उतार-चढ़ाव भरे मार्केट में भी चमके ये शेयर, एक सप्ताह में डबल डिजिट में रिटर्न; जानें कौन-कौन हैं शामिल
भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी निफ्टी 500 इंडेक्स के 35 शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत और दिसंबर तिमाही के मिले-जुले नतीजों के बावजूद इन शेयरों में डबल डिजिट तेजी दर्ज की गई. डिफेंस, कैपिटल गुड्स, मेटल और टेलीकॉम सेक्टर के चुनिंदा शेयर इस तेजी के केंद्र में रहे.
Stock market weekly return: पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन इसके बावजूद निफ्टी 500 इंडेक्स के 35 शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया. जियोपॉलिटिकल टेंशन, कमजोर वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और दिसंबर तिमाही के मिले-जुले नतीजों के बीच भी इन शेयरों में दोहरे अंक की तेजी दर्ज की गई. मेटल, डिफेंस, कैपिटल गुड्स और टेलीकॉम सेक्टर के चुनिंदा शेयर इस तेजी के केंद्र में रहे.
डिफेंस और कैपिटल गुड्स शेयरों में तेजी
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद डिफेंस और कैपिटल गुड्स सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली. Budget 2026 में सरकार की ओर से कैपेक्स बढाने की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढाया. Hindustan Copper ने सप्ताह के दौरान करीब 22 फीसदी की बढत के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया.
वहीं Garden Reach Shipbuilders (23.23 फीसदी) और Data Patterns (India) जैसे डिफेंस शेयरों में 21 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. कैपिटल गुड्स सेक्टर में ABB India, GE Vernova T&D India, Siemens Energy India, Hitachi Energy India और Schneider Electric Infrastructure जैसे शेयरों में 14 से 18 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला.
अन्य टॉप परफॉर्मर शेयर
टेलीकॉम सेक्टर में Vodafone Idea के शेयरों में करीब 11.74 फीसदी की तेजी आई. इसके अलावा Jindal Stainless, ऑयल इंडिया, करूर वैश्य बैंक, एसीएमई सोलर होल्डिंग्स, वी-गार्ड इंडस्ट्रीज, एचएफसीएल, अडानी ग्रीन एनर्जी और श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी जैसे शेयरों ने भी 8 से 17 फीसदी तक का साप्ताहिक रिटर्न दिया.
वैश्विक और घरेलू फैक्टर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोपीय यूनियन, भारत, दक्षिण कोरिया और कनाडा पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी, साथ ही ईरान को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने अनिश्चितता बढा दी. घरेलू मोर्चे पर दिसंबर तिमाही के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जहां बढती लेबर लागत के कारण कंपनियों के मुनाफे पर असर दिखा. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा.
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