₹3000 से ज्यादा के UPI पेमेंट छोड़ देंगे 53% लोग! बदल सकता है डिजिटल पेमेंट का तरीका

सरकार UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है. हालांकि इसका सीधा शुल्क ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर पड़ेगा. हाल ही में एक सर्वे में पता चला है कि अगर चार्ज लगा तो 53 फीसदी लोग 3 हजार रुपए से बड़े ट्रांजैक्शन के लिए यूपीआई का इस्तेमाल नहीं करेंगे.

यूपीआई पेमेंट Image Credit: Money9live/Canva

Highlights

  • UPI पर MDR शुल्क वापस ला सकती सरकार.
  • 53 फीसदी लोग छोड़ सकते 3000 रुपए से बड़े ट्रांजैक्शन.
  • मर्चेंट्स पर पड़ेगा बोझ.

अगर केंद्र सरकार पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में प्रस्तावित बदलावों को मंज़ूरी देती है तो यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के आधे से ज़्यादा यूज़र 3000 रुपए से ज़्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए पेमेंट के दूसरे तरीकों पर स्विच कर सकते हैं क्योंकि यूपीआई ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है. इन बदलावों से सरकार सेक्शन 10A के तहत जीरो MDR प्रोविजन को हटाकर UPI पर MDR लागू कर सकेगी. यह प्रोविज़न अभी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) को नोटिफाइड डिजिटल पेमेंट पर फीस लेने से रोकता है.

खास बात यह है कि बिल में UPI इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर्स के लिए कोई फीस नहीं है, इसका मतलब है कि इसका बोझ मर्चेंट्स पर पड़ेगा. कस्टमर्स के लिए, इसका मतलब है कि MDR की वजह से कोई एक्स्ट्रा चार्ज या ट्रांज़ैक्शन फीस नहीं लगनी चाहिए.

सर्वे में लोगों ने दिए ये जवाब

मंगलवार को जारी लोकलसर्किल्स सर्वे में भारत के 322 जिलों से 45,000 से ज़्यादा जवाब मिले हैं. जवाबों से पता चलता है कि अगर बड़े व्यापारियों पर MDR लगाया जाता है, तो 53 फीसदी लोग 3000 से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए UPI का इस्तेमाल नहीं करेंगे. इनमें से 27 फीसदी ने कहा कि वह क्रेडिट कार्ड, 14 फीसदी डेबिट कार्ड और 12 फीसदी बैंक ट्रांसफर या कैश का इस्तेमाल करेंगे.

18 फीसदी यूजर ने कहा कि वह यूपीआई का इस्तेमाल तभी जारी रखेंगे जब व्यापारी फ़ीस का भुगतान खुद करेंगे, जबकि 12 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर उन्हें चार्ज देना पड़ा, तब भी वह यूपीआई का इस्तेमाल करते रहेंगे. सर्वे के मुताबिक, 14 फीसदी ने कहा कि उनका फ़ैसला फ़ीस की रकम पर निर्भर करेगा. यह सर्वे पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट के सेक्शन 10A में बदलाव के सरकार के प्रस्ताव के बाद आया है, जो अभी बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को नोटिफाइड डिजिटल पेमेंट मोड्स पर MDR चार्ज करने से रोकता है. प्रस्तावित बदलाव के तहत, केंद्र के पास यह बताने का अधिकार होगा कि कौन से पेमेंट मोड्स ऐसे चार्ज से मुक्त रहेंगे.

क्या है Merchant Discount Rates?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेगुलेट किया जाने वाला, मर्चेंट डिस्काउंट रेट या MDR वह फीस है जो बिजनेस कस्टमर्स द्वारा किए गए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के लिए बैंकों और PSPs को देते हैं. 2020 से यह फीस यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए 0 फीसदी है क्योंकि केंद्र सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना चाहती थी और कस्टमर्स और मर्चेंट्स के लिए कोई MDR जरूरी नहीं किया था.

ऐसे काम करता है सिस्टम

एक कस्टमर क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर किसी आइटम के लिए 1000 रुपए का पेमेंट करता है, इसमें से, एक छोटा परसेंटेज काटकर दोनों तरफ के बैंकों के बीच बांट दिया जाता है, जबकि मर्चेंट को नेट अमाउंट मिलता है.
अभी UPI ट्रांजैक्शन के लिए, मर्चेंट्स को पूरा ट्रांजैक्शन अमाउंट मिलता है.

पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी राय देते हुए, पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन और होल-टाइम डायरेक्टर सोनिया एशर ने कहा कि ये बदलाव भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक ज्यादा सस्टेनेबल कमर्शियल फ्रेमवर्क बनाने में मदद कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलाव बैंकों, पेमेंट प्रोसेसर, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (PPI) जारी करने वालों और व्यापारियों के बीच इंसेंटिव को एक साथ लाकर इकोसिस्टम के लिए एक ज्यादा सस्टेनेबल कमर्शियल फ्रेमवर्क बनाने में मदद कर सकते हैं.

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