Nifty-Sensex का बदल गया समीकरण! एक में तेजी, दूसरे में सुस्ती, जानें दोनों इंडेक्स में क्यों दिख रहा फर्क?

शेयर बाजार में सोमवार से Closing Auction Session यानी CAS की शुरुआत हुई. इसके बाद सोमवार को कारोबार के आखिरी दो मिनट में निफ्टी में करीब 200 अंकों का अचानक उछाल देखने को मिला. इसके मुकाबले सेंसेक्स पर इस तरह की तेज हलचल का असर काफी कम रहा.

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Highlights

  • भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर सेंसेक्स और निफ्टी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला.
  • बाजार जानकारों के मुताबिक, नए CAS के कारण दिन के आखिरी हिस्से में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
  • खासकर बड़े संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री, शॉर्ट कवरिंग और बड़े शेयरों में पोजिशन बदलने से क्लोजिंग कीमतों पर ज्यादा असर पड़ सकता है.

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर सेंसेक्स और निफ्टी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. एक तरफ सेंसेक्स करीब 450 अंक की तेजी के साथ 78,800 के ऊपर कारोबार करता नजर आया, वहीं निफ्टी 50 में लगभग कोई खास हलचल नहीं रही. सुबह 11:07 बजे निफ्टी करीब 20 अंक ऊपर था. बाजार में यह अंतर ऐसे समय देखने को मिल रहा है, जब ट्रेडर्स नए Closing Auction Session (CAS) को लेकर सतर्क हैं. इसके अलावा बाजार की नजर भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के MPC फैसले पर भी थी, जिसमें रेपो रेट को ज्यों का त्यों रखा गया.

CAS की शुरुआत के बाद बढ़ी बाजार की चिंता

शेयर बाजार में सोमवार से Closing Auction Session यानी CAS की शुरुआत हुई. इसके बाद सोमवार को कारोबार के आखिरी दो मिनट में निफ्टी में करीब 200 अंकों का अचानक उछाल देखने को मिला. इसके मुकाबले सेंसेक्स पर इस तरह की तेज हलचल का असर काफी कम रहा. इसके बाद मंगलवार को निफ्टी की एक्सपायरी के दिन बाजार की शुरुआत मिली-जुली रही. हालांकि, कारोबार खत्म होते-होते दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए. निफ्टी में गिरावट ज्यादा रही और यह 159 अंक गिरकर 24,615 पर बंद हुआ. वहीं, सेंसेक्स अपेक्षाकृत कम गिरा और 78,429 के स्तर पर बंद हुआ. बुधवार को इसके उलट तस्वीर देखने को मिली. सेंसेक्स 450 अंक से ज्यादा चढ़कर 78,800 के ऊपर पहुंच गया, जबकि निफ्टी लगभग सपाट रहा.

CAS क्या है और इससे निफ्टी पर ज्यादा असर क्यों?

Closing Auction Session के तहत शेयरों में सामान्य लगातार कारोबार दोपहर 3:15 बजे खत्म हो जाता है. इसके बाद 20 मिनट का ऑक्शन सेशन होता है, जिसमें शेयरों का ऑफिशियल क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है. NSE के मुताबिक, CAS के पहले दिन इस सेशन में सामान्य प्री-ओपन कॉल ऑक्शन के मुकाबले ज्यादा ट्रेडिंग गतिविधि देखने को मिली. इस ऑक्शन में 515 ट्रेडिंग सदस्यों ने हिस्सा लिया और 56,773 अलग-अलग PAN से ऑर्डर लगाए गए.

BSE ने भी बताया कि लॉन्च के दिन 400 से ज्यादा ट्रेडिंग सदस्यों ने 200 से ज्यादा शेयरों में इस ऑक्शन में हिस्सा लिया.

एक अहम बात यह है कि कई निफ्टी कंपनियां F&O सेगमेंट में शामिल हैं. इन शेयरों का CAS में तय होने वाला क्लोजिंग भाव सीधे निफ्टी के अंतिम स्तर को प्रभावित करता है. इसलिए सामान्य कारोबार खत्म होने के बाद भी क्लोजिंग ऑक्शन में इन शेयरों की कीमतों में बदलाव से निफ्टी में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.

निफ्टी और सेंसेक्स में अंतर क्यों बढ़ रहा है?

बाजार जानकारों के मुताबिक, नए CAS के कारण दिन के आखिरी हिस्से में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. खासकर बड़े संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री, शॉर्ट कवरिंग और बड़े शेयरों में पोजिशन बदलने से क्लोजिंग कीमतों पर ज्यादा असर पड़ सकता है. नई व्यवस्था में क्लोजिंग के दौरान बड़े ऑर्डर और संस्थागत गतिविधियों का असर ज्यादा दिखाई दे सकता है. इससे बाजार के आखिरी मिनटों में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है. इसके अलावा, जानकारों के मुताबिक, इसका असर खास तौर पर F&O में पोजिशन रखने वाले ट्रेडर्स पर पड़ रहा है. कुछ मामलों में रिटेल निवेशकों की पोजिशन की जबरन स्क्वायर-ऑफ भी हुई है.

क्या यह बाजार के लिए बड़ी चिंता है?

ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल इसे नई व्यवस्था से जुड़ी शुरुआती दिक्कत माना जा सकता है. एक्सचेंज और बाजार रेगुलेटर को इन अंतरों और तकनीकी दिक्कतों को दूर करना होगा. अच्छी बात यह है कि अभी इसका असर मुख्य रूप से F&O सेगमेंट और प्रमुख इंडेक्स में दिख रहा है. इसे बाजार की बुनियादी कमजोरी नहीं माना जा रहा है. उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था और फाइनेंशियल मार्केट का ब्रॉडर आउटलुक मजबूत बना हुआ है और इससे लंबी अवधि के निवेशकों की सोच में बदलाव नहीं होना चाहिए.

क्या निफ्टी और सेंसेक्स का यह अंतर जल्द खत्म होगा?

ET के मुताबिक, दोनों इंडेक्स में दिख रहा यह अंतर संभवत: सेशन के अंत में एक बार हुए बड़े प्राइस मूवमेंट की वजह से है. जब भी किसी बाजार में पहली बार क्लोजिंग ऑक्शन की व्यवस्था लागू की जाती है, तो शुरुआत में कुछ समय के लिए इस तरह का अंतर देखने को मिल सकता है. बाद में यह अंतर सामान्य तौर पर जल्दी खत्म हो जाता है. जिन बाजारों में पहली बार क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था लागू हुई है, वहां शुरुआती दौर में इस तरह की छोटी अवधि की गड़बड़ी देखने को मिली है. जानकारों का ऐसा मानना है कि यह अंतर ज्यादा समय तक नहीं रहना चाहिए.

RBI के फैसले के बाद बाजार की नजर CAS पर

बाजार के लिए बुधवार का CAS इसलिए भी अहम है क्योंकि यह RBI MPC के फैसले के बाद पहला Closing Auction Session होगा. RBI ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने का फैसला किया है. अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि बुधवार को CAS के दौरान निफ्टी 50 और सेंसेक्स में कितना अंतर रहता है. अगर निफ्टी में एक बार फिर कारोबार के अंतिम हिस्से में तेज उतार-चढ़ाव आता है, तो इससे नई क्लोजिंग व्यवस्था को लेकर सवाल और बढ़ सकते हैं.

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