भारत में एयर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का नया दौर, मिसाइल नहीं अब पूरा सिस्टम बनेगा गेमचेंजर; इन 2 कंपनियों पर रखें नजर

भारत का एयर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है. DAC की 52,000 करोड़ रुपये की AoN मंजूरी के बाद MRSAM, VSHORADS और अन्य एयर डिफेंस परियोजनाओं पर फोकस बढ़ा है. DRDO, BEL और BDL इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

डिफेंस स्टॉक Image Credit: @AI/Money9live

Air Defence Manufacturing: भारत का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है. अब केवल आधुनिक मिसाइल सिस्टम खरीदना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि देश को एक मजबूत मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस आर्किटेक्चर विकसित करने की जरूरत होगी. इसमें केवल मिसाइल ही नहीं, बल्कि रडार, सेंसर, कमांड सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, इंटरसेप्टर, गन, कम्युनिकेशन नेटवर्क और मजबूत सप्लाई चेन की भी अहम भूमिका होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यही क्षेत्र अगले दशक में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है.

केवल मिसाइल से नहीं मिलेगी सुरक्षा

पहले एयर डिफेंस का मुख्य उद्देश्य लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और बैलिस्टिक मिसाइल को रोकना था. लेकिन अब युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल चुका है. छोटे ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, क्रूज मिसाइल, डिकॉय और वन-वे अटैक ड्रोन जैसी नई चुनौतियां सामने आ चुकी हैं.

इन सभी हथियारों की गति, ऊंचाई, आकार और हमला करने का तरीका अलग-अलग होता है. ऐसे में कोई एक मिसाइल सिस्टम सभी खतरों का मुकाबला नहीं कर सकता. इसलिए अब लेयर्ड एयर डिफेंस की जरूरत है, जहां लॉन्ग रेंज, मीडियम रेंज, शॉर्ट रेंज और वेरी शॉर्ट रेंज सिस्टम मिलकर सुरक्षा प्रदान करें. इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी भी अहम भूमिका निभाएंगे.

52,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मिली मंजूरी

जुलाई 2026 में DAC ने करीब 52,000 करोड़ रुपये के डिफेंस एक्विजिशन प्रपोजल को AoN दी. इनमें आकाश तरंग एंटी-अनमैन्ड एरियल व्हीकल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, MRSAM और VSHORADS जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल हैं.

हालांकि, AoN का मतलब कॉन्ट्रैक्ट मिलना नहीं होता. इसके बाद ट्रायल, कमर्शियल नेगोशिएशन, प्रोक्योरमेंट प्रोसेस और कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. इसके बावजूद इसे भविष्य के बड़े डिफेंस ऑर्डर का संकेत माना जाता है.

पब्लिक सेक्टर की रहेगी बड़ी भूमिका

भारत के एयर डिफेंस प्रोग्राम में फिलहाल पब्लिक सेक्टर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. DRDO नई तकनीकों के विकास का नेतृत्व कर रहा है. वहीं BEL रडार, कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम विकसित कर रही है. दूसरी ओर BDL कई गाइडेड मिसाइल प्रोग्राम के प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2023 में रक्षा मंत्रालय ने BDL के साथ 8,160 करोड़ रुपये से अधिक का कॉन्ट्रैक्ट किया था.

यह कॉन्ट्रैक्ट आर्मी के लिए बेहतर आकाश वेपन सिस्टम की सप्लाई के लिए था. इसी अवधि में BEL को 2,841 करोड़ रुपये का मीडियम पावर रडार कॉन्ट्रैक्ट और 1,982 करोड़ रुपये का आकाशतीर ऑटोमेटेड एयर डिफेंस कंट्रोल एंड रिपोर्टिंग सिस्टम विकसित करने का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला.

मेंटेनेंस से भी बनेगा बड़ा बाजार

एयर डिफेंस सिस्टम केवल खरीदने तक सीमित नहीं होता. मिसाइल का इस्तेमाल ट्रेनिंग और युद्ध दोनों में होता है, जिसके बाद उसकी रिप्लेनिशमेंट करनी पड़ती है. इसके अलावा रडार, लॉन्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम और सॉफ्टवेयर को लगातार अपग्रेड करना पड़ता है.

BEL को एयर फोर्स के आकाश मिसाइल सिस्टम की मेंटेनेंस के लिए 593.22 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिलना इस बात का उदाहरण है कि डिफेंस सेक्टर में केवल मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि मेंटेनेंस और अपग्रेड का बाजार भी लगातार बढ़ने वाला है.

शेयरों पर रहेगी नजर

जिस गति से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बदलाव हो रहा है, उसे देखते हुए इस सेक्टर की कंपनियां निवेशकों के रडार पर रहने वाली हैं, खासकर BEL और BDL. यदि शेयरों की बात करें, तो BEL का शेयर गुरुवार को 0.68 फीसदी गिरकर 385 रुपये पर बंद हुआ. वहीं, BDL का शेयर 1.26 फीसदी की गिरावट के साथ 1,246 रुपये पर बंद हुआ.

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