क्यों गिर रहा भारतीय बाजार, जानिए क्या है वजह?

आज भारतीय बाजार में भीषण गिरावट देखा जा रही है. आज का दिन ब्लैक फ्राइडे जैसा साबित हुआ है. आइए आपको इसके पीछे का कुछ कारण बताते हैं.

भारी गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार Image Credit: GettyImages

हफ्ते का अंतिम कारोबारी दिन यानी आज निफ्टी में भयंकर गिरावट देखने को मिल रही है. आज निफ्टी की मंथली एक्सपायरी भी है. निफ्टी में 1.20 फीसदी की बड़ी गिरावट देखी जा रही है. शुरुआती कारोबार के बाद भारतीय बाजार में भारी बिकवाली देखी जा रही है. सेंसेक्स फिलहाल 827 अंक गिरावट के साथ 79,243 के लेवल पर, वहीं निफ्टी 1 फीसदी से ज्यादा लुढ़कर 24,102 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. ऑटो और मेटल को शेयरों में बिकवाली की होड़ देखने को मिल रही है. आइए आपको इस बड़ी गिरावट का कारण बताते हैं.

कमजोर तिमाही नतीजा

लगातार तिमाही कंपनियों के नतीजे आ रहे हैं. जिससे बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है. इसी क्रम में कल इंडसइंड बैंक के नतीजे आए. जिसके बाद इसके शेयरों में भयंकर वाली गिरावट देखने को मिला. इंडसइंड बैंक के शेयर फिलहाल 18 फीसदी से ज्यादा टूटते दिख रहे हैं. कल हिन्दुस्तान यूनिलीवर के शेयर टूटते दिखे थे. बाजार में इन दिनों तिमाही नतीजों से शेयर टूटते दिख रहे हैं.

FIIs की बिकवाली

बाजार की चाल में विदेशी निवेशकों का बड़ा योगदान होता है. या कहें कि बाजार की चाल भी बदलने की शक्ति रखते हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से FIIs में लगातार बिकवाली देखी जा रही है. पूरे अक्टूबर के महीने में ही विदेशी निवेशकों ने जबरदस्त बिकवाली की है. जिसका नतीजा सबके सामने है. इस महीने में विदेशी निवेशकों ने लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का निकासी की है.

रिटेल निवेशकों में डर का माहौल

तिमाही नतीजों के बाद बाजार के दिग्गज शेयर धराशायी होते दिखे हैं. रिटेल निवेशकों में यह गिरावट देखकर बाजार में बिकवाली करते दिख रहे हैं. जिस तरह से हिन्दुस्तान यूनिलीवर, बजाज ऑटो, रिलायंस और डिक्सन के शेयरों में बिकवाली हो रही है. इसकी साफ-असर निफ्टी पर दिख रहा है.

अमेरिकी चुनाव

अमेरिकी चुनाव को लेकर अनिश्चितता बाजार की धारणा पर भारी पड़ रही है. 5 नवंबर के चुनाव से दो हफ़्ते से भी कम समय पहले, नवीनतम जनमत सर्वेक्षणों के रुझान कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच कड़ी टक्कर दिखा रहे हैं. अगर कमला हैरिस राष्ट्रपित बनती है तो बाइडेन सरकार के व्यापार सारे नीतियों में फेरबदल कर सकती हैं.

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