F&O Traders Alert: ट्रेडिंग वैल्यू नहीं, ऐसे निकलेगा टर्नओवर, ITR भरते समय ऐसे करें कैलकुलेशन
F&O ट्रेडर्स के लिए ITR फाइलिंग में टर्नओवर की सही कैलकुलेशन बेहद जरूरी है.जानकारो के मुताबिक F&O टर्नओवर कुल ट्रेड वैल्यू नहीं होता, बल्कि फ्यूचर्स में लाभ और नुकसान के अंतर तथा ऑप्शंस में नियमों के अनुसार प्रीमियम और लाभ नुकसान को शामिल कर निकाला जाता है.
Highlights
- एफ एंड ओ ट्रेडिंग में टर्नओवर कुल ट्रेड वैल्यू के बराबर नहीं होता है.
- फ्यूचर्स में फायदे और नुकसान के अंतर से टर्नओवर की कैलकुलेशन होती है.
- ऑप्शंस में प्रीमियम और लाभ या नुकसान को कैलकुलेशन में शामिल किया जाता है.
F&O यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग करने वालों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय टर्नओवर की सही कैलकुलेशन करना बेहद जरूरी है. सामान्य कारोबार की तरह F&O में टर्नओवर कुल ट्रेड वैल्यू के आधार पर तय नहीं होता है. टैक्स नियमों के तहत इसकी कैलकुलेशन अलग तरीके से की जाती है. टर्नओवर की सही कैलकुलेशन से यह तय होता है कि ट्रेडर पर टैक्स ऑडिट लागू होगा या नहीं. साथ ही इससे सही ITR फॉर्म चुनने और कारोबार से जुड़े खर्च और नुकसान को क्लेम करने में भी मदद मिलती है.जानकार F&O ट्रेडर्स को रिटर्न दाखिल करने से पहले अपने सभी ट्रेड रिकॉर्ड ध्यान से जांचने की सलाह दी है.
F&O में टर्नओवर कैसे तय होता है
जानकारों के मुताबिक, F&O ट्रेडिंग में टर्नओवर कुल ट्रेड की वैल्यू से तय नहीं होता है. फ्यूचर्स में टर्नओवर निकालने के लिए ट्रेड से हुए फायदे और नुकसान के अंतर को देखा जाता है. वहीं ऑप्शंस में बेचे गए ऑप्शन पर मिले प्रीमियम को भी कैलकुलेशन में शामिल किया जाता है. ट्रेडर के लिए यह समझना जरूरी है कि टर्नओवर केवल कमाई का आंकड़ा नहीं है. इसका सीधा असर टैक्स ऑडिट और ITR से जुड़ी अनुपालन प्रक्रिया पर पड़ सकता है. इसलिए रिटर्न दाखिल करते समय इसकी कैलकुलेशन सावधानी से करनी चाहिए.
टर्नओवर की गलत कैलकुलेशन से हो सकती है परेशानी
F&O ट्रेडर्स के लिए टर्नओवर की गलत कैलकुलेशन आगे चलकर टैक्स से जुड़ी परेशानी पैदा कर सकती है. सही टर्नओवर तय होने से यह पता चलता है कि ट्रेडर के लिए टैक्स ऑडिट जरूरी है या नहीं. इसके अलावा कारोबार से जुड़े खर्च और नुकसान को क्लेम करने की प्रक्रिया भी इससे प्रभावित होती है. ट्रेडर्स को अपने सभी लेनदेन का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना चाहिए. जरूरत पड़ने पर टैक्स एक्सपर्ट या चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद लेना भी सही कदम हो सकता है.
अलग तरीके से होती है कैलकुलेशन
F&O टर्नओवर की कैलकुलेशन आईसीएआई की टैक्स ऑडिट गाइडलाइन के अनुसार की जानी चाहिए. फ्यूचर्स में आम तौर पर फायदे और नुकसान के अंतर को जोड़कर टर्नओवर निकाला जाता है. ऑप्शंस में कुल लाभ या नुकसान के साथ ऑप्शन बेचने पर मिले प्रीमियम को भी शामिल किया जाता है. सही टर्नओवर से टैक्स ऑडिट की जरूरत और सही ITR फॉर्म का फैसला करने में मदद मिलती है.
F&O से कमाई किस तरह मानी जाती है
F&O ट्रेडिंग को गैर सट्टा कारोबार (Non-speculative business) माना जाता है. इसलिए इससे होने वाली कमाई या नुकसान को कारोबार से होने वाली इनकम के तौर पर दिखाया जाता है. ऐसी इनकम को ITR 3 में रिपोर्ट किया जाता है. F&O ट्रेडर्स को अपने कारोबार से जुड़े खर्च और नुकसान का भी सही रिकॉर्ड रखना चाहिए. गलत जानकारी या गलत टर्नओवर के कारण टैक्स विभाग की ओर से सवाल या विवाद की स्थिति बन सकती है.
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31 अगस्त से पहले रिकॉर्ड जरूर जांचें
F&O ट्रेडर्स के लिए 31 अगस्त की टैक्स ऑडिट की डेडलाइन को ध्यान में रखना जरूरी है. ट्रेडर्स को अपने टर्नओवर की कैलकुलेशन दोबारा जांचनी चाहिए और ट्रेडिंग रिकॉर्ड का मिलान करना चाहिए. अगर किसी तरह की उलझन है तो टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर होगा. टर्नओवर की सही कैलकुलेशन से सही ITR फॉर्म चुनने और टैक्स नियमों का पालन करने में मदद मिलेगी. इससे गलत जानकारी, टैक्स नोटिस, जुर्माने और भविष्य में होने वाले टैक्स विवाद से बचने में भी मदद मिल सकती है.
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