कि भारत का प्रॉपर्टी बाजार दो अलग-अलग हिस्सों में बंटता जा रहा है. एक तरफ किफायती घरों की तलाश करने वाले खरीदार हैं, तो दूसरी तरफ ऐसे अमीर खरीदार हैं जो अपने पसंदीदा पते के लिए ₹100 करोड़ से ₹600 करोड़ तक खर्च करने को तैयार हैं.
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