Infosys से तेज ग्रोथ, लेकिन महंगा है वैल्यूएशन; बन रहा कमाई का इंजन; इन 3 IT स्टॉक पर रखें नजर
जून 2026 तिमाही में Persistent Systems, Coforge और Mphasis ने Infosys और HCL Tech के मुकाबले तेज रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की. AI आधारित प्रोजेक्ट, डिजिटल मॉडर्नाइजेशन और विदेशी अधिग्रहण इन कंपनियों की ग्रोथ के प्रमुख आधार रहे. हालांकि कर्मचारी खर्च और कमजोर मुनाफे ने चिंता बढ़ाई है.
Highlights
- जून तिमाही में 3 मिड कैप IT शेयरों ने Infosys से तेज रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की.
- तेज ग्रोथ के बावजूद कर्मचारी खर्च और घटते मुनाफे ने बढ़ाई चिंता.
- इन तीनों शेयरों का P E Infosys से काफी ज्यादा है, इसलिए वैल्यूएशन अहम जोखिम है.
IT सेक्टर में AI का असर अब केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है. जून 2026 तिमाही में कुछ Mid Cap IT कंपनियों ने रेवेन्यू ग्रोथ के मामले में Infosys और HCL Tech जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ा है. Persistent Systems, Coforge और Mphasis की ग्रोथ को AI से जुड़े प्रोजेक्ट और नए सौदों से सपोर्ट मिला है. हालांकि इन कंपनियों के शेयरों का वैल्यूएशन Infosys और HCL Tech से काफी ज्यादा है. ऐसे में निवेशकों के लिए सवाल है कि तेज ग्रोथ इस प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराती है या नहीं.
Mid Cap IT
जून 2026 तिमाही में Mid Cap IT कंपनियों ने बड़ी IT कंपनियों की तुलना में बेहतर रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई. Persistent Systems का कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू 3.8 फीसदी तिमाही आधार पर बढ़ा. Coforge की ग्रोथ 5.2 फीसदी और Mphasis की ग्रोथ 2.1 फीसदी रही. इसके मुकाबले Infosys का रेवेन्यू 1 फीसदी बढ़ा. HCL Tech के कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू में 0.5 फीसदी की गिरावट आई. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि Mid Cap कंपनियों का कारोबार Infosys और HCL Tech से काफी छोटा है.
Persistent Systems
Persistent Systems का जून तिमाही में रेवेन्यू 3.8 फीसदी बढ़कर 4303 करोड़ रुपये रहा. कंपनी को AI आधारित प्रोजेक्ट्स से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है. तिमाही में इसका कुल नया कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू यानी TCV करीब 1.14 अरब डॉलर रहा, जो पिछली तिमाही के 600.8 मिलियन डॉलर से काफी ज्यादा है. कंपनी को एक बड़ी ग्लोबल टेक कंपनी से 650 मिलियन डॉलर से ज्यादा का छह साल से अधिक अवधि वाला रणनीतिक सौदा भी मिला है. हालांकि सब कॉन्ट्रैक्टिंग लागत बढ़ने से मुनाफे पर दबाव आया.
Coforge
Coforge का कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू जून तिमाही में 5.2 फीसदी बढ़कर 5527 करोड़ रुपये रहा. कंपनी को हाल में हुए Encora अधिग्रहण के इंटीग्रेशन से भी ग्रोथ मिली. Coforge AI का इस्तेमाल ग्लोबल ग्राहकों के लिए इंजीनियरिंग और दूसरी सेवाएं देने में कर रही है. लेकिन कंपनी के कर्मचारी खर्च का रेवेन्यू में हिस्सा 2.6 फीसदी बढ़कर 56.5 फीसदी हो गया. कर्मचारियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी. इसका असर मुनाफे पर पड़ा और नेट प्रॉफिट करीब 20 फीसदी घटकर 531.7 करोड़ रुपये रह गया.
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मार्जिन पर दबाव
Mphasis ने जून 2026 तिमाही में कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू में 2.1 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की और यह 4384 करोड़ रुपये रहा. कंपनी ने AI आधारित मॉडर्नाइजेशन डील्स में मजबूत ग्रोथ की बात कही है. तिमाही में TCV 461 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछली तिमाही के 407 मिलियन डॉलर से ज्यादा है. हालांकि कर्मचारी खर्च बढ़ने से मुनाफे पर असर पड़ा. कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 4 फीसदी घटकर 489.5 करोड़ रुपये रहा. यानी AI से डील फ्लो मजबूत है, लेकिन इसका फायदा अभी मुनाफे में पूरी तरह नहीं दिख रहा है.
निवेशकों को देना पड़ रहा है प्रीमियम
इन तीनों कंपनियों की सबसे बड़ी चुनौती इनका वैल्यूएशन है. Persistent Systems करीब 43.5 गुना P E पर कारोबार कर रहा है. Coforge का P E करीब 40.2 गुना और Mphasis का करीब 23.5 गुना है. इसके मुकाबले Infosys का P E करीब 15.1 गुना और HCL Tech का करीब 20.3 गुना है. यानी निवेशकों को Mid Cap IT कंपनियों की तेज AI ग्रोथ के लिए बडा प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है.
निवेशकों के लिए क्या समझना जरूरी
Persistent Systems, Coforge और Mphasis ने जून तिमाही में Infosys और HCL Tech की तुलना में तेज रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है. AI आधारित कारोबार और विदेशी अधिग्रहण इन कंपनियों के लिए ग्रोथ का बड़ा आधार बन रहे हैं. लेकिन तीनों में कर्मचारी लागत और मुनाफे का दबाव भी दिखाई दे रहा है. इसके अलावा इनका P E वैल्यूएशन बडी IT कंपनियों से काफी ज्यादा है. इसलिए निवेशकों के लिए केवल AI थीम देखना पर्याप्त नहीं होगा. AI ग्रोथ के साथ मुनाफा, मार्जिन और वैल्यूएशन पर भी नजर रखना जरूरी है.
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