BSE लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप रिकॉर्ड ₹482 लाख करोड़ पार, लेकिन डॉलर के मुकाबले अब भी पीछे
भारतीय शेयर बाजार ने नया इतिहास रच दिया है. BSE में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप पहली बार ₹482.31 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी, कच्चे तेल की नरम कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव कम होने से बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली.
भारतीय शेयर बाजार में जारी शानदार तेजी के दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (म्यूचुअल फंड और शेयरों की कुल वैल्यू) ने नया इतिहास रच दिया है. चौतरफा खरीदारी, कच्चे तेल की घटती कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और विदेशी निवेशकों (FIIs) की जोरदार वापसी के चलते BSE का कुल मार्केट कैप रिकॉर्ड ₹482.31 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है.
अप्रैल की शुरुआत से अब तक इसमें 17 फीसदी का उछाल आया है. इससे पहले यह रिकॉर्ड इसी साल 2 जनवरी 2026 को बना था. हालांकि, डॉलर के लिहाज से देखें तो यह अभी भी सितंबर 2024 के अपने ऑल-टाइम हाई ($5.72 ट्रिलियन) से करीब 12 फीसदी नीचे है.
रिकॉर्ड मार्केट कैप के बाद भी इंडेक्स पीक से दूर
मार्केट कैप में नया रिकॉर्ड बनने के बावजूद प्रमुख इंडेक्स अभी भी अपने पुराने लाइफटाइम हाई को नहीं छू पाए हैं. अप्रैल से अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 8 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, लेकिन वे 2 जनवरी 2026 को बने अपने रिकॉर्ड स्तर से क्रमशः 8.8% और 7.2% नीचे ट्रेड कर रहे हैं.
मिडकैप और स्मॉलकैप में जोश
बाजार में आई इस तेजी की सबसे खास बात यह है कि इसका फायदा सिर्फ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहद व्यापक है.
- मिडकैप: BSE 150 मिडकैप इंडेक्स अप्रैल से 18% उछला है, लेकिन सितंबर 2024 के पीक से 1.7% पीछे है.
- स्मॉलकैप: BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 23% की तेजी आई है, जो अपने रिकॉर्ड स्तर से 4.88% दूर है.
- माइक्रोकैप: सबसे दमदार प्रदर्शन BSE 250 माइक्रोकैप इंडेक्स का रहा, जिसने अप्रैल से 32% से ज्यादा की छलांग लगाकर 2 जुलाई को अपना नया रिकॉर्ड स्तर छू लिया.
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क्यों दौड़ रहा है भारतीय बाजार?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का आकर्षण बढ़ा है. इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- FII की वापसी: पिछले 15 ट्रेडिंग सत्रों से विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं.
- वैश्विक संकेत: ईरान-इजरायल विवाद थमने से भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ है और कच्चे तेल की कीमतें घटी हैं. इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में एआई (AI) शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ने से भी निवेशकों का रुख भारत की तरफ हुआ है.
- सरकारी नीतियां: सरकार और आरबीआई द्वारा विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) पर कैपिटल गेन टैक्स में छूट और ग्लोबल भारतीय प्रवासियों को सीधा मौका देने जैसे फैसलों से सेंटिमेंट मजबूत हुआ है.
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