भारत में लौट सकते हैं 25 अरब डॉलर के FII! HSBC ने बताया क्यों बढ़ सकता है विदेशी निवेश

HSBC की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आने वाले समय में करीब 25 अरब डॉलर तक का FII निवेश लौट सकता है. ब्रोकरेज का मानना है कि यदि वैश्विक Emerging Market Funds अपनी हिस्सेदारी को Neutral स्तर तक बढ़ाते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में विदेशी कैपिटल का बड़ा फ्लो देखने को मिल सकता है.

FII Image Credit: Canva/ Money9

Foreign Investment India: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है. ब्रोकरेज फर्म HSBC का मानना है कि आने वाले समय में भारत में करीब 25 अरब डॉलर (लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये) तक का विदेशी निवेश वापस आ सकता है. ब्रोकरेज का कहना है कि यदि वैश्विक इमर्जिंग मार्केट फंड्स भारत में अपनी हिस्सेदारी को मौजूदा अंडरवेट स्तर से बढ़ाकर न्यूट्रल कर दें, तो भारतीय शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में विदेशी कैपिटल फ्लो देखने को मिल सकता है.

HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल 80 फीसदी से अधिक सक्रिय वैश्विक इमर्जिंग मार्केट फंड्स ने भारत में अपनी हिस्सेदारी सामान्य स्तर से कम रखी हुई है. यदि ये फंड केवल अपनी हिस्सेदारी को सामान्य स्तर तक भी बढ़ाते हैं, तो भारतीय बाजार में लगभग 25 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है.

AI ट्रेड से हुई थी निकासी

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों ने AI थीम से जुड़े एशियाई बाजारों में निवेश बढ़ाने के लिए भारत से कैपिटल निकाली थी. हालांकि, अब इन बाजारों में निवेश का स्तर काफी अधिक हो चुका है और वहां उतार-चढ़ाव भी बढ़ गया है.

HSBC का मानना है कि AI आधारित बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि विदेशी निवेशकों की नजर एक बार फिर भारतीय बाजार पर टिक सकती है.

जून के बाद लौटने लगे विदेशी निवेशक

रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलाव के शुरुआती संकेत पहले ही दिखाई देने लगे हैं. जून के मध्य से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 3.6 अरब डॉलर का निवेश किया है. इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार में लगभग 6 फीसदी की तेजी भी दर्ज की गई.

विदेशी निवेशकों ने इस दौरान सबसे अधिक निवेश फाइनेंशियल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और हेल्थकेयर सेक्टर में किया. इसके अलावा, वैश्विक फंड भारत और चीन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान में पहले से ही उनका निवेश काफी ऊंचे स्तर पर है.

भारत क्यों बन रहा है पसंद?

HSBC का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है. दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव काफी कम है. इसके अलावा, घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में लगातार निवेश आ रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश फिर से बढ़ा है, जिसमें स्मॉल कैप और मिड कैप फंड्स में अच्छी हिस्सेदारी रही. ऐसे में यदि विदेशी निवेशक भी लगातार खरीदारी करते हैं, तो बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है.

कंपनियों के नतीजों से भी मिला सहारा

HSBC ने कहा कि भारत में कंपनियों के वित्तीय नतीजे भी बाजार के पक्ष में जा रहे हैं. जुलाई के अंत तक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली करीब 73 फीसदी कंपनियों ने या तो बाजार के अनुमान के अनुरूप प्रदर्शन किया या उससे बेहतर नतीजे दिए.

इसके अलावा, नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ जून में बढ़कर 18.3 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग भी उम्मीद से बेहतर रही. कई सेक्टरों के लिए आय के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं.

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