10 सबसे बड़े शेयरों में FII की हिस्सेदारी 20 साल के निचले स्तर पर, एक्सिस बैंक से लेकर RIL तक हैं शामिल
DSP म्यूचुअल फंड के डेटा के अनुसार, भारत की टॉप 10 लिस्टेड कंपनियों में FII की औसत हिस्सेदारी गिरकर फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के लगभग 34 फीसदी पर आ गई है. यह अलग तरह का ट्रेंड (कॉन्ट्रेरियन सेटअप) सिर्फ भारत के मार्केट तक ही सीमित नहीं है.
पिछले दो दशक में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी कभी इतनी कम नहीं रही है, जितनी अब देखने को मिल रही है. अब यह कम हिस्सेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनियों का वैल्यूएशन लंबे समय के औसत से नीचे आ गया है. इसे कुछ फंड मैनेजर ‘स्टॉक-पिकर’ का ‘कॉन्ट्रेरियन मोमेंट’ (बाजार की आम राय के उलट फैसला लेने का मौका) कह रहे हैं.
फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन
DSP म्यूचुअल फंड के डेटा के अनुसार, भारत की टॉप 10 लिस्टेड कंपनियों में FII की औसत हिस्सेदारी गिरकर फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के लगभग 34 फीसदी पर आ गई है. यह पिछले दो दशकों में सबसे निचला स्तर है और ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान देखे गए 37 फीसदी के निचले स्तर से भी कम है.
गिरावट के ट्रेंड की बड़ी वजह
FII की हिस्सेदारी में लगातार कमी उस बड़े ट्रेंड की एक मुख्य वजह है जिसके तहत भारत की सबसे बड़ी कंपनियों की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में हिस्सेदारी अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल मार्केट कैप में टॉप 10 स्टॉक्स की हिस्सेदारी घटकर 17 फीसदी रह गई है, जबकि दिसंबर 2019 में यह 39 फीसदी के पीक पर थी.
किस हद तक आई गिरावट
स्टॉक-लेवल का डेटा गिरावट की हद को दिखाता है. जून 2014 के मुकाबले मार्च 2026 में Axis Bank में FII की हिस्सेदारी फ्री-फ्लोट मार्केट कैप के 68 फीसदी से घटकर 44 फीसदी हो गई है. Kotak Mahindra Bank में 59 फीसदी से घटकर 36 फीसदी, HDFC Bank में 44 फीसदी से घटकर 38 फीसदी और TCS में 63 फीसदी से घटकर 34 फीसदी हो गई है.
Infosys, ICICI Bank और Reliance Industries में भी 2014 के लेवल के मुकाबले FII की हिस्सेदारी में कमी आई है, हालांकि ICICI Bank और Reliance जैसी कुछ कंपनियों के लिए यह गिरावट कम रही है.
टॉप 10 शेयरों में एफआईआई (FII) की हिस्सेदारी रिकॉर्ड निचले स्तर पर
| कंपनी | मार्च 2026 | दिसंबर 2023 | दिसंबर 2019 | जून 2014 | मार्च 2009 |
|---|---|---|---|---|---|
| एक्सिस बैंक | 44% | 57% | 56% | 68% | 41% |
| भारती एयरटेल | 54% | 50% | 44% | 51% | 63% |
| एचडीएफसी बैंक | 38% | 45% | 39% | 44% | 32% |
| आईसीआईसीआई बैंक | 34% | 35% | 36% | 40% | 35% |
| इन्फोसिस | 30% | 35% | 37% | 49% | 42% |
| आईटीसी | 12% | 14% | 15% | 19% | 14% |
| कोटक महिंद्रा बैंक | 36% | 51% | 57% | 59% | 60% |
| एलएंडटी (लार्सन एंड टुब्रो) | 19% | 25% | 19% | 20% | 12% |
| रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) | 36% | 42% | 47% | 36% | 31% |
| टीसीएस | 34% | 45% | 57% | 63% | 42% |
| औसत | 34% | 40% | 41% | 45% | 37% |
कम हिस्सेदारी वाली बात ठोस वैल्यूएशन आंकड़ों से साबित होती है. 30 जून, 2026 तक निफ्टी टॉप 10 इक्वल वेट इंडेक्स की हर कंपनी अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन पर या उससे नीचे ट्रेड कर रही है.
रिटर्न ऑन इक्विटी और PE
Infosys का ट्रेलिंग PE 13.5x है, जबकि 10 साल का औसत 23.3x है. TCS का 14.0x है, जबकि औसत 26.9x है. HDFC Bank का प्राइस-टू-बुक 2.1x है, जबकि औसत 3.7x है और भारती एयरटेल का EV/EBITDA 10.8x है जबकि औसत 13.7x है. साथ ही, इसी बास्केट की 70 फीसदी कंपनियां अपने 10 साल के औसत के बराबर या उससे ज्यादा रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) दे रही हैं, TCS का ROE 52% है जबकि 10 साल का औसत 42 फीसदी है, भारती एयरटेल का 22 फीसदी है जबकि औसत 11 फीसदी है और Infosys का 32 फीसदी है जबकि औसत 30% है.
इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स
यह अलग तरह का ट्रेंड (कॉन्ट्रेरियन सेटअप) सिर्फ भारत के मार्केट तक ही सीमित नहीं है. MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में शामिल चार मुख्य बाजारों में से, भारत और चीन ही ऐसे दो बाजार हैं जिनका वेटेज 5% से अधिक है और जो अपने 10 साल के औसत PE के मुकाबले डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे हैं.
भारत 2.39 फीसदी डिस्काउंट पर और चीन 10.98 फीसदी डिस्काउंट पर, जबकि ताइवान और दक्षिण कोरिया अपने ऐतिहासिक औसत PE के मुकाबले क्रमशः 85.09% और 71.52% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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