4 महीने का सूखा खत्म, विदेशी निवेशकों की शेयर बाजार में हुई वापसी; जुलाई में FPIs ने किया ₹15157 करोड़ का निवेश
लगातार 4 महीनों की बिकवाली के बाद Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में वापसी करते हुए अब तक 15,157 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है. बेहतर घरेलू आर्थिक संकेतों, रुपये की स्थिरता और वैश्विक जोखिम कम होने से विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है.
Foreign Portfolio Investors: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का रुझान एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है. लगातार चार महीनों तक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने के बाद Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने जुलाई में एक बार फिर खरीदारी का रुख अपनाया है. बेहतर घरेलू आर्थिक संकेतों, रुपये की स्थिरता और वैश्विक स्तर पर जोखिम कम होने के चलते विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयरों में 15,157 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है. इससे बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा मजबूत होता दिखाई दे रहा है. Central Depository Services (India) Ltd (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में आई यह खरीदारी ऐसे समय में हुई है, जब इससे पहले चार महीनों तक विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे थे.
पिछले 4 महीने का ये है ट्रेंड
जून में FPIs ने 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी. इस बिकवाली के दौर से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था. हालांकि, जुलाई में खरीदारी की वापसी के बावजूद वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से कुल 2.6 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी अधिक है.
क्यों बदला FPIs का रुख
मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने PTI को बताया कि जुलाई में विदेशी निवेश की वापसी के पीछे कई अहम कारण हैं. उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर रिस्क लेने की क्षमता बढ़ी है, जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से एनर्जी की कीमतों को लेकर चिंताएं घटी हैं और भारत की मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक बुनियाद पर निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ा है.
वहीं जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि भारत की मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति और रुपये की स्थिरता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है. इसके अलावा, वैश्विक सेमीकंडक्टर कारोबार में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण कुछ निवेश भारत की ओर भी स्थानांतरित हुए हैं.
वैल्यूएशन भी बने आकर्षण का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ समय से बाजार में आई स्थिरता के बाद कई भारतीय कंपनियों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक आकर्षक हो गए हैं. इसी वजह से विदेशी निवेशक अब चुनिंदा मजबूत और क्वालिटी कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं.
हालांकि, हिमांशु श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि जुलाई में दिखी यह तेजी सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन आगे विदेशी निवेश का रुख वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भारत की विकास दर पर निर्भर करेगा. यदि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है या घरेलू आर्थिक संकेतक कमजोर पड़ते हैं, तो विदेशी निवेश का फ्लो फिर प्रभावित हो सकता है.
डेट मार्केट में भी बढ़ रही दिलचस्पी
सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि भारतीय डेट मार्केट में भी विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ी है. जुलाई में FPIs ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए 6,625 करोड़ रुपये और जनरल रूट के जरिए 3,228 करोड़ रुपये का निवेश डेट सिक्योरिटीज में किया है.
वीके विजयकुमार के मुताबिक, सरकार द्वारा डेट इनवेस्टमेंट्स के टैक्स नियमों में किए गए बदलावों से भारतीय बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बने हैं. इससे न केवल डेट मार्केट में निवेश बढ़ा है, बल्कि रुपये की स्थिरता को भी समर्थन मिला है.
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