ग्रीन हाइड्रोजन की दौड़ में 3 कंपनियां आगे, जानिए वारी से एनटीपीसी तक की पूरी कहानी

ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक बाजार 2035 तक ₹22 लाख करोड़ पहुंचने का अनुमान है. भारत के 2030 लक्ष्य के बीच वारी एनर्जीज, अडवैत एनर्जी ट्रांजिशन्स और एनटीपीसी की योजनाओं पर निवेशकों की नजर है.

ग्रीन हाइड्रोजन

Highlights

  • ग्रीन हाइड्रोजन बाजार 2035 तक 22 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान
  • वारी, अडवैत और एनटीपीसी अलग-अलग परियोजनाओं में निवेश कर रही हैं
  • निवेश से पहले मूल्यांकन, ऑर्डर बुक और परियोजनाओं के जोखिम समझें

ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के तौर पर देखा जा रहा है. इसका इस्तेमाल उन उद्योगों में किया जा सकता है, जहां प्रदूषण कम करना और पारंपरिक ईंधन की जगह दूसरे विकल्प अपनाना मुश्किल है. इनमें स्टील, खाद, केमिकल और भारी उद्योग शामिल हैं.

वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार का आकार 2025 में करीब 12 अरब डॉलर था. अनुमान है कि 2035 तक यह बढ़कर 231 अरब डॉलर यानी लगभग 22 लाख करोड़ रुपये हो सकता है. इस दौरान बाजार की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर करीब 34 फीसदी रहने का अनुमान है.

भारत ने भी इस सेक्टर के लिए बड़ा लक्ष्य रखा है. सरकार का उद्देश्य 2030 तक हर साल 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है. इसके लिए इलेक्ट्रोलाइजर, रिन्यूएबल एनर्जी, भंडारण और परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे में निवेश की जरूरत होगी.

  1. वारी एनर्जीज: इलेक्ट्रोलाइजर बनाने की तैयारी

वारी एनर्जीज सोलर पैनल बनाने के कारोबार से आगे बढ़कर स्वच्छ ऊर्जा के दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है. कंपनी गुजरात के डूंगरी में एक गीगावाट क्षमता का इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बना रही है. इसे वित्त वर्ष 2027 में व्यावसायिक उत्पादन के लिए तैयार करने का लक्ष्य है.

इलेक्ट्रोलाइजर ऐसी मशीन है, जो बिजली की मदद से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करती है. जब इसमें रिन्यूएबल एनर्जी से बनी बिजली इस्तेमाल होती है, तो ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है.

कंपनी इलेक्ट्रोलाइजर कारोबार में करीब 676 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना पर काम कर रही है. इसके अलावा इन्वर्टर और ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग में भी निवेश किया जा रहा है. कंपनी को इलेक्ट्रोलाइजर और हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़ी सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के तहत सहायता मिली है. इसके ग्रीन हाइड्रोजन कारोबार का शुरुआती ऑर्डर बुक करीब 155 करोड़ रुपये बताया गया है.

  1. अडवैत एनर्जी ट्रांजिशन्स: स्वदेशी तकनीक पर फोकस

अडवैत एनर्जी ट्रांजिशन्स ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर, फ्यूल सेल और इंजीनियरिंग से जुड़ी सेवाओं पर काम कर रही है. कंपनी ने इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक के लिए साझेदारी भी की है.

कंपनी अलग-अलग क्षमता वाले इलेक्ट्रोलाइजर मॉड्यूल बनाती है. इन्हें जोड़कर बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. मार्च 2026 में कंपनी ने अहमदाबाद में 30 मेगावाट क्षमता वाली इलेक्ट्रोलाइजर सेमी-असेंबली यूनिट शुरू की थी.

कंपनी ने ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट पर भी काम किया है. इसके अलावा ग्रीन अमोनिया और फ्यूल सेल से जुड़े कारोबार में विस्तार की योजना है. हालांकि, इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर कमाई कब शुरू होगी, इस पर निवेशकों को ध्यान देना चाहिए.

  1. एनटीपीसी: बड़े प्रोजेक्ट पर दांव

एनटीपीसी बिजली उत्पादन के अपने पारंपरिक कारोबार के साथ स्वच्छ ऊर्जा में भी निवेश कर रही है. कंपनी आंध्र प्रदेश के पुडिमदाका में ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित कर रही है. इस परियोजना में करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना है.

इस हब में ग्रीन हाइड्रोजन के साथ ग्रीन केमिकल और निर्यात से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है. कंपनी ने लेह में हाइड्रोजन से चलने वाली बसों और गुजरात के कावास में प्राकृतिक गैस नेटवर्क में हाइड्रोजन मिलाने जैसे प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं.

एनटीपीसी की सबसे बड़ी ताकत उसका बड़ा कारोबार और परियोजनाओं में निवेश करने की क्षमता है. हालांकि, कंपनी ने संकेत दिया है कि ग्रीन हाइड्रोजन का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में अभी समय लग सकता है.

निवेश से पहले इन जोखिमों को समझें

ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में लंबी अवधि में विकास की संभावनाएं हैं, लेकिन केवल बड़े बाजार के अनुमान के आधार पर किसी शेयर में निवेश करना सही नहीं होगा. परियोजनाओं के समय पर पूरा होने, लागत, ऑर्डर मिलने और वास्तविक मुनाफे पर नजर रखना जरूरी है.

वारी एनर्जीज के पास शुरुआती ऑर्डर और इलेक्ट्रोलाइजर विस्तार की योजना है. अडवैत एनर्जी ट्रांजिशन्स तकनीक और शुरुआती परियोजनाओं पर ध्यान दे रही है, जबकि एनटीपीसी बड़े स्तर के प्रोजेक्ट विकसित कर रही है.

इन कंपनियों की कारोबारी रणनीति और जोखिम अलग-अलग हैं. निवेश से पहले शेयर का मौजूदा मूल्यांकन, कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं का आकलन करें. ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाएं आकर्षक हैं, लेकिन इससे जुड़े शेयरों में रिटर्न की गारंटी नहीं है.

यह भी पढ़ें- अक्टूबर में IPO की कतार! Jio Platforms समेत 12 कंपनियां जुटाएंगी पैसा; जानें कौन-सा इश्यू कब खुलेगा

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. money9 अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.