ऑटोमेशन की राह पर रेलवे, इसका फायदा उठाने को तैयार ₹1000 करोड़ की कंपनी, ₹900 करोड़ के ऑर्डर से लैस
Quadrant Future Tek नाम की यह कंपनी पहले केबल बनाती थी, लेकिन अब सिग्नलिंग सिस्टम यानी ट्रेन को कंट्रोल करने वाली टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है. कंपनी का फोकस उस सिस्टम पर है जो तय करता है कि ट्रेन कितनी तेज चलेगी, कब रुकेगी और कैसे सेफ रहेगी.
Quadrant Future Tek: भारत की रेलवे दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है. सालों तक सरकार ने ट्रैक बिछाए, ट्रेनें बढ़ाईं और क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया. लेकिन अब कहानी बदल रही है. अब सिर्फ नई ट्रेनें जोड़ना काफी नहीं है. असली जरूरत है ट्रेनों को ज्यादा सेफ और स्मार्ट बनाने की. यानी रेलवे को ऑटोमेशन की तरफ ले जाना. इसी बदलाव के दौर में एक छोटी कंपनी तेजी से उभर रही है.
Quadrant Future Tek नाम की यह कंपनी पहले केबल बनाती थी, लेकिन अब सिग्नलिंग सिस्टम यानी ट्रेन को कंट्रोल करने वाली टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है. कंपनी का फोकस उस सिस्टम पर है जो तय करता है कि ट्रेन कितनी तेज चलेगी, कब रुकेगी और कैसे सेफ रहेगी.
रेलवे में अब ऑटोमेशन की जरूरत क्यों
भारत में रेलवे का नेटवर्क काफी बड़ा हो चुका है. अब समस्या नई लाइन बनाने की नहीं है, बल्कि मौजूदा ट्रैक पर ज्यादा ट्रेनों को सेफ चलाने की है. एक समय के बाद इंसानों के जरिए सिग्नलिंग की सीमा होती है. ऐसे में सॉफ्टवेयर और ऑटोमेटेड सिस्टम की जरूरत बढ़ती है. यही सिस्टम ट्रेनों के बीच दूरी बनाए रखते हैं और हादसों को रोकते हैं.
Quadrant का बदलता बिजनेस मॉडल
Quadrant Future Tek पहले सिर्फ केबल बनाने का काम करती थी. यह केबल रेलवे, डिफेंस और एनर्जी सेक्टर में इस्तेमाल होती हैं. अभी कंपनी की पूरी कमाई इसी बिजनेस से आती है. दिसंबर 2025 तक 9 महीनों में कंपनी ने करीब 96 करोड़ रुपये की कमाई की. पूरे साल के हिसाब से यह करीब 125 से 140 करोड़ रुपये हो सकती है. लेकिन अब कंपनी सिग्नलिंग सिस्टम के बिजनेस में भी उतर रही है. यह नया सेगमेंट अभी शुरुआती चरण में है और इसमें निवेश ज्यादा हो रहा है, जबकि कमाई अभी शुरू नहीं हुई है.
Kavach सिस्टम से बड़ा मौका
भारत सरकार रेलवे में Kavach नाम का ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लागू कर रही है. यह सिस्टम ट्रेन टक्कर, ओवरस्पीड और सिग्नल तोड़ने जैसे जोखिम को कम करता है. इसमें ट्रेन और सॉफ्टवेयर लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं. अगर कोई खतरा होता है, तो सिस्टम खुद कंट्रोल ले लेता है. Quadrant ने इस सिस्टम का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर खुद तैयार किया है. यही कंपनी के लिए बड़ा मौका बन सकता है.
ऑर्डर बुक से दिख रहा भविष्य
कंपनी के पास दिसंबर 2025 तक करीब 919 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं. यह उसकी सालाना कमाई से कई गुना ज्यादा है. हाल ही में कंपनी को चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और बनारस लोकोमोटिव वर्क्स से बड़े ऑर्डर मिले हैं. इन प्रोजेक्ट्स से असली कमाई 2027 से शुरू हो सकती है. यानी अभी ऑर्डर मिले हैं, लेकिन पैसा बाद में आएगा.
निवेश बढ़ा, मुनाफा दबाव में
सिग्नलिंग बिजनेस के लिए कंपनी ने पहले से निवेश करना शुरू कर दिया है. इंजीनियर भर्ती किए गए हैं, सिस्टम बनाए गए हैं और फैक्ट्री तैयार की गई है. इसी वजह से दिसंबर 2025 तक कंपनी को 27.6 करोड़ रुपये का EBITDA घाटा हुआ है. कंपनी ने 2025 में IPO के जरिए करीब 290 करोड़ रुपये जुटाए थे. शेयर अभी करीब 296 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, यानी ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है. बाजार को अभी कंपनी के सिग्नलिंग बिजनेस से कमाई का इंतजार है.
डेटा सोर्स: FE, Groww
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