अनिल अंबानी की कंपनी के शेयर ने भरी उड़ान, लगा अपर सर्किट; 4 दिनों में इतना दिया प्रॉफिट

कंपनी ने आज बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज से लिए गए कर्ज पर ब्याज के भुगतान और मूलधन की वापसी में हुई चूक (Defaults) के बारे में अपनी तिमाही जानकारी जारी की. मंगलवार की यह तेजी लगातार चौथे दिन की बढ़त थी.

रिलायंस कॉम्युनिकेशन के शेयर में तेजी. Image Credit: Anshuman Poyrekar/HT via Getty Images

रिलायंस कॉम्युनिकेशन (RCom) के शेयर मंगलवार 6 अप्रैल को ट्रेडिंग के दौरान 5 फीसदी के अपर सर्किट पर लॉक हो गए और भाव 0.90 रुपये प्रति शेयर के भाव पर पहुंच गया. यह उछाल कंपनी की एक अहम घोषणा के बाद आया. कंपनी ने आज बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज से लिए गए कर्ज पर ब्याज के भुगतान और मूलधन की वापसी में हुई चूक (Defaults) के बारे में अपनी तिमाही जानकारी जारी की.

4 दिनों में बंपर तेजी

मंगलवार की यह तेजी लगातार चौथे दिन की बढ़त थी, जिससे चार दिनों का कुल प्रॉफिट बढ़कर 18.42 फीसदी हो गया. यह ऐसे समय में हुआ जब व्यापक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ था.

दिवालियापन की कार्यवाही

स्टॉक में नए सिरे से दिलचस्पी जागने के बावजूद, RCom अपनी भारी कर्ज वाली बैलेंस शीट और चल रही दिवालियापन की कार्यवाही के कारण दबाव में बनी हुई है. फरवरी के आखिर में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सिंगल-बेंच के एक अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था.

उस आदेश ने अनिल अंबानी और Reliance Communications Ltd के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ (Fraud) के तौर पर वर्गीकृत करने के लिए उनके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.

शेयर की कीमत का ट्रेंड

Reliance Communications के शेयरों में बिकवाली और तेज हो गई है. पिछले सात महीनों में शेयर नेगेटिव जोन में बंद हुआ है और कुल मिलाकर 50 फीसदी गिर गया है. 2008 में शेयर में भारी गिरावट (Correction) देखने को मिली थी, जब यह साल भर में 69.56 फीसदी टूट गया था. गिरावट का यह ट्रेंड इस साल भी जारी है. इस साल की शुरुआत में यह गिरकर 0.75 रुपये पर आ गया था.

मार्केट कैपिटलाइजेशन घटा

लंबे समय से चली आ रही इस गिरावट के कारण कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 248 करोड़ रुपये रह गया है. इस नुकसान का सबसे ज्यादा असर छोटे निवेशकों (Retail Investors) पर पड़ा है, क्योंकि Trendlyne के शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, दिसंबर में खत्म हुई तिमाही तक कंपनी की लगभग 94 फीसदी हिस्सेदारी आम जनता के पास थी.

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