Premier Energies के शेयर 37% टूटे! सोलर स्टॉक से भागने या निवेश का मौका, फंडामेंटल किया इग्नोर तो होगा पछतावा
Premier Energies के शेयर पिछले एक साल में 37 फीसदी तक टूट चुके हैं, लेकिन कंपनी के बिजनेस आंकड़े अलग कहानी कहते हैं. मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, रिकॉर्ड मुनाफा, बेहतर कैश फ्लो और भारी ऑर्डर बुक यह संकेत देते हैं कि गिरावट फंडामेंटल कमजोरी नहीं, बल्कि बाजार की उम्मीदों में बदलाव का नतीजा हो सकती है.
Premier Energies share price: शेयर बाजार में अक्सर ऐसा होता है कि जो स्टॉक कभी निवेशकों का चहेता रहा हो, जब वही स्टॉक अपने पुराने उच्च स्तर से फिसलता है तो सबसे पहले निवेशकों का भरोसा डगमगाता है. निवेशक पूछने लगते हैं कि क्या कंपनी के कारोबार में सच में कुछ बिगड़ गया है या फिर बाजार ने बस अपनी उम्मीदें कम कर दी हैं. हाल के महीनों में Premier Energies Ltd के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. एक समय तेजी से ऊपर चढ़ने वाला यह शेयर अब अपने शिखर से काफी नीचे आ चुका है. लेकिन असली सवाल यही है कि क्या यह गिरावट कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स के कमजोर होने का संकेत है, या फिर यह सिर्फ वैल्यूएशन और उम्मीदों में बदलाव का नतीजा है.
अगर शेयर की कीमत को कुछ समय के लिए अलग रख दिया जाए और कंपनी के ऑपरेशनल आंकड़ों, वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान दिया जाए, तो Premier Energies की तस्वीर कहीं ज्यादा संतुलित और मजबूत नजर आती है.
शेयर का हाल और बाजार की तुलना
Premier Energies का मार्केट कैप करीब 33,066 करोड़ रुपये है. हालिया कारोबारी सत्र में इसका शेयर 729.95 रुपये पर बंद हुआ, जो एक दिन पहले के मुकाबले करीब 3 फीसदी नीचे रहा. पिछले एक साल में यह स्टॉक लगभग 37 फीसदी तक टूट चुका है, जबकि इसी अवधि में NIFTY 50 ने करीब 11 फीसदी का सकारात्मक रिटर्न दिया है.
दरअसल, कई बार बाजार किसी सेक्टर या थीम को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साह दिखा देता है और बाद में उसी उत्साह को संतुलित करता है. सोलर सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के चक्र से गुजरा है.
कंपनी का बिजनेस मॉडल
Premier Energies को अगर सिर्फ एक सामान्य सोलर EPC कंपनी समझा जाए तो यह बड़ी भूल होगी. कंपनी का असली फोकस सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल के निर्माण पर है. EPC से आने वाला रेवेन्यू इसका बहुत छोटा हिस्सा है. यही वजह है कि कंपनी के मार्जिन भी उन EPC प्लेयर्स से बेहतर हैं, जो केवल प्रोजेक्ट आधारित काम करते हैं.
भारत सरकार की घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां, जैसे ALMM और डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट, Premier Energies के बिजनेस मॉडल के बिल्कुल अनुकूल हैं. कंपनी ने समय रहते खुद को इन नीतियों के अनुरूप ढाल लिया, जिसका फायदा इसके वित्तीय नतीजों में साफ दिखाई देता है.
Premier Energies आज भारत के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माताओं में शामिल है. तीन दशकों से ज्यादा का अनुभव और अमेरिका को भारत से होने वाले सोलर सेल निर्यात में लगभग 100 फीसदी हिस्सेदारी इसे मजबूत स्थान में रखती है.
मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और रिकॉर्ड मुनाफा
वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो Premier Energies की ग्रोथ कहानी काफी ठोस दिखती है. Q2 FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 1,837 करोड़ रुपये रहा, जो Q2 FY25 के 1,527 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है. तिमाही आधार पर भी हल्की बढ़त दर्ज हुई है.
पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने लगभग 47 प्रतिशत की सालाना कंपाउंडिंग दर से बिक्री बढ़ाई है, जो किसी भी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए असाधारण मानी जाएगी.
| अवधि | रेवेन्यू (₹ करोड़) | YoY ग्रोथ | नेट प्रॉफिट (₹ करोड़) | YoY ग्रोथ |
|---|---|---|---|---|
| Q2 FY25 | 1,527 | — | 206 | — |
| Q2 FY26 | 1,837 | +20% | 353 | +71% |
मुनाफे की बात करें तो तस्वीर और भी मजबूत नजर आती है. Q2 FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 353 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 206 करोड़ रुपये था. यानी सालाना आधार पर करीब 71 प्रतिशत की बढ़त. तिमाही आधार पर भी मुनाफे में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह Premier Energies का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही मुनाफा और बिक्री है. पिछले पांच सालों में कंपनी ने लगभग 90 प्रतिशत CAGR से प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की है.
उत्पादन क्षमता और घरेलू बाजार पर निर्भरता
Q2 FY26 में Premier Energies का सोलर सेल उत्पादन 507 मेगावॉट और मॉड्यूल उत्पादन 961 मेगावॉट रहा. दोनों ही सेगमेंट में क्षमता उपयोग करीब 79 प्रतिशत है, जो यह दिखाता है कि कंपनी की फैक्ट्रियां खाली नहीं बैठी हैं.
एक और अहम बात यह है कि कंपनी की 99 प्रतिशत बिक्री घरेलू ग्राहकों से आती है और सिर्फ 1 प्रतिशत एक्सपोर्ट से. इसका मतलब यह है कि कंपनी भू-राजनीतिक तनाव, ट्रेड वॉर या वैश्विक नीतिगत बदलावों से काफी हद तक सुरक्षित है.
बैलेंस शीट, कर्ज और कैश फ्लो की ताकत
किसी भी विस्तार कर रही मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए बैलेंस शीट की मजबूती बहुत अहम होती है. Premier Energies के कुल उधार करीब 1,622 करोड़ रुपये हैं और इसका डेट-टू-इक्विटी अनुपात केवल 0.47x है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिहाज से यह स्तर काफी संतुलित माना जाता है.
कंपनी के पास 3,409 करोड़ रुपये के रिजर्व हैं, जो न केवल भविष्य के विस्तार में काम आएंगे, बल्कि किसी आर्थिक सुस्ती के दौर में भी एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेंगे.
सबसे बड़ी मजबूती कैश जेनरेशन में दिखाई देती है. FY22 में जहां कंपनी का कैश फ्लो फ्रॉम ऑपरेशंस सिर्फ 5 करोड़ रुपये था, वहीं FY25 में यह बढ़कर 1,348 करोड़ रुपये हो गया. इसका साफ मतलब है कि कंपनी का मुनाफा सिर्फ कागजों पर नहीं है, बल्कि असली कैश में बदल रहा है.
| पैरामीटर | स्थिति |
|---|---|
| कुल कर्ज | ₹1,622 करोड़ |
| डेट–टू–इक्विटी रेशियो | 0.47x |
| रिजर्व | ₹3,409 करोड़ |
| ROCE | 41% |
कंपनी के वैल्यूएशन पर एक नजर
Premier Energies ने वर्किंग कैपिटल के मोर्चे पर भी बड़ा सुधार दिखाया है. डेब्टर डेज FY20 में 74 दिन थे, जो FY25 में घटकर 45 दिन रह गए. यानी कंपनी ग्राहकों से तेजी से पैसा वसूल कर पा रही है. इन्वेंटरी डेज जरूर 121 तक बढ़े हैं, लेकिन इसका बड़ा कारण कमजोर मांग नहीं, बल्कि भविष्य की मांग को देखते हुए कच्चे माल का स्टॉक और क्षमता विस्तार है. कंपनी का सप्लायर नेटवर्क मजबूत है, जिससे वह ऊंची इन्वेंटरी के बावजूद सप्लाई चेन जोखिम को संभाल पा रही है.
इन तमाम सुधारों का नतीजा यह है कि Premier Energies का ROCE करीब 41 फीसदी तक पहुंच गया है, जो यह दिखाता है कि कंपनी पूंजी का इस्तेमाल काफी कुशलता से कर रही है.
फिलहाल Premier Energies करीब 29 गुना के P/E पर ट्रेड कर रही है. यह न तो बहुत सस्ता है और न ही जरूरत से ज्यादा महंगा. यह इसके इंडस्ट्री एवरेज के आसपास है और इसके अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे है.
आक्रामक क्षमता विस्तार की योजना
Premier Energies के पास इस समय 3.2 GW की सोलर सेल और 5.1 GW की सोलर मॉड्यूल क्षमता है. कंपनी आंध्र प्रदेश के नायडूपेटा में 7 GW का नया TOPCon सोलर सेल प्लांट बना रही है. सितंबर 2026 तक कंपनी की कुल सेल क्षमता 10.6 GW हो जाएगी.
इस प्लांट का पहला चरण जून 2026 तक चालू हो जाएगा, जबकि बाकी क्षमता सितंबर 2026 तक आएगी. इससे कंपनी भारत के बड़े घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरर्स में शामिल हो जाएगी और ALMM-II के तहत लंबी अवधि की मांग का फायदा उठा सकेगी.
इसके अलावा तेलंगाना के सीतारामपुर में 5.6 GW का नया सोलर मॉड्यूल प्लांट मार्च 2026 तक चालू होगा. इससे वर्टिकल इंटीग्रेशन और मजबूत होगा और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ेगा.
अपस्ट्रीम और नए सेगमेंट में एंट्री
आयात पर निर्भरता घटाने के लिए Premier Energies अब इंगॉट और वेफर मैन्युफैक्चरिंग में भी उतरने जा रही है. नायडूपेटा में 5 GW का इंगॉट-वेफर प्लांट दिसंबर 2027 तक तैयार होगा. यह ALMM-III पॉलिसी के अनुरूप है और लंबे समय में लागत और मार्जिन पर बेहतर नियंत्रण देगा.
कंपनी पुणे में Battery Energy Storage Systems का प्लांट भी लगा रही है, जो जून 2026 तक चालू होगा. इसके अलावा तेलंगाना में एल्यूमिनियम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जा रही है, जिससे सोलर पैनल फ्रेम के लिए जरूरी कच्चा माल घरेलू स्तर पर उपलब्ध होगा.
मजबूत ऑर्डर बुक और अधिग्रहण
सितंबर 2025 तक Premier Energies के पास 9,100 मेगावॉट से ज्यादा के ऑर्डर हैं, जिनकी कुल वैल्यू करीब 13,250 करोड़ रुपये है. लगभग पूरा ऑर्डर बुक घरेलू ग्राहकों से है. इससे यह भरोसा मिलता है कि नई क्षमता के लिए मांग की कमी नहीं होगी.
कंपनी ने इन्वर्टर सेगमेंट में KSolare Energy में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है और ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली Transcon Industries में भी 51 प्रतिशत का अधिग्रहण किया है. इन कदमों से Premier Energies धीरे-धीरे एक पूरी तरह इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर बनने की दिशा में बढ़ रही है.
सोलर सेक्टर पर वैश्विक दबाव
Premier Energies की गिरावट को समझने के लिए पूरे सोलर सेक्टर की हालत देखना जरूरी है. पिछले दो साल में सोलर मॉड्यूल की कीमतें करीब 65 फीसदी तक गिर गई थीं. इससे जबरदस्त प्राइस वॉर हुआ और मार्जिन पर दबाव बढ़ा.
अब कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं. जनवरी 2026 तक मॉड्यूल कीमतें 10-15 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं और अनुमान है कि 2026 के अंत तक 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं. चीन द्वारा VAT एक्सपोर्ट रिबेट खत्म करना, सिल्वर और एल्यूमिनियम जैसी कच्ची धातुओं की कीमतों में तेजी, इन सबका असर पूरी इंडस्ट्री पर पड़ रहा है.
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Premier Energies की मौजूदा स्थिति को देखें तो यह कहना मुश्किल है कि कंपनी के फंडामेंटल्स में कोई बड़ी कमजोरी आई है. रेवेन्यू, मुनाफा, कैश फ्लो और ऑर्डर बुक, सभी मोर्चों पर कंपनी मजबूत दिखती है. हां, आक्रामक विस्तार के चलते एग्जीक्यूशन रिस्क जरूर बढ़ता है.
शेयर की गिरावट ज्यादा तर बाजार की बदली हुई उम्मीदों और पूरे सोलर सेक्टर पर दबाव का नतीजा लगती है, न कि कंपनी के कारोबार के बिगड़ने का संकेत. आगे का रास्ता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि Premier Energies अपने विस्तार को समय पर और लागत नियंत्रण के साथ पूरा कर पाती है या नहीं. अगर ऐसा हुआ, तो बाजार का भरोसा दोबारा लौटने में देर नहीं लगेगी.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.