बैंक ऑफ बड़ौदा पर BR शेट्टी ने ठोका 15 अरब डॉलर का मुकदमा, शेयरों में 3 फीसदी की गिरावट; क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि बैंक और उसके कुछ अधिकारियों ने उनके ग्रुप की कंपनियों से जुड़े धोखाधड़ी वाले लेन-देन में मदद की. बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में 3 फीसदी की गिरावट आई. यह निफ्टी 100 पर सबसे अधिक गिरने वाला शेयर बन गया.

बैंक ऑफ बड़ौदा Image Credit: GettyImages

Highlights

  • बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि उसे औपचारिक रूप से मुकदमा नहीं सौंपा गया .
  • 15 अरब डॉलर का मुआवजा मांगने वाला मुकदमा दायर.
  • यह निफ्टी 100 पर सबसे अधिक गिरने वाला शेयर बन गया.

बुधवार को शुरुआती कारोबार में बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में 3 फीसदी की गिरावट आई. यह निफ्टी 100 पर सबसे अधिक गिरने वाला शेयर बन गया. यह गिरावट तब आई जब NMC हेल्थकेयर के फाउंडर बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस सरकारी बैंक और 25 अन्य लोगों के खिलाफ 15 अरब डॉलर का मुआवजा मांगने वाला मुकदमा दायर किया. बैंक ने कहा कि उसे अभी तक मुकदमे की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन वह आरोपों का मजबूती से सामना करेगा.

बाजार की सुस्त शुरुआत के बीच यह गिरावट देखी गई. सुबह 9:18 बजे, सेंसेक्स 51.72 अंक या 0.07 फीसदी गिरकर 72,982.06 पर था, जबकि निफ्टी 33.30 अंक या 0.15 फीसदी गिरकर 22,688.65 पर आ गया. मार्केट ब्रेड्थ पॉजिटिव रही, जिसमें 1,299 शेयरों में बढ़त और 1,148 शेयरों में गिरावट देखी गई.

BR शेट्टी ने 15 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की

NMC हेल्थकेयर और UAE एक्सचेंज के फाउंडर शेट्टी ने कथित तौर पर बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य प्रतिवादियों से 15 अरब डॉलर (लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये) के हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया है. उनका आरोप है कि बैंक और उसके कुछ अधिकारियों ने उनके ग्रुप की कंपनियों से जुड़े धोखाधड़ी वाले लेन-देन में मदद की.

याचिका का हवाला देने वाली रिपोर्ट्स के अनुसार, शेट्टी ने प्रत्यक्ष नुकसान, व्यापार के अवसरों के नुकसान सहित परिणामी नुकसान और कथित तौर पर प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के मुआवजे के तौर पर 5-5 अरब डॉलर की मांग की है. उन्होंने दावा किए गए हर्जाने पर सालाना 18 फीसदी ब्याज की भी मांग की है.

बैंक पर क्या है आरोप?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने कथित सप्लायर्स से जुड़े खातों के माध्यम से फंड के डायवर्जन में मदद की, एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग अलर्ट की ठीक से जांच नहीं की और अनधिकृत लेन-देन की अनुमति दी.

शेट्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि लोन लेने और उनके खिलाफ देनदारियां तय करने के लिए जाली हस्ताक्षरों वाली पर्सनल गारंटी का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने बैंकिंग रिकॉर्ड और आंतरिक अनुपालन दस्तावेजों के खुलासे की मांग की है. इन आरोपों की अदालत द्वारा पुष्टि नहीं की गई है.

बैंक ऑफ बड़ौदा ने आरोपों को खारिज किया

मुकदमे की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि उसे औपचारिक रूप से मुकदमा नहीं सौंपा गया है और वह उन आरोपों पर टिप्पणी नहीं कर सकता जिनकी अदालत में अभी जांच नहीं हुई है.

बैंक ने कहा, ‘अगर और जब बैंक को मुकदमा सौंपा जाएगा, तो बैंक मजबूती से अपना बचाव करेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा.’

बैंक ने कहा कि वह लगभग 2,800 करोड़ रुपये के बकाया के लिए भारत और UAE में शेट्टी के खिलाफ रिकवरी की कार्यवाही कर रहा है और उसने उनके खिलाफ कई आदेश भी हासिल किए हैं.

बैंक ने कर्नाटक हाई कोर्ट के 2021 के उस आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें शेट्टी को अपनी संपत्ति बेचने से रोका गया था और कहा कि इसके बाद उन्होंने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के सामने दिवालियापन का दावा किया था.

न्यूयॉर्क में खारिज हो गया था शेट्टी का मुकदमा

बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह भी बताया कि न्यूयॉर्क में शेट्टी द्वारा दायर एक मुकदमा, जिसमें इसी तरह के आरोप लगाए गए थे, जुलाई 2024 में खारिज कर दिया गया था. बैंक ने कहा कि धोखाधड़ी, गलत तरीके से ट्रेडिंग और धोखाधड़ी वाली ट्रेडिंग के आरोपों को लेकर अबू धाबी ग्लोबल मार्केट कोर्ट में शेट्टी और NMC के पूर्व एग्जीक्यूटिव प्रशांत मंगहट के खिलाफ कार्यवाही में फैसला भी सुरक्षित रखा गया था.

बैंक का $600 मिलियन का NMC सेटलमेंट

यह नया मुकदमा उस घटना के तीन महीने से कुछ अधिक समय बाद आया है, जब बैंक ऑफ बड़ौदा NMC ग्रुप की कंपनियों और उनके जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स से जुड़े मुकदमे को सुलझाने के लिए $600 मिलियन (लगभग 5,700 करोड़ रुपये) का भुगतान करने पर सहमत हुआ था.

जुलाई 2026 के सेटलमेंट ने NMC हेल्थ के डूबने से बैंक के खिलाफ उठे दावों का समाधान किया. यह घटना अरबों डॉलर के ऐसे कर्ज का पता चलने के बाद हुई थी जिसके बारे में पहले जानकारी नहीं दी गई थी.

मांगी गई रकम का दावा

बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि इस सेटलमेंट में किसी गलत काम या देनदारी को स्वीकार नहीं किया गया था. इसके वित्तीय असर को जून 2026 तिमाही के नतीजों में शामिल किया गया था. बैंक ने दोहराया कि सेटलमेंट के बाद अबू धाबी ग्लोबल मार्केट कोर्ट में उसके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई थी.

हालांकि, खबरों के अनुसार शेट्टी ने तर्क दिया है कि वह सेटलमेंट का हिस्सा नहीं थे और इससे उनके अलग दावे खत्म नहीं होते हैं. नए मुकदमे में मांगी गई 15 अरब डॉलर की राशि नुकसान का दावा है, न कि बैंक के खिलाफ कोई तय देनदारी.

कब का और क्या है पूरा मामला?

UAE की हेल्थकेयर कंपनी NMC हेल्थकेयर और UAE एक्सचेंज के फाउंडर डॉ. BR शेट्टी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के खिलाफ यह मुकदमा दायर किया है. यह एक कमर्शियल केस है. यह केस उनके पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर, डॉ. शिशिर शेट्टी के जरिए दायर किया गया. प्रतिवादियों में BoB, उसके अधिकारी और NMC के पूर्व एग्जीक्यूटिव प्रशांत और प्रोमोथ मंगहट शामिल हैं.

बार एंड बेंच ने केस के हवाले से बताया कि शेट्टी ने समाज सेवा के कामों के लिए 2012 और 2017 के बीच कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज से दूरी बना ली थी. आरोप है कि इस दौरान मंगहट भाइयों ने कंपनी के फाइनेंस पर पूरा कंट्रोल कर लिया था.

कॉपी किए गए सिग्नेचर

आरोप है कि उन्होंने फर्जी सप्लायर कंपनियों का इस्तेमाल करके फंड का गबन किया. शेट्टी का दावा है कि उनकी मर्जी के बिना लोन गारंटी पर उनके इलेक्ट्रॉनिक टेम्पलेट से उनके सिग्नेचर कॉपी किए गए थे. शेट्टी ने साफ किया कि यह केस मुख्य रूप से बैंक के खिलाफ दायर किया गया है. जो न केवल वादी के साथ हुई धोखाधड़ी का मूकदर्शक था, बल्कि वह जरिया भी था जिसके जरिए इसे अंजाम दिया गया.

शेट्टी का आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने राउंड-ट्रिपिंग ट्रांजैक्शन किए, यानी फर्जी शेल सप्लायर के लिए अकाउंट बनाना और कंपनी को मुनाफे में दिखाने के लिए पैसे को घुमा-फिराकर इधर-उधर करना.

इंटरनल अलर्ट को किया गया नजरअंदाज

इसके अलावा, बैंक ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले 100 से अधिक इंटरनल अलर्ट को नजरअंदाज किया और ग्रुप के कर्ज को कानूनी ऑडिटर्स से छिपाने के लिए लग्जरी इलेक्ट्रॉनिक्स और रोलेक्स घड़ी समेत गैर-कानूनी तोहफे स्वीकार किए. आरोप है कि बैंक ने ऑडिटर्स अर्न्स्ट एंड यंग (EY) से लगभग AED 980 मिलियन ($250 मिलियन) का कॉर्पोरेट कर्ज छिपाने के लिए बैलेंस कन्फर्मेशन सर्टिफिकेट को भी बांट दिया था.

शेट्टी का दावा है कि जब 2019 के आखिर में गड़बड़ियों का पता चला, तो बैंक ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को गलत रिटर्न जमा करके उन्हें बलि का बकरा बना दिया.

लुक आउट सर्कुलर

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, बैंक ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से एक लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करवाया, जिसने उन्हें तीन साल से अधिक समय तक भारत में ही रोक कर रखा, जब तक कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने इसे रद्द नहीं कर दिया.

मुकदमे में कहा गया है, ‘जब धोखाधड़ी का पता चला, तो प्रतिवादी नंबर 1 (बैंक) ने उन्हें डिफॉल्टर, अपनी देनदारियों से भागने वाला व्यक्ति और उसी धोखाधड़ी का मुख्य सूत्रधार बता दिया, जिसके वे खुद शिकार हुए थे.’

मुकदमे में यह भी बताया गया है कि जहां BoB ने अबू धाबी में NMC के एडमिनिस्ट्रेटर्स द्वारा किए गए दावों को निपटाने के लिए लगभग $600 मिलियन (₹5,700 करोड़) का भुगतान किया, वहीं वह उन्हीं गारंटी के आधार पर शेट्टी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखे हुए है.

यह भी पढ़ें: Jio IPO की धूम! 20 अरब डॉलर से अधिक की बोलियां मिलने की उम्मीद, कतार में निवेशक; बनेगा सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.